राजकोट53 मिनट पहले
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गुजरात में राजकोट शहर के कालावड रोड स्थित टीआरपी गेम जोन में शनिवार शाम 4.30 बजे आग लग गई।
गुजरात के राजकोट अग्निकांड हादसे में गेम जोन के एक मालिक प्रकाश हिरण की भी मौत हो गई है। इस बात का खुलासा मंगलवार को डीएनए जांच से हुआ है। अहमदाबाद में रहने वाली जैन की माता विमला देवी के डीएनए सैंपल से एक शव का डीएनए मिला है। मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले प्रकाश पिछले 4-5 साल से राजकोट में रह रहे थे और उन्होंने 5 करोड़ के निवेश से बने गेम जोन में 3 करोड़ रुपए लगाए थे। यानी उनकी 60% की उपस्थिति थी।
उधर, घटना में शामिल 6 आरोपियों में से एक आरोपी धवल ठक्कर को गुजरात पुलिस ने राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया है। दुर्घटना के बाद वह राजकोट से घायल हो गया था और आबू रोड में छिपा था। ठक्कर से पहले 3 आरोपियों युवराज सिंह सोलंकी, नितिन जैन और राहुल राठौर को गिरफ्तार किया जा चुका है।
राजकोट में शनिवार शाम 4.30 बजे टीआरपी गेम जोन में आग लगने से 12 बच्चों समेत 30 लोगों की मौत हो गई थी।

आग जलाने में 4 घंटे लगे थे। टायर की वजह से आग ज्यादा भड़की थी।
ग्राफ़िक्स कोर्ट में बोला-एक्शन होता रहता है
कोर्ट ने 4 आरोपियों को 14 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि वे जांच में सहयोग नहीं कर रहे। वंडरफुल इंसान पर कह रहे हैं कि सभी दस्तावेज आग में जल गए। अग्निकांड के एक आदर्श युवराज सिंह सोलंकी ने पहले तो कोर्ट में ये कोशिश की कि उन्हें इस हादसे पर बहुत दुख हुआ। विशेष सार्वजनिक प्रॉसिक्यूटर तुषार गोकणी ने बताया कि सब किसी को लग रहा था कि वह रो रहा है। लेकिन, 5 मिनट बाद ही वह हंसने लगा और बहस करने लगा। इतना ही नहीं, उसने यहां तक कहा कि कोर्ट रूम में इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं।

7 में से 3 आरोपियों (युवराज सिंह सोलंकी, राहुल राठौड़ और नितिन जैन) को 14 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया।
6 जून से इस केस की सुनवाई शुरू होगी

सीधे मैदान में गेम जोन का ड्रोन दृश्य।
गुजरात उच्च न्यायालय ने 26 मई 2024 को राजकोट टीआरपी गेम जोन हादसे पर कार्रवाई लेकर सुनवाई शुरू की थी। ‘उल्लेखनीय है कि रविवार को भी सुनवाई हुई। विशेष जज बीरेन वैष्णव और देवेन देसाई की बेंच बैठी थी। यह बात सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ब्रिजेश त्रिवेदी और एडवोकेट अमित पांचाल ने कही। उच्च न्यायालय ने अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट में गेम जोन के नियमों पर सुनवाई करने का आदेश दिया था।
राजकोट पुलिस कमिश्नर ने कोर्ट को बताया कि टीआरपी गेम जोन को कोई लत नहीं दी गई थी। कोर्ट ने पुलिस और नगर निगम से 3 जून तक हल्फनामा देने को कहा है। 6 जून से इस केस की सुनवाई शुरू होगी।

यह वीडियो गेम जोन में लगे सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गया था।
राजकोट हादसे पर सुप्रीम कोर्ट बोला-ताके की अंधड़ बंद थीं
राजकोट टीआरपी गेम जोन हादसे की सुनवाई करते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने राजकोट महानगरपालिका प्रशासन को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा- 28 लोगों की मौत के बाद आपको अब पता चल रहा है कि शहर में दो गेमिंग जोन बिना परमिशन के चल रहे हैं। क्या आप अंधे हो गए हैं, या फिर सो रहे हैं?
राजकोट में गेमिंग सेंटर परिसर बनाया गया था और फायर सेफ्टी की एनओसी भी नहीं थी और यह सब पिछले चार सालों से चल रहा था। अब हमें नगर प्रशासन और गुजरात सरकार पर बिल्कुल भरोसा नहीं हो रहा है। कोर्ट ने कहा- यह ट्रेजडी आईने खोलने वाली है, सबसे दुखद बात यह है कि इसमें मासूम बच्चों की भी मौत हुई है।
7 में से 3 आरोपियों को 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया
इस मामले में पुलिस ने 7 लोगों को हिरासत में लिया है। इनके नाम धवल ठक्कर, अशोक सिंह जडेजा, किरीट सिंह जडेजा, प्रकाशचंद हिरण, राहुल राठौड़, युवराज सिंह सोलंकी और उनके मैनेजर नितिन जैन हैं।
इनमें से तीन युवराज, राहुल और नितिन जैन को सोमवार को कोर्ट में पेश किया गया। तुनके कोर्ट ने 14 दिनों की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। बाकी चार की तलाश जारी है। एक फ़ट में प्रकाशचंद हिरण गेम जोन के अंदर दिखाई दिया है। भाई का दावा है कि इस हादसे में प्रकाशचंद की मौत होने का खतरा है।
उधर, गुजरात सरकार ने सोमवार को घटना को लेकर सुर्खियों के आरोप में 6 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। इनमें राजकोट महानगरपालिका निगम (आरएमसी) के सीनियर प्लानर, सीनियर इंजीनियर, रोड्स एंड बिल्डिंग डिपार्टमेंट के दो डिप्टी इंजीनियर और दो थानों के पुलिस इंस्पेक्टर शामिल हैं।
इस बीच, सरकार ने राजकोट के पुलिस कमिश्नर मुरु भार्गव और नगर निगम कमिश्नर आनंद पटेल सहित अन्य दो पुलिस अधिकारियों विधि चौधरी और सुरेन्द्र जे देसाई का तबादला कर दिया है।
राजकोट गेम जोन बिना शीर्षक के चल रहा था

दैनिक भास्कर को मिली यह तस्वीर करीब दो साल पुरानी है। इसमें राजकोट के तत्कालीन कलेक्टर अरुण महेश बाबू, एसपी बलरामभाई पटेल, नगर निगम कमिश्नर अमित अरोड़ा, डीसीपी जोन-1 प्रवीणभाई पटेल गेमिंग जोन पहुंचे। तस्वीर में दिखाई दे रहे हैं ये सभी अधिकारी गेम जोन के गो-कार्टिंग के लुत्फ उठा रहे हैं। इस दौरान टीआरपी गेम जोन के स्वामी ने मृतकों का शानदार स्वागत किया।
राजकोट गेम जोन हादसे का VIDEO- वेल्डिंग से निकली चिंगारी 2 मिनट में भड़की
राजकोट के टीआरपी गेम जोन में 25 मई की शाम को हुए हादसे का एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। इस वीडियो में शाम 5.33 मिनट पर गेम जोन के एक हिस्से में वेल्यु का काम होता दिख रहा है। इसी से निकलने वाली चिंगारी थोड़ी देर में भड़क जाती है। जो वहां मौजूद कर्मचारियों को सुधारने की कोशिश करते हैं।
गेम जोन से आने-जाने का एक ही रास्ता था। महज 2 मिनट के अंदर आग भयानक रूप ले लेती है, जिसकी वजह पूरा गेम जोन उसके ट्रिगर में आ जाता है।
फायर ब्रिगेड की 8 टीमें करीब 3 घंटे की मशक्कत के बाद आग बुझा पाईं। 25 से ज्यादा लोगों का बचाव किया गया। इसी हादसे में 12 बच्चों समेत 28 लोग मारे गए।
पुलिस ने गेम जोन के मालिक युवराज सिंह सोलंकी, पार्टनर प्रकाश जैन, राहुल राठौड़ और मैनेजर नितिन जैन को हिरासत में ले लिया है। दुर्घटना के बाद चारों ओर फोन बंद कर दिया गया था।
देखिए गेमजोन में आग कैसे लगी…
1. वेल सेउड़ी चिंगारी…

2. चिंगारी से वहां पड़े सामान में आग लगी

3. आग तेजी से फैलती हुई

4. गेमजोन के कर्मचारियों ने इसे स्थापित करने की कोशिश की

आज आ सकती है हादसे में मारे गए लोगों की DNA रिपोर्ट
गेम जोन हादसे में मारे गए लोगों की डीएनए रिपोर्ट आज आ सकती है। कुछ लोग इस हद तक जल गए थे कि उनकी अब तक पहचान नहीं हो पाई है। 25 डीएनए स्टूडियो गांधीनगर भेजे गए थे। एम्स में 16 शवों को कोल्ड स्टोरेज में रखा गया है। जबकि सिविल अस्पताल में 11 शव बरामद हुए हैं।
राजकोट गेम जोन हादसे पर एक नजर
- आग कैसे लगी: किराए की 2 एकड़ जमीन पर तीन मंजिला गेम जोन 2020 में बनाया गया था। इसकी संरचना लकड़ी और तीन शेड पर खड़ी थी। कई जगहों की मरम्मत और नवीनीकरण का काम भी चल रहा था। एक स्थान पर सीढ़ी पर वेल्डिंग के दौरान चिंगारी से विस्फोट हुआ और चारों ओर आग लग गई।
- आग तेजी से क्यों फेली: गेम जोन का डोम कपड़ा और फाइबर से बना था। संरचना लकड़ी, टीन और थर्मोकोल शीट से बनाया गया था। टाइल पर रबर, रेज़िन और थर्मोकोल भी लगा था। इसके अलावा गेमजोन में 2 हजार लीटर डीजल और 1500 लीटर पेट्रोल भी स्टोर किया गया था। इसलिए आग कुछ मिनटों में ही तेजी से फैल गई।
- ज्यादा नुकसान की वजहें: चश्मेदिद के अनुसार, आग नीचे से ऊपर तक कुछ ही क्षणों में फैल गई थी। तीन मंजिला संरचना में नीचे से ऊपर जाने के लिए केवल एक सीढ़ी थी। दूसरी और तीसरी मंजिल के लोगों को मौका नहीं मिला।
- अधिकारी क्या बोले: कलेक्टर आनंद पटेल ने कहा, शव इतने बुरे तरीके से जले हैं कि पहचानना मुश्किल है। डीएनए टेस्ट करना होगा। राजकोट के सभी गेम जोन बंद कर दिए गए हैं। पुलिस कमिश्नर राजू भार्गव के मुताबिक, टीआरपी गेम जोन के पास फायर एनओसी तक नहीं थी। सरकार ने जांच के लिए एसआईटी बनाई है।
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तत्कालीन कलेक्टर बोले-परमिशन देने का काम निगम का

भीषण दुर्घटना होने के बाद राजकोट नगर निगम को यह पता चला है कि गेम जोन के पास कुछ भी नहीं था। एक प्लॉट जहां उसे रखा गया था, वहां तीन मंजिला शेड बनाकर उसे गेमिंग जोन बना दिया गया था। ऐसे में सवाल यह उठता है कि राजकोट नगर निगम के अंधेरे में गेमिंग जोन को लेकर कोई अधिकारी या अधिकारी नहीं था। हालांकि, तत्कालीन कलेक्टर ने सवाल किया तो उन्होंने कहा कि परमिशन देने का काम तो नगर निगम का होगा। पढ़ें पूरी खबर…
