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Holy Shivlingam at Amarnath Cave fully formed Yatra to commence on 29 June | बाबा अमरनाथ पूर्ण स्वरूप में नजर आए: सामने आई पहली तस्वीर; 29 जून से शुरू होगी अमरनाथ यात्रा

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श्री1 मिनट पहले

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इस बार अमरनाथ यात्रा 52 दिन की होगी। 29 जून से शुरू होगी यात्रा 19 अगस्त तक चलेगी।  - दैनिक भास्कर

इस बार अमरनाथ यात्रा 52 दिन की होगी। 29 जून से शुरू होगी यात्रा 19 अगस्त तक चलेगी।

अमरनाथ यात्रा 29 जून से शुरू होने जा रही है। इससे पहले सोमवार (3 जून) को बाबा अमरनाथ अपने पूर्ण स्वरूप में दर्शन देंगे। बाबा अमरनाथ के शिवलिंग का बर्फ से पूरा आकार बन गया है। इसकी तस्वीरें सामने आई हैं।

इस बार अमरनाथ यात्रा 52 दिन की होगी। 29 जून से शुरू होगी यात्रा 19 अगस्त तक चलेगी। पिछली बार 1 जुलाई से 60 दिन तक चली थी। पहली बार दोनों रूट पूरी तरह 5जी फाइबर नेटवर्क से लैस होंगे। 24 घंटे बिजली के लिए ज्यादातर खंभे लगे हुए हैं।

100 ऑक्सीजन बूथ, जहां रु. सांस ले सकें
श्राइन बोर्ड पहली बार मेडिकल लाइन भी बढ़ा रहा है। बालटाल और चंदनबाड़ी में 100-100 आईसीयू बेड, एडवांस उपकरण, एक्स-रे, अल्ट्रासोनोग्राफी मशीन, क्रिटिकल केयर एक्सपोर्ट्स, कार्डियक मॉनिटर, फाइल ऑक्सीजन प्लांट से लैस दो कैंप अस्पताल रहेंगे। यहां हवा में ऑक्सीजन कम रहती है, इसलिए यात्रा मार्ग पर 100 स्थाई ऑक्सीजन बूथ और मोबाइल ऑक्सीजन बूथ रहेंगे। पवित्र गुफा, शेषनाग और पंचतरणी में तीन छोटे अस्पताल होंगे।

बालटाल से गुफा तक का 14 किमी रूट हुआ
बॉर्डर रोड संगठन के अनुसार, बालटाल से गुफा का रूट 14 किमी से 12 फीट तक बढ़ा दिया गया है। यह मोटरेबल रोड है। हालांकि अभी सिर्फ बीआरओ सेना की उड़ानों को ही अनुमति है। अम्बेड में इसी का उपयोग होगा।

पिछली बार दोनों रूट पर करीब 60 हजार जवान तैनात थे। इस बार कांग्रेस चुनाव में जम्मू-कश्मीर में तैनात होने वाली अर्धसैनिक बलों की सभी 635 कंपनियों को मतदान के बाद यात्रा में तैनात किया जाएगा।

पहलगाम रूट: इस जड़ से गुफा तक पहुंचने में 3 दिन लगते हैं, लेकिन यह रास्ता आसान है। यात्रा में घाट नहीं है। पहलागाम से पहला पड़ाव चंदनवाड़ी है। ये बेस कैम्प से 16 किमी दूर है। यहां से पलायन शुरू होती है।

तीन किमी चलने के बाद यात्रा पिस्सू टॉप पर पहुंचती है। यहां से पैदल चलते हुए शाम तक यात्रा शेषनाग पहुंचती है। ये सफर करीब 9 किमी का है। अगले दिन शेषनाग से यात्री पंचतरणी जाते हैं। ये शेषनाग से करीब 14 किमी दूर है। पंचतरणी से गुफा सिर्फ 6 किमी रह जाती है।

बालटाल जड़: अगर वक्त कम हो, तो बाबा बर्फानी के दर्शनों के लिए बालटाल जड़ सबसे मुफीद है। इसमें सिर्फ 14 किमी की चढ़ाई होती है, लेकिन पूरी तरह से खड़ी रहती है। इसलिए आत्माओं को यह मार्ग पर प्रबल होता है। इस रूट पर मार्ग संरक्षे और मोड़ खतरनाक होते हैं।

6 लाख पीड़ितों के लिए मिस यूनिवर्स
कश्मीर के डिवीजनल कमिश्नर विजय कुमार बिधूड़ी ने दो महीने पहले बताया था कि इस बार हमारा फोकस यात्री सुविधा बढ़ाने पर है। संपूर्ण जड़ पर लेख, जागरूकता और स्वास्थ्य जांच की ज्यादा से ज्यादा व्यवस्था की योजना बना रहे हैं। पहले पहलगाम से गुफा तक 46 किमी लंबा मार्ग 3 से 4 फीट तो बालटाल वाला मार्ग 2 फीट ही ऊंचा था। अब इसे 14 फीट तक बढ़ाया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले एक महीने से काफी खुशहाली हुई है। बर्फ हटाने के बाद जड़ दुरुस्त किया जाएगा। पिछले बार 4.50 लाख बर्ड आए थे। इस बार आंकड़ा 6 लाख तक जा सकता है। यात्रा कम दिनों की है और भीड़ ज्यादा रहती है, इसलिए घंटों भी ज्यादा किये जा रहे हैं।



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