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पाकिस्तान ने पीओके के लोगों को हमेशा से सिर्फ धोखा ही दिया है. वहां न तो कोई डेवलपमेंट है और न ही आम लोगों के पास कोई अधिकार है. यही कारण है कि वहां के लोग अब भारत की तरफ बहुत उम्मीद से देख रहे हैं. मुख्य इमाम उमर अहमद इलयासी का यह बयान इसी जमीनी हकीकत को पूरी तरह सामने लाता है.
इमाम उमर अहमद ने कहा कि पीओके के लोग भारत में शामिल होना चाहते हैं. (पीटीआई)
श्रीनगर. ऑल इंडिया मुस्लिम ऑर्गनाइजेशन के मुख्य इमाम उमर अहमद इलयासी ने शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को ‘बहुत जल्द’ भारत में मिला लिया जाएगा. इलयासी ने पत्रकारों से कहा, “मैं यहां कश्मीर में खड़े होकर अपने पड़ोसी देश से कहना चाहता हूं कि भारत का अभिन्न अंग पीओके निश्चित रूप से भारत में मिला लिया जाएगा क्योंकि पीओके के लोग वहां जनमत संग्रह चाहते हैं.”
उन्होंने जम्मू-कश्मीर में हुए विकास और समृद्धि का जिक्र करते हुए दावा किया कि पीओके के निवासी भारत के साथ विलय के लिए बेताब हैं. इलयासी ने कहा, “अल्लाह ने चाहा तो घर वापसी की उनकी इच्छा पूरी होगी. वहां ऐसे लोग हैं, जो ऐसा चाहते हैं. वे कश्मीर का विकास देखकर खुश हैं. यह देखते हुए कि कश्मीर आज किस तरह तरक्की कर रहा है, पीओके बहुत जल्द भारत में मिल जाएगा.”
पीओके में गहराया मानवीय संकट
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में आवश्यक सेवाओं की कमी के कारण मानवीय संकट गहराता जा रहा है. एक रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई, बेरोजगारी, खाद्य असुरक्षा और बिजली संकट जैसी समस्याएं राजनीतिक उपेक्षा और सुरक्षा-आधारित प्रशासन के साथ मिलकर हालात को और गंभीर बना रही हैं. यूके स्थित अखबार ‘एशियन लाइट’ की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों में महिलाओं और छात्रों की बढ़ती भागीदारी वाले विरोध प्रदर्शन समाज में गहरे असंतोष का संकेत हैं, जो लंबे समय से चली आ रही संरचनात्मक उपेक्षा से जुड़ा है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि बिजली की भारी कमी और बढ़े हुए बिल यहां के लोगों के लिए सालभर की समस्या बन गए हैं. विडंबना यह है कि बड़े जलविद्युत परियोजनाओं के बावजूद स्थानीय लोगों को लंबी कटौती झेलनी पड़ती है और उनसे वाणिज्यिक दरों पर शुल्क वसूला जाता है. पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में हालात इतने बिगड़ गए कि विरोध प्रदर्शन क्षेत्रव्यापी बंद में बदल गए. प्रदर्शनकारियों ने महंगे बिजली बिल, बकाया वेतन और नागरिक अधिकारों में कटौती का हवाला देते हुए बिल भरने से इनकार कर दिया. इसके जवाब में प्रशासन ने कई बार गिरफ्तारियां, संचार बंदी और बल प्रयोग का सहारा लिया.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें





