वॉशिंगटन. अमेरिकी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि चल रहे संघर्ष के पहले चार दिनों में अमेरिकी और सहयोगी बलों ने ईरान की सैन्य क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया है. ईरान द्वारा दागी जा रही मिसाइलों में भारी कमी आई है और अमेरिकी बलों ने ईरान में काफी अंदर तक हमले बढ़ा दिए हैं.
पेंटागन में एक प्रेस ब्रीफिंग में बोलते हुए युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने ईरान के सैन्य ढांचे को पहले ही भारी नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने कहा, ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के बारे में आज मैं आपके सामने एक स्पष्ट संदेश लेकर खड़ा हूं. अमेरिका निर्णायक, विनाशकारी और निर्दयता से जीत रहा है.’ यह अभियान शनिवार तड़के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे आदेश पर शुरू हुआ था और अभी भी अपने शुरुआती चरण में है.
हेगसेथ ने कहा कि पहली बात तो यह है कि इस अभियान को शुरू हुए अभी केवल चार दिन हुए हैं. आंकड़े बदल रहे हैं, स्थिति सामान्य हो रही है और अधिक सेनाएं पहुंच रही हैं. दूसरी बात, इस अभियान को शुरू हुए केवल चार दिन हुए हैं और परिणाम अविश्वसनीय रहे हैं, वास्तव में ऐतिहासिक.
वायु सेना के ज्वॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान में 2,000 से अधिक ठिकानों पर पहले ही हमला कर चुका है. आज सुबह तक, अमेरिकी केंद्रीय कमान लगातार प्रगति कर रही है. केन ने कहा कि ईरान द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों की संख्या लड़ाई के पहले दिन की तुलना में 86 प्रतिशत कम हो गई है, जिसमें अकेले पिछले 24 घंटों में 23 प्रतिशत की कमी आई है. ईरान के ड्रोन हमलों में भी भारी गिरावट आई है.
उन्होंने कहा कि और उनके एकतरफा हमले वाले ड्रोन लॉन्च शुरुआती दिनों की तुलना में 73 प्रतिशत कम हो गए हैं. पेंटागन के अनुसार, यह अभियान तीन मुख्य उद्देश्यों पर केंद्रित है, ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना, उसकी नौसेना को निष्क्रिय करना और तेहरान को अपनी सैन्य शक्ति का पुनर्निर्माण करने से रोकना.
उन्होंने कहा कि पहला, हम ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल प्रणालियों को निशाना बनाकर नष्ट कर रहे हैं. केन ने कहा कि दूसरा, हम ईरानी नौसेना को नष्ट कर रहे हैं. तीसरा, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ईरान अपनी युद्ध क्षमता का तेजी से पुनर्निर्माण या पुनर्गठन न कर सके.
जनरल ने कहा कि अमेरिकी सेना पहले ही एक पनडुब्बी सहित 20 से अधिक ईरानी नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर चुकी है, जिससे युद्ध क्षेत्र में ईरान की नौसैनिक उपस्थिति काफी कमजोर हो गई है. पेंटागन ने संघर्ष के दौरान हुई एक दुर्लभ नौसैनिक कार्रवाई का भी जिक्र किया. केन ने कहा कि 1945 के बाद पहली बार, अमेरिकी नौसेना की एक तीव्र आक्रमणकारी पनडुब्बी ने एक ही मार्क 48 टॉरपीडो का उपयोग करके दुश्मन के युद्धपोत को डुबो दिया है.
पेंटागन ने यह भी पुष्टि की कि संघर्ष के शुरुआती चरणों में छह अमेरिकी सैनिक शहीद हुए. केन ने उनमें से चार के नाम बताए. केन ने बताए कि कैप्टन कोडी कॉर्क, सार्जेंट फर्स्ट क्लास नोआ टीगेन्स, सार्जेंट फर्स्ट क्लास निकोल एमोर और सार्जेंट डेक्लन कोडी शहीद हो गए हैं. ये सभी अमेरिकी सेना रिजर्व की 103वीं सस्टेनमेंट कमांड के थे. केन ने कहा कि हमारे शहीद सैनिकों के परिवारों के साथ हम आज शोक में शामिल हैं.
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि कई क्षेत्रीय सहयोगी ईरानी हमलों के खिलाफ रक्षात्मक अभियानों में भाग ले रहे हैं. केन ने कहा कि जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और कुवैत ने पूरे क्षेत्र में नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाले ड्रोन और मिसाइलों को रोका है. शुरुआती दौर में मिली सफलताओं के बावजूद, दोनों अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि संघर्ष अभी भी खतरनाक और अनिश्चित बना हुआ है.
केन ने कहा कि 100 घंटे बीत चुके हैं. अभी तो शुरुआत ही है. ये अभियान जटिल, खतरनाक हैं और अभी खत्म होने से बहुत दूर हैं. मिसाइल हमलों और तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को लेकर ईरान के साथ महीनों से बढ़ते तनाव के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया. वाशिंगटन ने बार-बार कहा है कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान के मिसाइल और सैन्य ढांचे को नष्ट करना और उसे परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है.





