ईरान-अमेरिका जंग की आग और भड़कती जा रही है. ईरान जंग की तपिश के बीच पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मंगलवार को फोन कॉल पर बातचीत हुई. हालांकि, उन दोनों की बातचीत के बीच एक तीसरा शख्स भी था. जी हां, दुनिया के नंबर वन अरबपति एलन मस्क ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई फोन कॉल में हिस्सा लिया. यह पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान दो नेताओं के बीच कॉल में किसी निजी नागरिक की असामान्य उपस्थिति है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने यह दावा किया.
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर चर्चा की, जिसमें दोनों नेताओं ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होरमुज को खुला रखने की अहमियत पर जोर दिया.
मस्क ने भी पीएम मोदी और ट्रंप के बीच हुई कॉल में हिस्सा लिया, दो अमेरिकी अधिकारियों ने NYT को बताया, जिससे संकेत मिलता है कि दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति ने पिछले साल सरकार से बाहर होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ अपने रिश्ते सुधार लिए हैं. यह स्पष्ट नहीं है कि मस्क कॉल पर क्यों थे या उन्होंने कुछ कहा या नहीं.
अमेरिकी और भारतीय अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप और मोदी के बीच हुई कॉल का फोकस खाड़ी में बढ़ते संकट पर था, खासकर ईरानी सेना द्वारा स्ट्रेट ऑफ होरमुज पर नियंत्रण, जो दुनियाभर में तेल और गैस की शिपिंग के लिए बेहद जरूरी है.
इस बातचीत की पुष्टि करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच “मूल्यवान विचारों का आदान-प्रदान” हुआ और क्षेत्र में शांति और स्थिरता की जरूरत पर सहमति बनी. “राष्ट्रपति ट्रंप से कॉल प्राप्त हुई और पश्चिम एशिया की स्थिति पर उपयोगी विचार-विमर्श हुआ. भारत जल्द से जल्द तनाव कम करने और शांति बहाल करने का समर्थन करता है,” मोदी ने एक पोस्ट में कहा.
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“स्ट्रेट ऑफ होरमुज को खुला, सुरक्षित और सुलभ रखना पूरी दुनिया के लिए जरूरी है,” उन्होंने आगे कहा, साथ ही बताया कि दोनों पक्ष शांति और स्थिरता के लिए चल रहे प्रयासों पर संपर्क में रहेंगे.
स्ट्रेट ऑफ होरमुज, एक संकीर्ण लेकिन महत्वपूर्ण जलमार्ग, दुनिया के सबसे अहम तेल ट्रांजिट रूट्स में से एक है, जिससे 20 प्रतिशत वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति होती है. क्षेत्र में किसी भी तरह की बाधा ऊर्जा बाजारों और दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं, जिसमें भारत भी शामिल है, पर दूरगामी असर डाल सकती है.
किसी भी सरकार ने मस्क की उपस्थिति को आधिकारिक बयान या इंटरव्यू में नहीं बताया. ट्रंप के 2024 में चुनाव जीतने के बाद, मस्क को डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसका उद्देश्य संघीय संचालन और खर्च में कटौती करना था, जिससे मस्क और ट्रंप प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के बीच तनाव बढ़ा.
हालांकि, ट्रंप और मस्क के बीच प्रशासन के ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल एक्ट’ (OBBBA) पर भारी मतभेद के बाद दोनों अलग हो गए, जिसमें बड़े पैमाने पर टैक्स कट, डिरेगुलेशन और सीमा सुरक्षा पर फोकस था. दोनों नेताओं ने तब से रिश्ते सुधारने की कोशिश की है.
मस्क की भागीदारी, जो किसी सरकारी अधिकार के बिना दुर्लभ है, ऐसे समय में आई है जब कंपनियों ने खाड़ी क्षेत्र के देशों के संप्रभु धन कोष से भारी निवेश लिया है. मस्क भारत में भी अपने कारोबार का विस्तार करना चाहते हैं, जहां सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं जैसी परियोजनाओं के लिए नियामक मंजूरी अभी लंबित है.





