Strait of Hormuz में फंसी दुनिया, क्या ईरान की ‘tactics’ आचार्य चाणक्य की इस ‘भेद नीति’ का हिस्सा है?


पटना. पश्चिम एशिया इस समय बारूद के ढेर पर बैठा है और बीते 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) अब अपने दूसरे महीने में प्रवेश कर रहा है. अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के जवाब में ईरान ने न केवल मिसाइलों की बौछार की है, बल्कि दुनिया की आर्थिक नब्ज ‘होर्मुज जलसंधि’ (Strait of Hormuz) को भी लगभग ठप्प कर दिया है. दिलचस्प बात यह है कि इस आधुनिक युद्ध की बिसात पर बिछी चालें आचार्य चाणक्य की 2300 साल पुरानी कूटनीति की याद दिलाती हैं. वर्तमान में ईरान और अमेरिकिा-इजरायल से बीच युद्ध की ऐसी ही परिस्थितियों को देखते हुए, आचार्य चाणक्य की नीतियां, ‘षड्गुण्य सिद्धांत’ (Six-fold Policy) यानी छह सूत्री नीति और उनके ‘अर्थशास्त्र’ के सिद्धांत निम्नलिखित रणनीतिक सुझाव देते हैं. लेकिन, पहले जानते हैं कि युद्ध की वर्तमान स्थिति क्या है.

युद्ध का वर्तमान परिदृश्य और 28 दिनों का कोहराम

युद्ध के 28वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर होने वाले हमलों को 10 दिनों के लिए टाल दिया है, ताकि शांति वार्ता को एक मौका दिया जा सके. हालांकि, जमीन पर स्थिति तनावपूर्ण है. तेहरान और यज्द जैसे शहरों में मिसाइल हमले जारी हैं, जिनमें अब तक 2,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. ईरान ने भी पलटवार करते हुए रियाद (सऊदी अरब) पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं और अमेरिकी ठिकानों के पास रहने वाले नागरिकों को इलाका खाली करने की चेतावनी दी है. यानी मामला सुलझने की जगह और उलझता जा रहा है. ऐसे ही समय में याद आते हैं आचार्य चाणक्य और उनकी बताई गई युद्ध नीति. वर्तमान में ईरान और अमेरिका-इजरायल के साथ जिस प्रकार का युद्ध चल रहा है ऐसी परिस्थितों के लिए आचार्य चाणक्य ने कई नीतियां बताई हैं, जो प्रासंगिक लगती हैं.

चाणक्य की ‘भेद और दंड नीति’ का आधुनिक युद्ध

आचार्य चाणक्य ने ‘अर्थशास्त्र’ में शत्रुओं को कमजोर करने के लिए ‘भेद नीति’ (आंतरिक फूट) का सुझाव दिया था. 2026 के इस संघर्ष की जड़ें जनवरी में ईरान के भीतर हुए विशाल नागरिक विरोध प्रदर्शनों में छिपी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा इन प्रदर्शनों का समर्थन करना चाणक्य की उसी नीति का हिस्सा था, जिसके तहत शत्रु को युद्ध से पहले ही भीतर से खोखला कर दिया जाए. वहीं, इजरायल द्वारा ईरान के शीर्ष नेतृत्व और आईआरजीसी (IRGC) कमांडरों को चुन-चुन कर निशाना बनाना आचार्य चाणक्य की ‘दंड नीति’ और ‘तीक्ष्ण’ (गुप्त हमलावर) के उपयोग का आधुनिक उदाहरण है.

होर्मुज की घेराबंदी- चाणक्य नीति का आर्थिक युद्ध

आचार्य चाणक्य के अनुसार, “कोष ही शक्ति का मूल है.” ईरान ने इसी सिद्धांत को अपनाते हुए दुनिया के 20% तेल और गैस की सप्लाई लाइन यानी होर्मुज जलसंधि को बंद कर दिया है. इसके परिणामस्वरूप ब्रेंट क्रूड की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं. ईरान की यह रणनीति सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रहार कर अमेरिका और उसके सहयोगियों को दबाव में लाने की कोशिश है, जिसे चाणक्य ने शत्रु के संसाधनों को नष्ट करने की कला कहा था.

आचार्य चाणक्य का षडगुण्य सिद्धांत, कूटनीतिक ‘शतरंज’

वर्तमान में चल रही शांति वार्ताएं चाणक्य के ‘षडगुण सिद्धांत’ (Six-fold Policy) को परिभाषित करती हैं.आचार्य चाणक्य के षड्गुण सिद्धांत (Six-fold Policy) के सभी छह गुणों का विवरण नीचे दिया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों और युद्ध की स्थिति में राज्य के व्यवहार को निर्धारित करते हैं.

  • संधि (Peace Treaty): शत्रु के साथ समझौता करना. जब शत्रु अधिक शक्तिशाली हो या समान शक्ति वाला हो और युद्ध से केवल हानि की संभावना हो, तो आचार्य चाणक्य ‘संधि’ का सुझाव देते हैं. वर्तमान में अमेरिका द्वारा ईरान को दिया गया 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव इसी का हिस्सा है.
  • विग्रह (War/Hostility): शत्रु के विरुद्ध युद्ध की घोषणा. जब राजा अपनी शक्ति को पर्याप्त समझता है और शत्रु कमजोर होता है, तब ‘विग्रह’ अपनाया जाता है. इजरायल द्वारा ईरान के मिसाइल ठिकानों पर हमले विग्रह का साक्षात उदाहरण हैं.
  • यान (Expedition/Marching): युद्ध के लिए प्रस्थान या सैन्य तैयारी. शत्रु को डराने या प्रत्यक्ष आक्रमण के लिए सेना को सीमा पर तैनात करना ‘यान’ है. फारस की खाड़ी में अमेरिकी युद्धपोतों और बी-52 बॉम्बर की तैनाती ‘यान’ की श्रेणी में आती है.
  • आसन (Neutrality/Waiting): सही समय का इंतजार करना और तटस्थ रहना. जब राजा को लगे कि वह और शत्रु दोनों समान शक्ति के हैं और युद्ध किसी के पक्ष में नहीं जाएगा, तब ‘आसन’ यानी तटस्थता अपनाई जाती है. कई खाड़ी देश फिलहाल इसी नीति पर चल रहे हैं.
  • संश्रय (Alliance/Protection): किसी अधिक शक्तिशाली राजा या संगठन की शरण लेना. यदि कोई देश अपनी रक्षा करने में सक्षम न हो, तो वह ‘संश्रय’ लेता है. इजरायल और अमेरिका का सैन्य गठबंधन और ईरान का रूस की ओर देखना ‘संश्रय’ है.
  • द्वैधीभाव (Double-faced Policy/Duplicity): एक शत्रु के साथ संधि करना और दूसरे के साथ युद्ध (या एक ही शत्रु के साथ बातचीत और संघर्ष दोनों जारी रखना). इसे ‘दोहरी नीति’ भी कहते हैं. अमेरिका का एक तरफ प्रतिबंध लगाना और दूसरी तरफ वार्ता की पेशकश करना ‘द्वैधीभाव’ का आधुनिक कूटनीतिक रूप है.

खास बात यह है कि आचार्य चाणक्य का मानना था कि एक कुशल शासक को अपनी स्थिति और लाभ के अनुसार इन छह नीतियों में से चुनाव करना चाहिए.

ईरान-इजरायल युद्ध 2026: अमेरिका के ’15 सूत्रीय’ प्लान और चाणक्य के ‘षडगुण्य’ सिद्धांत में समानता है. (एआई जेनरेटेड)

आगे क्या? आचार्य चाणक्य का ‘विजय मंत्र’

आचार्य चाणक्य ने सिखाया था कि “अपूर्ण शत्रु और अपूर्ण अग्नि फिर से प्रबल हो जाते हैं.” इसलिए, इजरायल और अमेरिका की रणनीति ईरान की परमाणु क्षमता और सैन्य तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त करने की है. दूसरी ओर, ईरान अपनी भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाकर युद्ध को लंबा खींचने (आसन) और दुनिया को आर्थिक संकट में डालने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में सवाल यह कि क्या 6 अप्रैल तक दी गई ट्रंप की मोहलत काम आएगी या पश्चिम एशिया एक ऐसे अंतहीन महायुद्ध में फंसेगा जिसका पूर्वानुमान चाणक्य ने सदियों पहले लगा लिया था? यह आने वाले 10 दिन तय करेंगे.



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