आजकल हेल्दी लाइफस्टाइल की बात होती है तो सबसे पहले जिस ड्रिंक का नाम लिया जाता है, वह है ग्रीन टी. कई लोग इसे वेट लॉस, डिटॉक्स और फिटनेस के लिए रोजाना पीते हैं. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, कैटेचिन और हल्की मात्रा में कैफीन शरीर को ऊर्जा देने और मेटाबॉलिज्म बढ़ाने में मदद करते हैं. दिल्ली स्थित क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट और विनायक हेल्थकेयर के सीनियर एडवाइजर डॉ. राहुल शर्मा का मानना है कि ग्रीन टी हर किसी के लिए सही नहीं होती. कुछ लोगों के लिए यह फायदा देने के बजाय नुकसान भी पहुंचा सकती है.
ग्रीन टी में मौजूद कैफीन, टैनिन और कैटेचिन जैसे कंपाउंड शरीर पर अलग-अलग असर डालते हैं. ज्यादा मात्रा में सेवन करने पर यह पेट की समस्या, नींद की परेशानी और पोषक तत्वों के अवशोषण में रुकावट पैदा कर सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य तौर पर दिन में 2-3 कप ग्रीन टी सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन इससे ज्यादा पीने पर साइड इफेक्ट्स दिख सकते हैं.
सबसे पहले बात उन लोगों की करें जिन्हें आयरन की कमी या एनीमिया की समस्या होती है. ग्रीन टी शरीर में आयरन के अवशोषण को कम कर सकती है. ऐसा इसमें मौजूद कैटेचिन के कारण होता है, जो खाने से मिलने वाले आयरन को शरीर में पूरी तरह अवशोषित नहीं होने देते. इसलिए जिन लोगों में पहले से आयरन की कमी है, उन्हें ग्रीन टी कम मात्रा में या डॉक्टर की सलाह के बाद ही पीनी चाहिए.
दूसरे में आते हैं पेट से जुड़ी समस्या वाले लोग. जिन लोगों को एसिडिटी, गैस्ट्राइटिस या एसिड रिफ्लक्स की समस्या रहती है, उनके लिए ग्रीन टी परेशानी बढ़ा सकती है. इसमें मौजूद टैनिन पेट में एसिड की मात्रा बढ़ा सकते हैं, जिससे जलन, मतली या पेट दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. खासकर खाली पेट ग्रीन टी पीने से यह समस्या ज्यादा बढ़ सकती है.
तीसरी कैटेगरी में कैफीन के प्रति संवेदनशील लोग आते हैं. ग्रीन टी में कॉफी से कम कैफीन होता है, लेकिन फिर भी यह कुछ लोगों में बेचैनी, घबराहट या नींद न आने जैसी समस्या पैदा कर सकता है. ज्यादा मात्रा में ग्रीन टी पीने से सिरदर्द, तेज धड़कन और घबराहट जैसी शिकायतें भी देखी गई हैं.
इसके अलावा प्रेगनेंट और ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाओं को भी ग्रीन टी का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए. कैफीन प्लेसेंटा के जरिए बच्चे तक पहुंच सकता है और ज्यादा मात्रा में लेने से गर्भावस्था से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए डॉक्टर आमतौर पर गर्भावस्था में कैफीन की मात्रा सीमित रखने की सलाह देते हैं.
बता दें कि ग्रीन टी दवाइयों के साथ भी इंटरैक्ट कर सकती है. यह कुछ दवाओं के असर को कम कर सकती है, खासकर ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल या हार्ट से जुड़ी दवाओं के साथ. इसलिए अगर कोई व्यक्ति नियमित दवाइयां ले रहा है तो ग्रीन टी को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है.





