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If a teacher beats a child, he will be sentenced to 10 years in prison. | कहीं पैंट में बिच्‍छू डाला, कहीं मरने तक उठक-बैठक कराए: टीचर पीटे तो 10 साल तक सजा का कानून; साइकोलॉजिस्ट ने कहा-टीचर्स का साइकोमैट्रिक टेस्ट हो

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9 मिनट पहलेलेखक: उत्कर्षा गीतकार

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उत्तर प्रदेश के एक स्कूल में बच्चों के साथ बर्बरता का मामला सामने आया है। प्रकरण के आरोप मनिहारन क्षेत्र के चुनाहेटी गांव के प्राथमिक विद्यालय का है।

आरोप है कि 7वीं कक्षा के बच्चे के बाद मूडी फुटबॉल खेल रहे थे। खेल-खेल में बच्चों की फुटबॉल एक टीचर के बेटे को लगी। इससे नाराज होकर नाराज हो गए और बाल क्रांतिकारी वाले सातवीं के बच्चे को पीट दिया गया।

परिवार का आरोप है कि टीचर ने बच्चे का गला भी दबा दिया, चाकू मार दिया और खींच लिया, जिससे बच्चा बेहोश हो गया और बदहवास घर पहुंच गया। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया गया।

हाल ही में स्मारकों में साज-सज्जा के कुछ और मामले भी सामने आए हैं

केस 1- महाराष्ट्र के पालघर जिले के एक निजी स्कूल में कक्षा 6 के शिलान्यास खंडिका की 15 नवंबर को मृत्यु हो गई। ‍पिछला पिछला एक सगुप्ताह से अस्पताल में था। असल में, एक सगुप्ताह से पहले उसे 10 मिनट देर से यात्रा पर डॉक्युमेंटल में सीटअप यानी उठक-बैठक लगाने की सजा दी गई थी। इलेक्ट्रानिक की मां का कहना है कि उनकी बाद में उनकी बेटी भी नहीं पा रही थी। ऑक्सिजन की मौत के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

केस 2- हिमाचल प्रदेश के 3 टीचर्स ने मिलकर बनाया एक सरकारी प्रमाण-कूल के सेट इतना ही नहीं, उसकी पैंट में बिच्छू तक डाल दिया। पीटने वाले टीचर्स में डॉक्युमेंट्री कूल का हेडमाटर भी शामिल है।

छात्र दलित समुदाय से है और राज्य के रोहरू सब डिवीज़न के छात्र दलित समुदाय से है। दोस्ते के पिता ने कहा कि हेडमा लगभग 1 साल से स्टूडियो के साथ-साथ टीचर बाबूराम और कृतिका ठाकुर के साथ 1 साल के दोस्ते के साथ दोस्ती कर रहे थे। शिकायत के मुताबिक, कॉन्स्टेंट कॉन्स्टेबल से बैस्टले के कान से खून निकाला गया और कान के पत्थर में भी चोट लग गई।

केस 3- टोस्ट के शिक्षा विभाग ने रोरू सब-डिवीजन में सरकारी टीचरों को अलग कर दिया है। असल में, कुछ ही दिन पहले डेंटल टीचर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था जिसमें वो एक स्टूडियो को डांटने वाली थी, बट से पीटी नजर आ रही थी।

ट्रेनर का नाम रीना कोटा है और वो रोहरू ब्लॉक के गवाना प्राइमरी स्कूल में हेड टीचर के तौर पर स्थापित है। टीचर ने सबसे पहले स्टूडेंट की शर्ट उतारी और उसे कैंट वाली छड़ी से पीटने लगी। इसका एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें स्टोर रोता हुआ नजर आ रहा है।

केस 4- हरियाणा के एक स्कूल टीचर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में टीचर बच्चों के साथ दोस्त और बुरा व्यवहार देखती आ रही है। कथित वीडियो ड्रामा के क्रिएटिव पब्लिक स्कूल का है। वीडियो की शुरुआत में बेबी मैट पर हुआ है। एक ही बार में टीचर्स ने उसे अपने पास बुला लिया और लक्जरी चलन शुरू कर दिया। वीडियो में आगे टीचर बच्चे का कान खींचता है और लगातार घटिया जड़ रही है। एक अन्य वीडियो में सज़ा के तौर पर एक बच्चे को टीचर की खिड़की से नीचे लटका दिया गया।

तीन नियम-कानूनों के बाद भी बच्चों के साथ यूपी के मामलों में कमी नहीं आई है। इसके पीछे एक बड़ा कारण यह है कि जांच का सही तरीके से पालन किया जा रहा है या नहीं, यह सुनिश्चित करने के लिए कोई नहीं है। इसके अलावा अपने बच्चों के साथ हमारे समाज के खिलाफ एक चीज बनाई गई है, इसलिए इसके लोगों में गुस्सा भी नहीं देखा जाता है।

प्यार से चित्रों के पक्ष में

दिल्ली पेरेंट्स असोसिएशन के अपराजिता गौतम कहते हैं, ‘कॉर्पोरल पनिशमेंट पूरी तरह से घरों और घरों से खत्म नहीं हुआ है। लेकिन आज बहुत से माता-पिता इसे लेकर सेंस असामान्य हो गए हैं। वो नहीं चाहतीं कि उनकी तरह बचपन में स्कूल में शादी हुई थी, उनके बच्चों के साथ भी ऐसा ही हो। ऐसे माता-पिता चाहते हैं कि बच्चों को मारना-पीटना के छोटे बच्चों को प्यार से चोदना चाहिए।’ इसके अलावा अपराजिता का दावा है कि आज एक क्लास में कई 50-60 बच्चे भी बोले जाते हैं। ऐसे में टीचर्स के लिए उन्हें हैंडल करना मुश्किल हो जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वो बच्चों के साथ रहें।

शैतानी करने पर या बच्चों को निर्देशित शिक्षा के लिए उन्हें समझाना चाहिए। उन्हें काउंसलर के पास भेजा जा सकता है। अपराजिता कहती हैं, ‘आजकल बच्चों को बस यही चाहिए कि कोई उनकी बात सुन ले, उनका पक्ष समझ ले।’

पेरेंट्स को लेकर उन्होंने कहा, ‘पेरेंट्स और टीचर्स दोनों को सेंसेटाइज करने की जरूरत है। अब मोर्मोन बादल ने भुगतान किया है। ‘बच्चों की समस्या का समाधान नहीं है।’

‘टीचर्स की साइको-मैट्रिक परीक्षण हो’

स्कूल में टीचर्स को बच्चों के साथ सपोर्ट करने के लिए साइकोलॉजिकल एडिटिव एडास्टिक्स के सुझाव दिए जाते हैं, ‘आजकल स्कूल में टीचर्स को एप्टीट्यूड टेस्ट के आधार पर भर्ती किया जाता है। यानी उनका सब्जेक्ट नॉलेज़ चेक किया जाता है। किसी भी शिक्षक गणित में कितना अच्छा है, अंग्रेजी में कितना अच्छा है या हिंदी विषय का ज्ञान कितना है, केवल यही देखा जाता है। किसी भी स्कूल के टीचर्स को रिक्रूट करते समय इस बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए कि टीचर्स का बच्चों के साथ व्यवहार कैसा है, उनका व्यवहार कैसा है। ‘बच्चों के साथ जुड़ा कर पाता है या नहीं।’

विशेषज्ञ का कहना है कि टीचर्स की भर्ती के लिए एप्टीट्यूड के साथ-साथ साइको-मैट्रिक और पर्सनैलिटी परीक्षण भी करना चाहिए। उनका कहना है कि अभी जो टीचर्स स्कूल में पढ़ते हैं, वे अपने बच्चों के साथ मिलकर किस तरह की ट्रेनिंग लेते हैं, कोई नहीं जानता।

स्कूल में बच्चों को मारना-पीटना, उनका साथ देना या उनके गलत तरीकों से बात करना बच्चे को जिंदगी भर के लिए नुकसान पहुंचाता है। उनके कमाए हो सकते हैं। कई बार इससे बच्चों का परिचय हो जाता है। इसके अलावा वो गुसल और हिंसक भी हो सकते हैं। आप बच्चों को मारेंगे तो उन्हें बेकार यही समाधान है। वो भी अपने से कम उम्र के बच्चों को आगे बढ़ाएंगे।

अगर बच्चों को कोई बात समझ में आती है या निर्देश दिए जाते हैं, तो इसके बारे में प्यार से अपनी बात कहें। इसके अलावा अगर आप चाहते हैं कि बच्चा कोई नियम अपनाए तो सबसे पहले पेरेंट्स और टीचर्स को वह नियम अपने ऊपर लागू करना होगा।

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