सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी होमलैंड सिक्यूरिटी डिपार्टमेंट (DHS) ने हाल ही में सुरक्षा एजेंसियों को जारी एक बुलेटिन में कहा है कि अली खामेनेई की हत्या के बाद खतरे का माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया है. हालांकि अभी तक अमेरिका के भीतर किसी विशिष्ट या विश्वसनीय हमले की जानकारी सामने नहीं आई है.
ईरान के फतवों ने बढ़ाई टेंशन
अमेरिकी खुफिया एजेंसियां समय-समय पर पूरे देश की एजेंसियों को संभावित खतरों और उनसे निपटने के उपायों से संबंधित बुलेटिन जारी करती रहती हैं. इसी कड़ी में जारी किए गए एक ‘क्रिटिकल इंसिडेंट नोट’ में बताया गया कि दो प्रमुख ईरानी धार्मिक नेताओं ने फारसी भाषा में अलग-अलग फतवे जारी किए हैं, जिनमें दुनियाभर के मुसलमानों से खामेनेई की मौत का बदला लेने की अपील की गई है. बुलेटिन में कहा गया है कि इन फतवों के साथ-साथ ईरानी सरकार की बयानबाजी और सोशल मीडिया पर शासन समर्थकों की तरफ से बदले की बात करने से उन चरमपंथियों का खतरा बढ़ सकता है जो ईरानी शासन का समर्थन करते हैं.
रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया कि इस्लामिक रिव्योलूशनरी गार्ड कोर्प (आईआरजीसी) की ओर से जारी एक संदेश में कहा गया है कि ‘दुश्मन अब दुनिया में कहीं भी सुरक्षित नहीं रहेगा, यहां तक कि अपने घरों में भी नहीं.’
FBI ने बढ़ाया अलर्ट लेवल
अमेरिकी अधिकारियों ने अभी तक देश के भीतर किसी ठोस खतरे की पुष्टि नहीं की है, लेकिन कानून प्रवर्तन से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार अमेरिका और इजराइल की ओर से हमले शुरू होने के बाद संघीय जांच एजेंसी (FBI) ने पूरे देश में अलर्ट का स्तर बढ़ा दिया है. अधिकारियों की खास चिंता अमेरिका के ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा, सरकारी संस्थानों को संभावित साइबर हमलों से बचाने और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने को लेकर है.
इसी बीच अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने निजी कंपनियों को भी अलग से चेतावनी जारी की है. इसमें कहा गया है कि ईरान समर्थित साइबर समूहों की ओर से अमेरिकी संस्थानों पर साइबर हमले करने की लगातार धमकियां दी जा रही हैं, जिससे वित्तीय सेवाओं से जुड़े संस्थानों पर हमलों का खतरा बढ़ सकता है.
फाइनेंस सेक्टर पर साइबर अटैक
अमेरिकी एजेंसियों के अनुसार इतिहास बताता है कि अमेरिकी वित्तीय क्षेत्र अक्सर ईरान समर्थित साइबर हमलावरों के प्रमुख निशाने पर रहा है. ऐसे में बैंकों और वित्तीय संस्थानों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है. बुलेटिन में यह भी बताया गया कि हाल के दिनों में ईरान से जुड़े कुछ हैकर समूहों ने सार्वजनिक रूप से दावा किया है कि उन्होंने इजराइल और उसके सहयोगी देशों की साइबर सिस्टम्स को निशाना बनाया है. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है.
अमेरिकी एजेंसियों ने संगठनों को सलाह दी है कि वे किसी भी संभावित साइबर खतरे के संकेतों पर नजर रखें और अपने नेटवर्क की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करें. इसके अलावा अमेरिका के रक्षा ठेकेदारों को भेजे गए एक अन्य नोटिस में एनएसए और एफबीआई ने चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़े साइबर समूह निकट भविष्य में अमेरिकी उपकरणों और नेटवर्क को निशाना बना सकते हैं.
खास तौर पर उन कंपनियों को अधिक जोखिम वाला माना गया है जिनका संबंध इजरायली रक्षा या अनुसंधान कंपनियों से है. अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने इन कंपनियों को अपने साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल को और मजबूत करने की सलाह दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच साइबर हमले अब आधुनिक युद्ध का एक महत्वपूर्ण हथियार बन चुके हैं. ऐसे में सरकारें और निजी कंपनियां दोनों ही साइबर सुरक्षा को लेकर पहले से अधिक सतर्क हो रही हैं.





