गोरखपुर: गर्मियों का मौसम आते ही शरीर को ठंडा और तरोताजा रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है. तेज धूप, लू और बढ़ते तापमान के बीच अगर खानपान सही न हो, तो कई तरह की दिक्कतें शुरू हो जाती हैं. ऐसे में पुराने समय से इस्तेमाल होने वाले देसी उपाय आज भी उतने ही कारगर हैं. खासकर मुरब्बे का चलन, जो अब धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, लेकिन इसके फायदे आज भी बरकरार हैं. बेल और गुलकंद का मुरब्बा गर्मियों में शरीर के लिए किसी प्राकृतिक दवा से कम नहीं माना जाता है.
गोरखपुर के घंटाघर इलाके में पिछले 60-70 सालों से मुरब्बा बनाने का काम कर रहे प्राणनाथ और उनका परिवार बताते हैं कि पहले के समय में हर घर में मुरब्बा बनता था और इसे रोजाना खाने की आदत होती थी. उनका कहना है कि बेल का मुरब्बा खासतौर पर पेट के लिए बेहद फायदेमंद होता है. यह शरीर को अंदर से ठंडा रखता है और पाचन तंत्र को मजबूत करता है. वहीं गुलकंद की बात करें तो यह न सिर्फ ठंडक देता है, बल्कि एसिडिटी और गर्मी से होने वाली परेशानियों को भी कम करता है.
इस खास तरीके से होता है तैयार
प्राणनाथ बताते हैं कि बेल का मुरब्बा तैयार करने के लिए पके हुए बेल का गूदा निकालकर उसे उबालकर और फिर चीनी या गुड़ के साथ पकाया जाता है, जिससे यह लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और इसका स्वाद भी बढ़ जाता है. वहीं गुलकंद बनाने की प्रक्रिया थोड़ी अलग और समय लेने वाली होती है.
गर्मियों के लिए जबरदस्त फायदा
इसमें गुलाब की ताजी पंखुड़ियों को चीनी या मिश्री के साथ कांच के जार में भरकर दो दिन तक धूप में रखा जाता है. इस दौरान यह धीरे-धीरे पककर मुरब्बे का रूप ले लेता है, जिसमें इलायची जैसी चीजें मिलाकर स्वाद और खुशबू को और बेहतर किया जाता है.
गर्मी के मौसम में इन मुरब्बों के साथ कुछ और देसी चीजें भी शामिल की जा सकती हैं, जैसे सौंफ, मिश्री, खस का शरबत और आंवला मुरब्बा. ये सभी चीजें शरीर को ठंडा रखने के साथ-साथ ऊर्जा भी प्रदान करती हैं. खासकर लू से बचाव के लिए ये उपाय बेहद कारगर माने जाते हैं.
कब्ज, एसिडिटी और पेट के लिए फायदा
अगर नियमित रूप से बेल और गुलकंद का सेवन किया जाए, तो यह न सिर्फ शरीर को ठंडा रखता है बल्कि कब्ज, एसिडिटी और पेट से जुड़ी कई समस्याओं से भी राहत दिलाता है. साथ ही यह इम्यूनिटी को भी मजबूत करता है, जिससे शरीर गर्मी के दुष्प्रभावों से बचा रहता है.
आज के समय में जहां लोग पैकेज्ड और केमिकल युक्त चीजों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं ये पारंपरिक मुरब्बे एक हेल्दी और नेचुरल विकल्प के रूप में सामने आते हैं. जरूरत है तो बस पुराने तरीकों को फिर से अपनाने की, ताकि स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी पूरा ख्याल रखा जा सके.





