Iran Air Defense System : मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल और अमेरिका की लड़ाई अब 23वें दिन में प्रवेश कर गया है. लेकिन बीते गुरुवार को ईरान ने ऐसा कर के दिखा दिया, जो आज तक दुनिया के किसी भी ताकतवर देशों ने नहीं किया था. ईरान ने दावा किया है कि उसने पहली बार अमेरिकी स्टेल्थ फाइटर जेट F‑35 को अपने एयर डिफेंस सिस्टम से निशाना बनाकर गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है. ईरान की सरकारी मीडिया ने इसका वीडियो भी जारी किया है. खास बात यह है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी माना है कि ईरान के ऊपर कॉम्बैट मिशन के दौरान एक F‑35 को डैमेज हुआ, हालांकि विमान और पायलट दोनों सुरक्षित लैंड कर गए. लेकिन F‑35 को अब तक ऐसा स्टेल्थ फाइटर माना जाता था, जिसे ट्रैक और टारगेट करना बेहद मुश्किल होता है. ऐसे में सवाल उठता है कि जिस फायटर प्लेन का 360 डिग्री पर नजर रहता, जो एयर‑टू‑एयर, एयर‑टू‑ग्राउंड और जासूसी मिशन कर सकता है, 2000 किमी प्रति घंटा से अधिक गति, 2200 किमी से अधिक रेंज और लगभग 8100 किलोग्राम वॉर लोड क्षमता रखने वाले एफ-35 को ईरान ने कैसे टारगेट पर ले लिया?
ईरान की सरकारी मीडिया ने सबूत के तौर पर वीडियो जारी की. वहीं आईआरजीसी की तरफ से जारी किये गए बयान में कहा गया है की मध्य ईरान के ऊपर. एक सटीक हमले ने अमेरिकी एफ- 35 को गंभीर नुकसान पहुंचाया है. एफ- 35 को ईरान के एयर डिफेन्स सिस्टम में गुरुवार सुबह करीब 2:30 बजे निशाना बनाया. ये ऑपरेशन 125 से ज्यादा अमेरिकी और इजराइल ड्रोनो को सफलतापूर्वक रोकने के बाद किया गया. ईरान की हवाई रक्षा प्रणालियां में महत्वपूर्ण सुधारों को दर्शाता है. ईरान ने दुनिया के सबसे एडवांस्ड ताकतवर और महंगे लड़ाकू विमान को निशाना बनाया है.
F-35 को लेकर विशेषज्ञों के बीच तीन तरह की चर्चाएं हो रही हैं.
- किसी तीसरे देश जैसे रूस या चीन की मिसाइल से हमला.
- रूस के S‑400 या S‑500 सिस्टम का शायद ईरान ने उपयोग किया हो, लेकिन आधिकारिक तौर पर ईरान के पास ये डिफेंस सिस्टम अभी तक नहीं हैं.
- ईरान के अपने उन्नत सिस्टम खासकर Bavar‑373 या 358 मिसाइल का इस्तेमाल किया हो?
कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान एफ-35 पर हमला करने के लिए Bavar‑373 इस्तेमाल किया होगा, जिसे चीन और रूस की मदद से अपग्रेड किया गया है. ईरान ने खास तौर पर F‑35 जैसे स्टेल्थ जेट, गाइडेड मिसाइल और ड्रोन को ट्रैक व निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया माना जाता है. ईरान इसे रूस के S‑400 और अमेरिकी THAAD के बराबर क्षमता वाला बताता है.
1- उसके एयर डिफेंस सिस्टम में दुनिया के सबसे महंगे और आधुनिक लड़ाकू विमान को भी हिट करने की क्षमता है,
2- अमेरिका और इजराइल ईरान के हवाई क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण नहीं रख पाए हैं,
3- भविष्य में ईरानी आसमान में आने वाले F‑35 भी सुरक्षित नहीं रहेंगे.
अमेरिका के कितने फायटर जेट को ईरान ने तबाह किया?
अमेरिका–ईरान टकराव और अमेरिकी दावों पर भी सवाल उठाती है. इसमें कहा गया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत–पाकिस्तान के बीच हुई जंग ऑपरेशन सिंदूर और विमानों के गिरने पर उलझे हुए बयान दिए, लेकिन अपने 16 अमेरिकी सैन्य विमानों के गिरने पर चुप रहे. सवाल उठाया गया है कि अगर अमेरिका युद्ध में इतना सक्षम है तो उसने 16 सैन्य विमान कैसे गंवा दिए और लगभग 4000–5000 करोड़ रुपये का नुकसान कैसे हो गया?
22 दिन में अमेरिका को कितना नुकसान?
रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती 14 दिनों में अमेरिका के 4 लड़ाकू विमान जिनमें 3 F‑15 और कुल 16 सैन्य एयरक्राफ्ट,जिसमें 4 फाइटर जेट + 12 MQ‑9 रीपर ड्रोन नष्ट हुए. अमेरिका इन नुकसानों को ‘गलती से हुए हमले’ या ‘हादसा’ बताता है, जबकि दूसरे देशों के विमानों के गिरने को ‘झटका’ कहता है. इसी दोहरे मापदंड पर सवाल उठाए गए हैं. KC‑135, F‑15 और MQ‑9 की अनुमानित कीमतें जोड़कर बताया गया है कि केवल विमानों से ही लगभग 5000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, इसमें ईरान द्वारा नष्ट किए गए अमेरिकी रडार सिस्टम शामिल नहीं हैं.
ईरान ने कतर, यूएई, सऊदी अरब और जॉर्डन तक फैले अमेरिकी रडार और एयर डिफेंस नेटवर्क को भी निशाना बनाया, जिससे अमेरिका की सैन्य प्रतिष्ठा पर चोट पहुंची. रिपोर्ट यह आशंका जताती है कि क्या अमेरिका बदनामी से बचने के लिए अपने 16 सैन्य विमानों के गिरने की असली वजह छिपा रहा है और क्या F‑35 पर हमले में ईरान ने कोई नया और अधिक घातक हथियार इस्तेमाल किया? अंत में यह सवाल खुला छोड़ा जाता है कि अमेरिका–ईरान संघर्ष लंबा खिंचेगा या अब किसी निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के लिए ये सबसे बड़ा झटका जो है. F-35 दुनिया का सबसे अडवांस्ड स्टेल्ट फाइटर प्लेन माना जाता है.





