नई दिल्ली7 मिनट पहले
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ये फोटो 20 फरवरी 1999 की है। पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ तब भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को पुनर्जीवित करने की दिशा में बढ़ गए थे।
पूर्व पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ ने 28 मई को अपनी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के साथ कहा था कि 1999 में उनके और तत्कालीन भारतीय पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के बीच हुआ लाहौर समझौता पाकिस्तान ने तोड़ दिया था। ये हमारी गलती थी। इसके दो महीने बाद ही करगिल युद्ध हुआ था।
इस रिपोर्ट को लेकर गुरुवार को भारत ने कहा कि लगता है हमारे पड़ोसियों में सही और निष्पक्ष नजरिया पैदा हो रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर सिंह ने कहा कि पाकिस्तान जानता है कि इस मुद्दे पर हमारी क्या राय है। मुझे इसकी ज़रूरत नहीं है। अब हम देख रहे हैं कि पाकिस्तान में भी इसके कारण निष्पक्ष नजरिया आ रहा है।
लाहौर समझौते में क्या था
शरीफ और वाजपेयी ने 21 फरवरी 1999 को लाहौर समझौता पर हस्ताक्षर किए थे। यह दो पड़ोसियों के बीच एक शांतिपूर्ण समझौता है, जिसमें शांति और सुरक्षा बनाए रखी गई है और दोनों देशों के बीच पीपल-टू-पीपल संबंधों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
इस समझौते में भारत और पाकिस्तान के बीच शांति और स्थिरता बनाए रखने की कोशिश की गई थी। समझौते को बड़ा कदम माना गया। इसके कुछ महीनों बाद ही पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के कारगिल में घुसपैठ की, जिससे कारगिल जंग हुई।
कारगिल युद्ध के समय शरीफ प्रधानमंत्री थे, मुशर्रफ सेना प्रमुख
पाकिस्तान के तब आर्मी चीफ रहे परवेज मुशर्रफ ने अपनी सेना को खुफिया तरीके से मार्च 1999 में जम्मू कश्मीर के कारगिल जिले में घुसपैठ का आदेश दिया था। जब भारत को इस घुसपैठ का पता चला तो बड़े पैमाने पर युद्ध छिड़ गया। नवाज शरीफ के प्रधानमंत्री रहते हुए भारत ने युद्ध जीत लिया था।
