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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से फोन पर बात की. उन्होंने पश्चिम एशिया की स्थिति, यूएई पर हमलों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा पर चर्चा की.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति (File Photo)
मिडिल ईस्ट में जंग के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ फोन पर बातचीत की है. दोनों शीर्ष नेताओं के बीच पश्चिम एशिया के मौजूदा तनावपूर्ण हालात, यूएई पर हुए हालिया हमलों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा जैसे कई गंभीर मुद्दों पर विस्तार से बात हुई. प्रधानमंत्री मोदी ने खुद एक्स पर इसकी जानकारी शेयर की है.
पीएम मोदी ने लिखा, यूएई के राष्ट्रपति, मेरे भाई महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से बात की और उन्हें ईद की अग्रिम शुभकामनाएं दीं. हमने पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की. यूएई पर हुए उन सभी हमलों की भारत की ओर से कड़ी निंदा को दोहराया, जिनके परिणामस्वरूप निर्दोष लोगों की जान गई है और नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है. हम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के माध्यम से सुरक्षित और स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने के महत्व पर सहमत हुए. हम क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता की जल्द बहाली के लिए एक साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे.
यूएई पर हमलों की निंदा
साफ है कि फोन कॉल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई पर हुए उन सभी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की, जिनके कारण निर्दोष नागरिकों की जान गई है और वहां के सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है. भारत ने वैश्विक मंचों पर हमेशा आतंकवाद और किसी भी संप्रभु राष्ट्र पर होने वाले अकारण हमलों का मुखर विरोध किया है. प्रधानमंत्री ने अपने इसी स्पष्ट रुख को दोहराते हुए यूएई के राष्ट्रपति को आश्वस्त किया कि क्षेत्रीय अस्थिरता और हिंसा के खिलाफ लड़ाई में भारत पूरी मजबूती के साथ संयुक्त अरब अमीरात के साथ खड़ा है. निर्दोष लोगों की जान जाना और आम नागरिकों के इस्तेमाल वाली जगहों को निशाना बनाना किसी भी लिहाज से स्वीकार्य नहीं है, और भारत इस तरह के अमानवीय हिंसक कृत्यों की कड़ी भर्त्सना करता है.
होर्मुज पर बात रही खास
दोनों नेताओं के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा पर भी बात हुई है. प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति अल नाहयान ने इस बात पर सहमति जताई कि होर्मुज से होकर गुजरने वाले समुद्री मार्ग में सुरक्षित और स्वतंत्र नेविगेशन सुनिश्चित करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इस वक्त सबसे बड़ा संकट का कारण बना हुआ है. भारत के भी कई जहाज फंसे हुए हैं.
यूएई भारत के लिए महत्वपूर्ण क्यों?
- व्यापार और अर्थव्यवस्था: यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार और भारत के एक्सपोर्ट के लिए दूसरा डेस्टिनेशन है. दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक ट्रेड एग्रीमेंटहुआ है, जिससे भारतीय कंपनियों को यूएई के बाजार में ड्यूटी-फ्री पहुंच मिली है.
- एनर्जी सिक्योरिटी: भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है. यूएई भारत को कच्चे तेल और एलपीजी का एक प्रमुख, सुरक्षित और विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता है, जो भारत की अर्थव्यवस्था का पहिया चालू रखता है.
- प्रवासी भारतीय और रेमिटेंस: यूएई में लगभग 35 लाख से अधिक भारतीय रहते और काम करते हैं, जो वहां का सबसे बड़ा प्रवासी समूह है. ये भारतीय हर साल अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा (रेमिटेंस) भारत भेजते हैं. यह पैसा सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है.
- भारी विदेशी निवेश : यूएई के सॉवरेन वेल्थ फंड जैसे ADIA और मुबाडाला भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर , रिन्यूएबल एनर्जी, रिलायंस जैसे बड़े कॉरपोरेट्स और टेक स्टार्टअप्स में अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं. यूएई भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के शीर्ष स्रोतों में से एक है.
- स्ट्रेटजिक एंड डिफेंस टाई: बीते कुछ सालों में दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा संबंध बेहद गहरे हुए हैं. आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, कट्टरपंथ पर लगाम लगाने, समुद्री सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने और वांटेड अपराधियों के प्रत्यर्पण में यूएई भारत का एक बेहद मजबूत और सक्रिय सहयोगी बनकर उभरा है.
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Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें





