नई दिल्ली. पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित ने भारत पर हमले की बात कहकर खुद अपने मुल्क का मजाक बना दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका अगर पाकिस्तान पर हमला करता है तो पाकिस्तान भारत पर जहां चाहे वहां हमला कर सकता हैं. लेकिन ऐसा कहते वक्त शायद वह भूल गए कि यदि भारत ने चाह लिया तो पाकिस्तान धरती के नक्शे से ही गायब हो जाएगा. ऐसा भारत की परमाणु नीति (Nuclear Doctrine) कहती है.
जहां साफ-साफ लिखा है कि अगर भारत पर परमाणु हमला होता है, तो दुश्मन कल्पना भी नहीं कर सकता कि उसके साथ क्या होगा. हालांकि, किसी भी देश पर पहले परमाणु हमला नहीं करने की बात भी कही गई है. तो सुन लें अब्दुल बासित, मुगालते में जीना छोड़ दें… दिल्ली-मुंबई पर हमला करना कोई बच्चों का खेल या हलवा नहीं है. भारत ने मारा तो कराची से पेशावर तक सब साफ हो जाएगा.
अब्दुल बासित ने क्या कहा: अब्दुल बासित ने एक टीवी शो में अपनी शर्मिंदगी को बचाने के लिए भारत पर हमले की बात कही. उन्होंने बेहद अटपटा सा बयान दिया. पाकिस्तान के एबीएन न्यूज में एंकर के सवालों का जवाब देते हुए गीदड़भभकी दी. भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रह चुके बासित ने एक टेलीविजन डिबेट में अमेरिका के हमले के जवाब में भारत पर हमले को लेकर शेखी बघारी. उन्होंने कहा, “मान लीजिए, ईरान में हालात खराब हो जाते हैं. इजरायल हमारे पड़ोस में आकर बैठ जाता है. ऐसे हालात बन जाते हैं कि जहां अमेरिका भी हमारे न्यूक्लियर प्रोग्राम को बुरी नजर से देखता है, या फिर हमारे परमाणु क्षमता को तबाह करने की कोशिश करता है, जो नामुमकिन.”
उन्होंने आगे कहा, “लेकिन, मैं सबसे बुरे हालात की बात कर रहा हूं, जो कि नामुमकिन है, क्योंकि पाकिस्तान की इतनी क्षमता है कि वह अपनी रक्षा कर सके. लेकिन, अगर कोई ऐसे हालात बन जाते हैं कि अगर अमेरिका ने पाकिस्तान पर हमला कर दिया… हमारे न्यूक्लियर रेंज में अमेरिका नहीं है, हम क्षेत्रीय इलाकों में उनके अड्डों पर भी नहीं पहुंच सकते या हम इजरायल पर भी हमला नहीं कर सकते, तो हमारे लिए क्या रास्ता होगा.”
फिर अटपटा-सा बयान देते हुए अब्दुल बासिल ने कहा, “हमने तो देखिए, और कुछ नहीं करना. अगर हमारी रेंज अमेरिका तक न भी हुई और हम पर तो किसी ने बुरी नजर डाली, तो हमें तो बिना सोचे समझे भारत पर हमला कर देना है. मुंबई पर कर देना है, नई दिल्ली पर कर देना है. हमें तो छोड़ना नहीं है. देखी जाएगी, जो कुछ बाद में होता है. हमारे पास और कोई रास्ता नहीं होगा, अगर अमेरिका हम पर हमला करता है, जो कि नामुमकिन है. तो ये बात जान लेनी चाहिए दुनिया को कि अगर हम पर किसी ने बुनी निगाह डाली, तो हम जवाब दिए बिना पीछे नहीं हटेंगे.”
भारत की परमाणु नीति
भारत की परमाणु नीति बेहद स्पष्ट, जिम्मेदार और मुख्य रूप से रक्षात्मक है. 1998 के पोखरण परीक्षण के बाद, 2003 में भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर अपनी परमाणु नीति का मसौदा पेश किया था. इस नीति का मूल उद्देश्य किसी देश पर दबदबा बनाना नहीं, बल्कि किसी भी बाहरी हमले को रोकना है.
भारत की परमाणु नीति के 5 सबसे अहम सिद्धांत:
‘नो फर्स्ट यूज’: यह भारत की नीति का सबसे मुख्य स्तंभ है. इसका सीधा मतलब है कि भारत कभी भी अपनी तरफ से पहल करते हुए किसी भी देश पर पहले परमाणु हमला नहीं करेगा.
न्यूनतम विश्वसनीय निवारक: भारत परमाणु हथियारों की अंधी दौड़ में शामिल नहीं है. नीति के अनुसार, देश सिर्फ उतने ही परमाणु हथियार और मिसाइलें रखेगा, जो दुश्मनों के मन में खौफ पैदा करने और किसी भी दुस्साहस को रोकने के लिए पर्याप्त हों.
व्यापक जवाबी कार्रवाई: ‘नो फर्स्ट यूज’ का मतलब कमजोरी बिल्कुल नहीं है. नीति में साफ चेतावनी दी गई है कि अगर भारत के भूभाग या दुनिया में कहीं भी भारतीय सुरक्षाबलों पर परमाणु हमला होता है, तो भारत का जवाबी प्रहार इतना भयानक और विनाशकारी (Massive) होगा कि दुश्मन देश उसे बर्दाश्त नहीं कर पाएगा.
गैर-परमाणु देशों को सुरक्षा की गारंटी: जिन देशों के पास परमाणु हथियार नहीं हैं, भारत उनके खिलाफ कभी भी परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की सोच भी नहीं रखेगा.
रासायनिक या जैविक हमले पर विकल्प खुला: यदि भारत पर कोई देश बड़े पैमाने पर रासायनिक या जैविक हथियारों से हमला करता है, तो भारत इसके जवाब में भी परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का विकल्प खुला रखता है.





