अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म परिवर्तन के बाद व्यक्ति की सामाजिक और धार्मिक पहचान बदल जाती है, जिसका सीधा प्रभाव उसकी कानूनी स्थिति पर पड़ता है। इसी आधार पर न्यायालय ने कहा कि अनुसूचित जाति से जुड़े विशेष अधिकार और संरक्षण, जैसे अत्याचार निवारण कानून के तहत मिलने वाले लाभ, धर्म परिवर्तन के बाद स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
इस निर्णय को उन मामलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनमें धर्म परिवर्तन के बाद भी अनुसूचित जाति के अधिकारों का दावा किया जाता रहा है। इस फैसले से अब इस विषय पर कानूनी स्थिति और अधिक स्पष्ट हो गई है और भविष्य के मामलों में इससे मार्गदर्शन मिलेगा।





