सुकून है पसंद तो घूम आएं साहित्य का शहर ‘शांतिनिकेतन’, टैगोर की विरासत को महसूस करने के लिए जरूर करें यहां 5 काम!


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Shantiniketan Travel Guide : टैगोर के सपनों का शहर ‘शांतिनिकेतन’ अब यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट है. अगर आप सुकून और साहित्य को जीना पसंद करते हैं, तो शांतिनिकेतन की यात्रा पर जाएं और जरूर करें ये 5 काम.

अगर आप शोर-शराबे वाली जिंदगी से दूर किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं जहाँ हवाओं में कविता घुली हो और हर दीवार पर कला के रंग बिखरे हों, तो पश्चिम बंगाल का शांतिनिकेतन आपकी अगली मंजिल होनी चाहिए. यूनेस्को की ‘वर्ल्ड हेरिटेज साइट’ में शामिल यह शहर सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के सपनों का वो संसार है, जहाँ शिक्षा और प्रकृति का मिलन होता है. शांतिनिकेतन की लाल मिट्टी (लाल माटी) की अपनी एक अलग ही खुशबू है. अगर आप यहाँ अपनी पहली यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इन 5 अनुभवों को अपनी ‘बकेट लिस्ट’ में जरूर शामिल करें:

1. विश्व भारती विश्वविद्यालय और रवींद्र भवन की सैर- शांतिनिकेतन की आत्मा यहाँ के विश्व भारती विश्वविद्यालय में बसती है. यहाँ आज भी पेड़ों के नीचे कक्षाएं लगती हैं. ‘रवींद्र भवन’ म्यूजियम में गुरुदेव की पांडुलिपियों, चित्रों और उनके निजी सामान को देखना एक भावनात्मक अनुभव है. यहाँ का ‘कला भवन’ अपनी दीवारों पर बनी अद्भुत नक्काशी और भित्ति चित्रों (Murals) के लिए दुनिया भर में मशहूर है.

2. शनिवार को जरूर जाएं सोनाझूरी हाट – अगर आप शनिवार को शांतिनिकेतन में हैं, तो ‘सोनाझूरी हाट’ जाना न भूलें. खोवाई के जंगलों के बीच लगने वाला यह साप्ताहिक मेला हस्तशिल्प प्रेमियों के लिए जन्नत है. यहाँ आपको स्थानीय आदिवासियों द्वारा बनाए गए कांथा स्टिच के कुर्ते, बाटिक प्रिंट की साड़ियाँ और टेराकोटा के गहने मिलेंगे. साथ ही, ढोलक की थाप पर संथाली नृत्य देखना आपके सफर को यादगार बना देगा.

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3. बाउल संगीत की रूहानी धुन- शांतिनिकेतन की यात्रा तब तक अधूरी है जब तक आप ‘बाउल’ (Baul) गायकों को न सुनें. गेरुए वस्त्र पहने ये लोक गायक एकतारे की धुन पर जब रूहानी गीत गाते हैं, तो समय जैसे थम जाता है. इनके गीतों में जीवन का गहरा दर्शन छिपा होता है. सोनाझूरी हाट या शांतिनिकेतन के स्थानीय आश्रमों में आपको ये गायक आसानी से मिल जाएंगे.

4. छतिमतला और अमराकुंज में बिताएं सुकून के पल- ‘छतिमतला’ वह स्थान है जहाँ महर्षि देवेंद्रनाथ टैगोर (गुरुदेव के पिता) ने ध्यान लगाया था. यह शांति और आध्यात्मिकता का केंद्र है. वहीं ‘अमराकुंज’ (आम के बाग) में बैठकर आप उस शांति को महसूस कर सकते हैं जिसने ‘गीतांजलि’ जैसी अमर रचनाओं को जन्म दिया. यहाँ की हरियाली और शांति आपकी मानसिक थकान को मिनटों में दूर कर देगी.

5. कांथा स्टिच और बाटिक की शॉपिंग- शांतिनिकेतन अपनी पारंपरिक कढ़ाई ‘कांथा स्टिच’ के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. यहाँ से आप हाथ से बनी साड़ियाँ, दुपट्टे और थैले (झोला) खरीद सकते हैं. इसके अलावा बाटिक और चमड़े के बने सामान (शांतिनिकेतन लेदर वर्क) भी बहुत प्रसिद्ध हैं. ये चीजें न केवल खूबसूरत हैं, बल्कि स्थानीय कलाकारों को सीधे सहारा देने का एक जरिया भी हैं.

शांतिनिकेतन जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच होता है, जब मौसम सुहाना होता है. यदि आप मार्च में जाते हैं, तो यहाँ का ‘बसंत उत्सव’ (होली) जरूर देखें, जहाँ अबीर और फूलों के साथ टैगोर के गीतों पर पूरा शहर नाचता है.

शांतिनिकेतन वह जगह है जो आपको खुद से रूबरू कराती है. यहाँ की लाल माटी पर चलते हुए आप केवल एक पर्यटक नहीं रहते, बल्कि साहित्य और कला के उस गौरवशाली इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं जो भारत की असली पहचान है.



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