ईरान पर सबसे घातक प्रहार की तैयारी में अमेरिका! ट्रंप ने जापान से भेजे 2200 मरीन कमांडो, 3 जंगी जहाज और F-35 जेट


वाशिंगटन: ईरान के साथ जंग लड़ रहे अमेरिका ने और फायरपावर भेजने का फैसला किया है. ‘पेंटागन’ ने जापान में तैनात अपनी सबसे घातक यूनिट, 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट (MEU) को तुरंत खाड़ी क्षेत्र में पहुंचने का आदेश दिया है. इस टुकड़ी में 2,200 जांबाज मरीन कमांडो और तीन बड़े उभयचर (Amphibious) युद्धपोत शामिल हैं. हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन्हें सीधे जमीनी हमले के लिए नहीं भेजा जा रहा है, लेकिन इन जहाजों पर लदे F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स और MV-22 ओस्प्रे विमान किसी भी बड़े हमले को अंजाम देने के लिए तैयार हैं. यह तैनाती ऐसे समय में हो रही है जब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कही जाने वाली ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) पर ईरान ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली है. दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है, जिसे ईरान ने ब्लॉक करने की धमकी दी है.

तेल की कीमतों ने तोड़ा रिकॉर्ड, $100 के पार पहुंचा बैरल

ईरान युद्ध का सबसे भयावह असर वैश्विक बाजार पर दिख रहा है. साल की शुरुआत में जो कच्चा तेल 60 डॉलर प्रति बैरल था, वह अब 100 डॉलर के पार पहुंच चुका है. यूरोप में नेचुरल गैस की कीमतों में 75% का भारी उछाल आया है. ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका हमले नहीं रोकता, तब तक होर्मुज के रास्ते तेल की सप्लाई बाधित रहेगी. ईरान का मकसद तेल की कीमतें बढ़ाकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव बनाना है ताकि वे इस युद्ध को रोक दें.

यूरोप की दोहरी चाल: एक तरफ बातचीत, दूसरी तरफ डर

हैरानी की बात यह है कि जहां अमेरिका अपनी सैन्य ताकत दिखा रहा है, वहीं उसके सहयोगी देश फ्रांस और इटली ने पर्दे के पीछे से ईरान (तेहरान) के साथ बातचीत शुरू कर दी है. ये देश अपने जहाजों के लिए ‘सुरक्षित रास्ता’ मांग रहे हैं.

यूरोपीय देश इस बात से डरे हुए हैं कि अगर लंबे समय तक तेल की सप्लाई रुकी रही, तो उनके देशों में बिजली और ईंधन के दाम आम लोगों के बजट से बाहर हो जाएंगे.

फ्रांस और इटली जैसे देशों ने शुरू में अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों की आलोचना भी की थी, जिससे नाटो देशों के बीच मतभेद साफ दिख रहे हैं.

पेंटागन की नई रणनीति से खतरा

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पेंटागन से और अधिक डिस्ट्रॉयर और जंगी जहाजों की मांग की है. इनका मुख्य काम कमर्शियल जहाजों और तेल टैंकरों को सुरक्षा देना होगा. लेकिन जानकारों का मानना है कि ‘एस्कॉर्ट ऑपरेशन’ (जहाजों की पहरेदारी) तभी शुरू हो पाएगा जब ईरानी हमलों का खतरा थोड़ा कम हो. अभी स्थिति यह है कि कोई भी मर्चेंट शिप इस रास्ते से गुजरने की हिम्मत नहीं कर रहा है.

क्या ईरान झुकने को तैयार है?

ईरान ने अपनी रणनीति साफ रखी है. वह युद्ध के मोर्चे पर पीछे हटने के बजाय आर्थिक मोर्चे पर दुनिया को घुटनों पर लाना चाहता है. मुजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान ने साफ संकेत दिए हैं कि वह किसी भी बातचीत के बदले ट्रंप प्रशासन से युद्ध रोकने की गारंटी चाहता है. अब सबकी नजरें जापान से आ रहे उन 2,200 मरीन्स पर हैं, जिनके पहुंचने के बाद समंदर में तनाव और अधिक बढ़ने की आशंका है. क्या यह सिर्फ एक दबाव बनाने की तकनीक है या फिर किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन की तैयारी, इसका जवाब आने वाले कुछ दिनों में मिल जाएगा.



Source link

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

spot_imgspot_img