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Iran War: ईरान युद्ध ने दुनियाभर में उथल-पुथल मचा रखी है. होर्मुज स्ट्रेट के बाधित होने से ग्लोबल लेवल पर एनर्जी क्राइसिस की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है. कई देशों में पेट्रोल-डीजल और गैस की भारी किल्लत के चलते हालात गंभीर हो चुके हैं. फिलिपींस में तो नेशनल इमर्जेंसी घोषित कर दी गई है. इन सबके बीच पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका का मखौल उड़ाया है.
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने ईरान जंग पर अमेरिका के बदलती चाल पर गंभीर सवाल उठाए हैं. (फाइल फोटो/Reuters)
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका और इजरायल की रणनीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान के उद्देश्यों में बदलाव दिख रहा है और अब इसका केंद्र बिंदु होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना बन गया है. ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि युद्ध से पहले यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग खुला हुआ था, लेकिन अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के बाद ईरान ने इसे बंद कर दिया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब युद्ध का लक्ष्य उसी जलडमरूमध्य को खोलना प्रतीत होता है. बता दें कि Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है. इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है और तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिला है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्ग में किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है.
क्या है पाकिस्तान की तमन्ना?
बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने खुद को एक संभावित मध्यस्थ के रूप में पेश किया है. इस्लामाबाद ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की पेशकश की है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यदि दोनों पक्ष सहमत हों, तो वह युद्धविराम वार्ता की मेजबानी करने को तैयार है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए हर संभव प्रयास करेगा. दूसरी ओर, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ सैन्य कार्रवाई भी जारी रखेगा. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत जारी है और इसे सकारात्मक बताया. हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर तेहरान अमेरिकी शर्तों को स्वीकार नहीं करता, तो प्रतिक्रिया और तेज की जा सकती है.
ईरान का इंकार
ईरान ने संकेत दिया है कि वह अप्रत्यक्ष रूप से मिले प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है, लेकिन उसने अमेरिका के साथ सीधे वार्ता से इनकार कर दिया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान बातचीत नहीं माना जा सकता और फिलहाल औपचारिक वार्ता की कोई योजना नहीं है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब संघर्ष चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और क्षेत्र में अस्थिरता लगातार बढ़ रही है. एक ओर सैन्य गतिविधियां तेज हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं. ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा इस पूरे संकट का केंद्र बनता जा रहा है, जिसका असर केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महसूस किया जा रहा है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें





