एएन-32 विमान से पैराशूट की मदद से 720 किलो वजन के भीष्म को अस्पताल पहुंचाया गया।
आगरा में एयरफोर्स ने 1500 फीट की दूरी पर हॉस्पिटल हॉस्पिटल बनाया। डेल के बाद हॉस्पिटल का हॉस्पिटल पूरी तरह से खड़ा हो गया। इलाज के लिए 8 मिनट में तैयारी भी हो गई।
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यह एक तरह का अस्पताल है। इसका नाम भीष्म रखा गया है। स्टूडियो ने फर्स्ट टाइम हॉस्पिटल को ग्राउंड पर सैंपल का सफल परीक्षण किया।
अब इस अस्पताल को किसी भी दुर्गम स्थान पर विक्रय किया जा सकता है। हॉस्पिटल का वजन 720 किलो है। व्यावसायिक है। अणु ऊर्जा और बैटरी सेवा है। इसमें ऑपरेशन थिएटर, थिएटर वार्ड सहित सभी को जरूरी सुविधा है। इसे ADRDI आगरा ने डिजाइन किया है।
दो तस्वीरें देखें…

यह तस्वीर आगरा के मालपुरा ड्रैपिंग जोन की है। हवाई अड्डे से पैराशूट की मदद से भीष्म स्कॉटलैंड अस्पताल को जमीन पर उतारा गया।

1500 फ़ुट से नीचे उतरने के बाद भी अस्पताल पूरी तरह से सुरक्षित है।
अध्ययन के अनुसार, मंगलवार को लेकलैंड अस्पताल भीष्म को पैक किया गया। एक लावारिस में 2 पैराशूट बांधे गए। दूसरे में आयरन के मंच से पोर्टेबल अस्पताल को बांध दिया।
फिर विमान AN-32 स्कॉटलैंड अस्पताल मालपुरा ड्रॉपिंग जोन में ले जाएगा। विमान 1500 फ़ुट की दूरी पर। वहीं से हॉस्पिटल को नीचे गिरा दिया गया। डेल के बाद अस्पताल की जांच की गई, तो पूरी तरह से सुरक्षित था।

हॉस्पिटल में ऑपरेशन थिएटर और जरूरी दवा भी चाहिए।
36 बॉक्स से तैयार होगा अस्पताल
हॉस्पिटल में आयरन के तीन फ्रेम में 36 बॉक्स हैं। थ्री फ्रेम के बीच छोटा ढांचा है। दो परीक्षक हैं। आवश्यक दवाएं और खाद्य सामग्री भी हैं। हॉस्पिटल में मास्टर क्यूब केज के 2 सेट हैं। हर केस में 36 मिनी क्यूब होते हैं। ये क्यूब मजबूत हैं। साथ ही वयन्त्र भी।
इसे हॉस्पिटल में कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है। भूमिगत रेल से उतरने के बाद भी बुरा नहीं होगा। इसकी ऐसी होती है जमीन पर उतरने के बाद कोई दिक्कत नहीं आई।

पैराशूट की मदद से 720 किलो वजनी कोलंबिया अस्पताल के क्यूब्स को जमीन पर उतारा गया।

प्राण-प्रतिष्ठा में अस्पताल ने बचाई थी बुजुर्ग की जान
22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भीष्म परियोजना की इकाई का शिलान्यास किया गया था। दार्शनिकों की टीम की भी स्थापना की गई थी। इसी हॉस्पिटल से एक शख्स की जान भी बचाई गई थी। तभी ऐसा हुआ कि प्राण प्रतिष्ठा के वक्ता एक बुजुर्ग की अचानक ही अविस्मरणीय हो गई।
वो गिर पड़े। फिर सिद्धांत हो गया। वहां मौजूद एयरफोर्स के सोलो ने उन्हें तुरंत उठा लिया। 1 मिनट के अंदर उनके परिसर से बाहर तक। फिर परिसर में ही बने भीष्म क्यूब हॉस्पिटल में इलाज। जिस व्यक्ति की जान बच गई थी।
पीएम मोदी के नेतृत्व में शुरू हुआ भीष्म प्रोजेक्ट
पीएम मोदी के नेतृत्व में भीष्म परियोजना शुरू हुई थी। परियोजना का उद्देश्य आपदा और युद्ध वाले क्षेत्रों में गंभीर लोगों को शीघ्र उपचार उपलब्ध कराना है।
