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‘चीन वाली गलती इंडिया के साथ नहीं’, ट्रंप के मंत्री के मुंह से क्या निकल गया?

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पूरी दुनिया में भारत का डंका बज रहा है और यही वजह है कि सुपरपावर अमेरिका के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा रही हैं. नई दिल्ली में आयोजित ‘रायसीना डायलॉग’ के दौरान अमेरिकी डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट क्रिस्टोफर लैंडौ ने एक ऐसा बयान दिया है जिससे साफ जाहिर होता है कि अमेरिका अब भारत की बढ़ती ताकत से अंदर ही अंदर घबराया हुआ है. लैंडौ ने दो टूक शब्दों में कहा कि अमेरिका भारत के साथ ट्रेड डील में ‘चीन वाली गलती’ नहीं दोहराएगा.

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भारत अमेरिका ट्रेड डील पर बोले ट्रंप के मंत्री

वॉशिंगटन: जियो पॉलिटिक्स में भारत के बढ़ते कद से कई देशों को अंदर ही अंदर कुढन हो रही है. इस बीच अमेरिका के अंदर का डर भी बाहर आने लगा है, हाल ही में अमेरिकी डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट क्रिस्टोफर लैंडौ ने ऐसी बात रह दी है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया. उन्होंने नई दिल्ली में हुए ‘रायसीना डायलॉग’ में आकर कह डाला है कि वो चीन वाली गलती भारत के साथ नहीं दोहराएंगे. क्रिस्टोफर को ना जानें क्यों लगता है कि कौन सा देश कितनी तरक्की करेगा, इसका फैसला अमेरिका के हाथ में है. उनकी बातों ने नई डिबेट को हवा देदी है.

भारत-US ट्रेड डील पर क्या बोले ट्रंप के मंत्री?

नई दिल्ली में हुए ‘रायसीना डायलॉग’ में अमेरिकी डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट क्रिस्टोफर लैंडौ की बातों से साफ झलक रहा है कि अमेरिका भारत की बढ़ती ताकत से कितने डरे हुए हैं. उन्होंने कहा है कि अमेरिका अब वो गलती दोबारा नहीं दोहराना चाहता जो उसने 20 साल पहले चीन के साथ की थी. लैंडौ के मुताबिक चीन को छूट देकर अमेरिका ने उसे फलने-फूलने का मौका दिया, लेकिन भारत के मामले में वे ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति पर अड़े हैं. उनका ये बयान इसका सबूत है कि भारत अब दुनिया की मेज पर अपनी शर्तों पर खेल रहा है और अमेरिका अपनी साख बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहा है.

क्या है चीन वाली गलती?

अमेरिकी अधिकारी ने घमंड भरे लहजे में कहा कि वे भारत के साथ ट्रेड डील तो करना चाहते हैं, लेकिन अपनी आंखें बंद करके नहीं. लैंडौ का इशारा उस दौर की तरफ था जब अमेरिका ने चीन को अपने बाजार खोलने दिए और बाद में चीन ने उन्हीं के बाजार में घुसकर उन्हें पछाड़ दिया. अब अमेरिका का कहना है कि वे भारत को भी इसी तरह ‘खुली छूट’ नहीं देंगे जिससे अमेरिकी कंपनियों और वहां के लोगों को नुकसान हो.

अमेरिका इस बात को अच्छी तरह जानता है कि भारत अब दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है और इसके पास बेमिसाल मानवीय संसाधन हैं. लैंडौ ने स्वीकार किया कि भारत एक निर्णायक पार्टनर है. यानी उन्हें ये मानना पड़ेगा कि ट्रेड डील्स का भविष्य भारत ही तय करेगा.

भारत की तरक्की से बढ़ा अमेरिका का डर

लैंडो के बयान से जाहिर है कि अमेरिका अब भारत को बराबर के पार्टनर की तरह देख रहा है, जो उससे आगे निकल सकता है. अब अमेरिका और भारत के बीच जो ट्रेड डील होगी, वो दोनों देशों के फायदे को देखते हुए फाइनल की जाएगी. उसमें अमेरिका की दादागीरी नहीं काम आएगी.

भारत और अमेरिका के बीच यह ‘बायलैटरल ट्रेड एग्रीमेंट’ (BTA) सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह भविष्य की दिशा तय करेगा. अमेरिका डरा जरूर है, लेकिन वह भारत के साथ मिलकर चलने को अपनी मजबूरी और जरूरत दोनों मानता है. अब देखना यह है कि जब यह डील फाइनल होगी, तो पलड़ा किसका भारी रहता है.

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Utkarsha Srivastava

उत्कर्षा श्रीवास्तव डिजिटल जर्नलिस्ट हैं और जियो-पॉलिटिक्स टॉपिक्स पर लिखती हैं, वो वर्तमान में News18 Hindi के World सेक्शन में कार्यरत हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में 10+ वर्षों का अनुभव है, इस दौरान उन्होंने क…और पढ़ें





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