भारत अपनी ओर से पड़ोसी धर्म निभाते हुए संकटग्रस्त बांग्लादेश को पाइपलाइन और रेल के जरिए भर-भर कर डीजल की सप्लाई कर रहा है ताकि वहां एनर्जी क्राइसेस न हो. लेकिन ढाका की डिप्लोमेसी में धुरंधर फिल्म के गिरदार ‘रहमान डकैत’ वाली फितरत हावी होती दिख रही है. जिस तरह फिल्म में रहमान डकैत अपने ही बलूच साथियों की पीठ में छुरा घोंपकर ISI के साथ मिलकर पैसा बनाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार था, ठीक वैसी ही चाल प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने चली है. उन्होंने अपने दूत (विदेश मंत्री) को सीधे अमेरिका भेज दिया है. भारत से ईंधन की ‘खैरात’ लेकर अपना घर रोशन करने वाला बांग्लादेश अब अमेरिका की चौखट पर एनर्जी सिक्योरिटी की भीख मांग रहा है.
बांग्लादेश की लाचारी
बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति उस कश्ती जैसी हो गई है जिसके पतवार का पता नहीं और जो हर लहर के साथ अपना किनारा बदल रही है. एक तरफ ढाका अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह भारत की दरियादिली पर टिका है तो दूसरी तरफ उसके मंत्री अमेरिका की चौखट पर एनर्जी सिक्योरिटी की भीख मांगते नजर आ रहे हैं. वाशिंगटन डीसी में बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. खलीलुर रहमान और अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट के बीच हुई मुलाकात ने बांग्लादेश की दोहरी नीति और उसकी लाचारी को दुनिया के सामने ला दिया है. अब वह अमेरिका से लॉन्ग-टर्म को-ऑपरेशन की गुहार लगा रहा है.
भारत से राहत और अमेरिका से इल्तिजा
बांग्लादेश इस समय गहरे ऊर्जा संकट से गुजर रहा है. सप्लाई चेन टूटने और आर्थिक तंगी के कारण देश में बिजली और ईंधन का अकाल है. इस मुश्किल घड़ी में भारत ने बड़े भाई का फर्ज निभाते हुए भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन (IBFPL) के जरिए डीजल की निर्बाध सप्लाई जारी रखी है. इतना ही नहीं भारत अपनी रेल बोगियों को भरकर भी बांग्लादेश की ईंधन की प्यास बुझा रहा है. लेकिन, ढाका की राजनीति का मिजाज देखिए भारत से मदद लेने के बावजूद बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान अमेरिका पहुंचे और वहां अपनी एनर्जी सिक्योरिटी के लिए मदद मांगी. उन्होंने अमेरिकी ऊर्जा सचिव से कहा कि बांग्लादेश सप्लाई चेन की दिक्कतों के कारण गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है और उन्हें अमेरिका के सहयोग की सख्त जरूरत है.
क्या अमेरिका बनेगा बांग्लादेश का नया खेवनहार?
बैठक के दौरान अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान को चुनाव जीतने पर बधाई तो दी लेकिन ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर केवल विचार करने का आश्वासन दिया.
· अमेरिका का दांव: अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह बांग्लादेश को ऊर्जा उत्पादों की बिक्री बढ़ाने और सुरक्षित ऊर्जा समाधानों पर चर्चा करने को तैयार है. यानी जो डीजल भारत मित्रता के नाते रियायती शर्तों पर दे रहा है अमेरिका उसे अपने व्यापारिक हितों के चश्मे से देख रहा है.
· सिक्योरिटी की भीख: बांग्लादेश अब अमेरिका से एनर्जी प्रोडक्ट्स की खरीद बढ़ाने की संभावना तलाश रहा है. विशेषज्ञों का सवाल है कि जिस देश का खजाना पहले से ही खाली है, वह महंगे अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों का बोझ कैसे उठाएगा?
सवाल-जवाब
बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने अमेरिका में किससे मुलाकात की?
विदेश मंत्री डॉ. खलीलुर रहमान ने वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट से मुलाकात की.
बांग्लादेश किस संकट के लिए अमेरिका से मदद मांग रहा है?
बांग्लादेश ईरान युद्ध के बीच सप्लाई चेन में रुकावटों के कारण पैदा हुए अपने ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) संकट के लिए मदद मांग रहा है.
भारत बांग्लादेश को ईंधन कैसे भेज रहा है?
भारत मैत्री पाइपलाइन और रेलवे के जरिए बांग्लादेश को भारी मात्रा में डीजल की सप्लाई कर रहा है.
अमेरिका ने बांग्लादेश को क्या आश्वासन दिया है?
अमेरिका ने बांग्लादेश की ऊर्जा सुरक्षा की मांगों पर विचार करने और लॉन्ग-टर्म कोऑपरेशन बढ़ाने का आश्वासन दिया है.





