ईरान ने अमेरिका का युद्धविराम प्रस्ताव खारिज किया, पश्चिम एशिया में जमीनी हमले किए


ईरान ने बुधवार को पश्चिम एशिया में युद्धविराम के अमेरिका के प्रस्ताव को खारिज कर दिया और इजराइल व खाड़ी अरब देशों पर हमले तेज कर दिए। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़े विभिन्न गुटों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि लड़ाई ‘उन सीमाओं को पार कर चुकी है, जिनकी कल्पना नेताओं ने भी नहीं की थी’।

युद्धविराम प्रस्ताव के बावजूद ईरान ने कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भी निशाना बनाया, जिससे वहां भीषण आग लग गयी। ईरान ने ये जवाबी हमले ऐसे समय में किये हैं, जब इजराइल ने तेहरान पर हवाई हमले किए और वाशिंगटन ने क्षेत्र में पैराट्रूपर्स व अधिक संख्या में मरीन सैनिकों की तैनाती की।

ईरान के सरकारी समाचार प्रसारक ‘प्रेस टीवी’ ने एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से बताया कि ईरान ने अमेरिका के युद्धविराम प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। प्रेस टीवी की यह खबर पाकिस्तान द्वारा ईरान को प्रस्ताव भेजे जाने के बाद आई है। प्रेस टीवी ने अधिकारी के हवाले से बताया, “ईरान युद्ध तभी समाप्त करेगा जब वह ऐसा चाहेगा और जब उसकी शर्तें पूरी होंगी।”अधिकारी ने बताया कि तेहरान पश्चिम एशिया में अपने ‘जोरदार हमले’ जारी रखेगा।

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुतारेस ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़े विभिन्न गुटों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि लड़ाई ‘उन सीमाओं को पार कर चुकी है, जिनकी कल्पना नेताओं ने भी नहीं की थी’। उन्होंने अमेरिका और इजराइल से ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने का आग्रह किया। गुतारेस ने ईरान से खाड़ी देशों पर हमले रोकने का आह्वान करते हुए कहा, ‘यह हद से ज्यादा हो गया है’।

ईरान को प्रस्ताव सौंपने वाले पाकिस्तान के दो अधिकारियों ने 15 बातों का जिक्र करते हुए बताया कि इसमें प्रतिबंधों में राहत, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को वापस लेना, मिसाइलों की सीमा तय करना और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना शामिल है।

होर्मुज एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जिसके माध्यम से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल का निर्यात होता है। मध्यस्थता प्रयासों में शामिल मिस्र के एक अधिकारी ने बताया कि प्रस्ताव में सशस्त्र समूहों को ईरान के समर्थन पर प्रतिबंध शामिल हैं।

अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर जानकारी साझा की। इनमें से कुछ मुद्दे युद्ध से पहले की बातचीत में विचारणीय थे।

ईरान ने इस बात पर जोर दिया कि वह अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम या उन क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को दिए जाने वाले समर्थन को लेकर कोई चर्चा नहीं करेगा, जिसे वह अपनी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानता है।



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