आगरा घूमने का है प्लान? तो अपनी ट्रिप को बनाएं खास, ताजमहल के साथ इन जगहों की भी करें सैर


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Agra Best Historical Picnic Spots: अगर आप आगरा घूमने का प्लान बना रहे है और सिर्फ ताजमहल तक ही सीमित रहना चाहते है तो आपकी यात्रा अधूरी रह सकती है. मुगलकालीन इतिहास और शानदार वास्तुकला से भरा यह शहर कई ऐसी खूबसूरत इमारतों और बागों का घर है, जो आपकी ट्रिप को और भी यादगार बना देते है. चीनी का रोजा से लेकर मेहताब बाग, मरियम का मकबरा, अकबर का मकबरा और एत्मादुद्दौला मकबरा जैसी ऐतिहासिक धरोहरें पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है. इन इमारतों की खूबसूरती, इतिहास और वास्तुकला आपकी यात्रा को दोगुना मजेदार बना सकती है.

आगरा में ताजमहल के अलावा मुगलकालीन इमारते भी आपकी ट्रिप को मजेदार बना सकती है. ऐसी ही पहली ईमारत है जिसे चीनी का रोजा कहा जाता है. यह ईमारत आगरा में यमूना किनारे स्थित है. इसे सन 1635 से 1639 के बीच बादशाह शाहजहां के वजीर और फारसी कवि अल्लामा अफजल खान मुल्ला का एक अनूठा मकबरा है. यह भारत में फारसी वास्तुकला का एक दुर्लभ उदाहरण है, जो अपनी नीली-हरी रंगीन चीनी मिट्टी’ की टाइलों (Glazed iles) के कारण प्रसिद्ध है.

घूमने का स्थान

आगरा में घूमने के लिए प्राकृतिक बगीचे भी है. ऐसा ही एक बगीचा है जिसे मेहताब बाग कहा जाता है. यहां से ताजमहल की खूबसूरती को आसानी से देखा जा सकता है. आगरा का यह मेहताब बाग जिसे चांदनी बाग भी कहते है. यह यमुना के किनारे, ताजमहल के ठीक सामने स्थित 16वीं शताब्दी का एक मुगल उद्यान है. बाबर द्वारा निर्मित 11 उद्यानों की श्रंखला में अंतिम, शाहजहां ने इसे ‘चांदनी रात’ में ताजमहल को निहारने के लिए विकसित किया था. यह बाग अपनी चारबाग शैली, फव्वारों और ताजमहल के शानदार दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है.

इमारत

आगरा के सिकंदरा स्थित मरियम का मकबरा मौजूद है. इस मकबरे को मरियम- उज-जमानी का मकबरा भी कहते है. यह बादशाह अकबर की बेगम और जहांगीर की मां मरियम जमानी (जोधा बाई)का मकबरा है. इतिहासकार बताते है कि जहांगीर ने सन 1623-1627 के बीच अपनी मां की याद में इस लाल बलुआ पत्थर की संरचना को सन 1495 में बनी एक पुरानी बारादरी का पुननिर्माण करके बनवाया था, जो अपनी अनोखी मुगल-राजपूत स्थापत्य शैली के लिए जानी जाती है.

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इमारत

अकबर का मकबरा आगरा के सिकंदरा में स्थित एक भव्य मुगल स्मारक है. बताया जाता है जिसे स्वयं अकबर ने शुरू किया था. बाद में उनकी मौत के बाद अकबर के बेटे जहांगीर ने सन 1613 में इसे पूरा करवाया था. यह लाल बलूआ पत्थर और सफेद संगमरमर से निर्मित पांच मंजिला पिरामिडनुमा इमारत है, जो 119 एकड में फैले सुंदर बगीचे के बीच स्थित है.

इमारत

आगरा में ताजमहल जैसा दिखने वाला यह ईमारत बेहद अद्धभुत है, इसे बेबी ताज भी कहा जाता है. हम बात कर रहे है एत्मादुद्दौला मकबरे की. यह आगरा में यमुना किनारे स्थित एक बेहद खृबसूरत मूगलकालीन स्मारक है, जिसे मूगल महारानी नूरजहां ने सन 1622-1628 के बीच अपने पिता मिर्जा गियास बेग की याद में बनवाया था. यह मुग़ल धरोहर सफेद संगमरमर से बनी भारत की पहली ऐसी मुगलकालीन इमारत है. जिसमें बडे पैमाने पर पिएत्रा ड्यूरा यानि की बेहद कीमती पत्थरों की पच्चीकारी का इस्तेमाल हुआ था. जिसके कारण इसे बेबी ताज़ तक कहा जाता है.

ईमारत

आगरा में ताजमहल और किला देखने के बाद देशी विदेशी पर्यटक फतेहपुर सिकरी घूमने भी जाता है. यहां विश्व का सबसे बड़ा दरवाजा यानि की बुलंद दरवाजा स्थित है जिसकी सुंदरता और आकृति लोगों को खूब लुबती है. यह ईमारत फतेहपुर सिकरी जो सन 1571 से वर्ष 1585 के बीच मुग़ल सम्राट अकबर की राजधानी थी. यह मुग़ल इमारत लाल बलुआ पत्थरों से निर्मित एक वास्तुकला का एक अद्भत उदाहरण है. यह ईमारत सूफी संत शेख सलीम चिश्ती के सम्मान से भी फेमस है. यह शहर हिंदू और फारसी शैलियों के मिश्रण से बना है. पानी की कमी के कारण त्यागे जाने के बावजूद, यह अपनी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है. वर्तमान में इस ईमारत को देखने के लिए देश दुनिया से पर्यटक आते है.



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