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ग्वीराल एक औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग आयुर्वेद में लंबे समय से स्वास्थ्य सुधार के लिए किया जाता रहा है. यह खून साफ करने, हार्मोन संतुलन बनाए रखने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है. इसके फूल, पत्ते और छाल कई स्वास्थ्य समस्याओं में राहत देने वाले प्राकृतिक उपाय के रूप में काम आते हैं.
पहाड़ से लेकर देहरादून तक इसके गुलाबी फूलों की सब्जी और अचार तैयार किया जाता है. ये फूल दिखने में जितने सुंदर होते हैं, स्वाद में भी उतने ही खास होते हैं और लोग इन्हें बड़े चाव से खाते हैं. सेहत के लिहाज से भी ये काफी फायदेमंद माने जाते हैं.

ग्वीराल कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है. इसके इस्तेमाल से गांठ, सूजन और लीवर की परेशानी में राहत मिलती है. देहरादून की आयुर्वेदिक चिकित्सक शालिनी जुगरान के अनुसार, कचनार का उपयोग आयुर्वेद में लंबे समय से लीवर, सूजन और गांठ जैसी समस्याओं के इलाज में किया जाता रहा है.

ग्वीराल खून को साफ करने में भी मददगार माना जाता है. इसके छाल या फूल के काढ़े को ठंडा करके शहद के साथ दिन में दो बार लेने से खून साफ होता है. इसके अलावा यह शरीर में हार्मोन्स को संतुलित रखने में भी सहायक होता है.
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फोड़े-फुंसी और मुंहासों के लिए भी यह फायदेमंद माना जाता है. जिन लोगों को घाव हो जाते हैं, उन पर इसके पत्तों का लेप लगाने से राहत मिलती है.

डॉ. शालिनी जुगरान के अनुसार, इसके फूल और पत्ते एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होते हैं, जो शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं. इसकी खास बात यह है कि अगर शरीर में कहीं गांठ बनती है तो इसके पत्तों का साग नियमित रूप से लेने से लाभ मिल सकता है, लेकिन इसका उपयोग करने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है.

डॉ. जुगरान ने बताया कि ग्वीराल के सूखे तने को जलाकर उसकी राख को दंत मंजन के रूप में उपयोग करने से दांत दर्द में राहत मिलती है. इसके अलावा, इसकी छाल और फूल का काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से भी दांतों की समस्या में आराम मिलता है.

जो लोग अक्सर मुंह के छालों से परेशान रहते हैं, उनके लिए इससे कुल्ला करना लाभकारी होता है. अगर खांसी परेशान कर रही है, तो लाल ग्वीराल के फूल का काढ़ा बनाकर करीब 20 मिली मात्रा का सेवन करने से खांसी में राहत मिलती है.





