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Granting citizenship under CAA begins in Bengal, Haryana, Uttarakhand: MHA | बंगाल में CAA से भारतीय नागरिकता देना शुरू: हरियाणा-उत्तराखंड में भी दिए गए सर्टिफिकेट, 15 मई को पहली बार 14 शरणार्थी को नागरिकता मिली थी

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नई दिल्ली6 मिनट पहले

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15 मई की ये तस्वीरें पहली बार भारत की झलक पाने वाले लोगों की हैं। नई दिल्ली में बुधवार को केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने इन लोगों को जमानत के प्रमाण पत्र सौंपे थे।  - दैनिक भास्कर

15 मई की ये तस्वीरें पहली बार भारत की झलक पाने वाले लोगों की हैं। नई दिल्ली में बुधवार को केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने इन लोगों को जमानत के प्रमाण पत्र सौंपे थे।

केंद्र सरकार ने बुधवार को पश्चिम बंगाल, हरियाणा और उत्तराखंड में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के तहत नागरिकता देना शुरू कर दिया। गृह मंत्रालय ने यह जानकारी दी। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि तीनों राज्यों के लिए अधिकार प्राप्त समिति द्वारा संबंधित राज्यों को सहभागिता प्रदान की गई। हालाँकि, कुल कितने लोगों को जागरूक किया गया है, अभी तक इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।

इससे पहले 15 मई को सीएए के तहत पहली बार 14 लोगों को भारत की नागरिकता दी गई थी। केंद्र सरकार ने 11 मार्च 2024 को सीएए को भूख हड़ताल पर लागू किया था। सीएए के तहत 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आने वाले गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रस्ताव है।

आखिरकार, 10 दिसंबर 2019 को नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) लोकसभा से और अगले दिन राज्यसभा से पारित हुआ। 12 दिसंबर 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मंजूरी मिलने के बाद सीएए कानून बन गया था।

ममता बनर्जी समेत देश के कई विपक्षी नेता लगातार सीएए का विरोध कर रहे हैं। अप्रैल में ममता ने सीएए को मानवता का अपमान और राष्ट्र के मूल सिद्धांतों के लिए खतरा बताया था। उनका कहना था कि वह बंगाल में कभी भी सीएए लागू नहीं होने देंगे।

शाह ने ग्रामीणों से मुलाकात पर खुशी जाहिर की थी
पहली बार 14 लोगों को भारत की श्रद्धांजलि मिलने पर गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स में खुशी जताई थी। उन्होंने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। साथ ही उन्होंने भरोसा दिया कि सीएए के तहत हर एक शरणार्थी को नागरिकता दी जाएगी।

विभाजन संशोधन कानून की 3 बड़ी बातें…

1. क्यों मिलेगा लाभ: 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से धार्मिक आधार पर प्रकाशित होने वाले समाचारों के अनुसार भारत में हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को मान्यता दी जाएगी। इन तीन देशों के लोग ही अपराधियों के लिए आवेदन कर सकते हैं।

2. भारतीय नागरिकों पर क्या प्रभाव: भारतीय नागरिकों से सीएए का कोई सरोकार नहीं है। संविधान के तहत भारतीयों को जागरूक करने का अधिकार है। सीएए या कोई कानून इसे छीन नहीं सकता।

3. आवेदन कैसे करें: आवेदन ऑनलाइन करना होगा। आश्चर्य को बताना होगा कि वे भारत कब आएंगे। पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेज न होने पर भी आवेदन कर देंगे। इसके तहत भारत में रहने की अवधि 5 साल से अधिक रखी गई है। बाकी विदेशियों (मुस्लिम) के लिए यह अवधि 11 वर्ष से अधिक है।

1955 के कानून में बदलाव किया गया
2016 में नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 (सीएए) पेश किया गया था। इसमें 1955 के कानून में कुछ बदलाव किया गया था। 12 अगस्त 2016 को इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया। समिति ने 7 जनवरी 2019 को रिपोर्ट पेश की थी।

गृहमंत्री अमित शाह ने 9 दिसंबर 2019 को नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) को कांग्रेस में पेश किया था। 11 दिसंबर 2019 को राज्य में इसके पक्ष में 125 और इसके खिलाफ 99 वोट पड़े थे। 12 दिसंबर 2019 को इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई थी।

सीएए के 3 फैक्टर

  • 3देशों के मुस्लिम प्रवासियों का क्या: सीएए विदेशियों को निकालने के बारे में नहीं है। इसका अवैध कब्जा हटाने से लेना-देना नहीं है। ऐसे शरणार्थियों के लिए विदेशी अधिनियम 1946 और पासपोर्ट अधिनियम 1920 पहले से लागू हैं। दोनों ही धर्मों के तहत किसी भी देश या धर्म के विदेशियों का भारत में प्रवेश या निष्कासन किया जाता है।
  • सीएए को अब तक क्यों टाल रही सरकार: भाजपा गरीब असम-त्रिपुरा में सीएए को लेकर चिंतित रह रही हैं। सबसे पहले विरोध भी असमंजस में हुआ। सीएए में व्यवस्था है कि जो विदेशी 24 मार्च 1971 से पहले असमंजस में आ गए, उन्हें अपमानित किया गया। इसके बाद बांग्लादेश अलग देश बन गया।
  • सीएए को लेकर लोगों को क्या लगता था: सीएए को देश में एनआरसी यानी नेशनल सिटीजनशिप रजिस्टर बनाने की सीढ़ी के तौर पर देखा गया। लोगों को डर था कि विदेशी घुसपैठियों को बताकर बड़ी संख्या में लोगों को खत्म कर दिया जाएगा। पड़ोसी देश बांग्लादेश में खतरा यह है कि सीएए के बाद एनआरसी लागू होने से बड़ी संख्या में बांग्लादेशी शरणार्थी यहां लौट आएंगे।

क्या आप जानते हैं कि किन राज्यों में विदेशियों को शरण दी जा रही है?
नागरिक अधिनियम 1955 के तहत 9 राज्यों के 30 से अधिक जिला मजिस्ट्रेट और गृह सचिवों को नागरिक देने के अधिकार दिए गए हैं। ये राज्य हैं- गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, यूपी, दिल्ली, महाराष्ट्र।

दिल्ली का शाहीन बाग इलाका सीएए के विरोध से जुड़े आंदोलन का केंद्र था।  यहां प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

दिल्ली का शाहीन बाग इलाका सीएए के विरोध से जुड़े आंदोलन का केंद्र था। यहां प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

विरोध में भड़के दंगों में 50 से ज्यादा जानें गईं
पहले ही इस विधेयक को लेकर विवाद था, लेकिन जब ये कानून बन गया तो उसके बाद इसका विरोध और तेजी से हुआ। दिल्ली के कई इलाकों में प्रदर्शन हुए। 23 फरवरी 2020 की रात जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर भीड़ इकट्ठा होने के बाद भड़की हिंसा, डर में डूब गई। कानून के विरोध में 50 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।

चार राज्यों में सीएए के विरोध में प्रस्ताव पारित हो चुका है
सीएए विधेयक के संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद 4 राज्यों में इसके विरोध में विधानसभाओं में प्रस्ताव पारित कर दिया गया है। सबसे पहले केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने दिसंबर 2019 में सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि यह धरती पर नजरें गड़ाने और देश के ताने-बाने के खिलाफ है। इसमें विवेक देने से धर्म के आधार पर भेदभाव होगा।

इसके बाद पंजाब और राजस्थान सरकार ने विधानसभा में सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया। चौथा राज्य पश्चिम बंगाल था, जहां इस विधेयक के विरोध में प्रस्ताव पारित किया गया था। पश्चिम बंगाल की सीएम ने कहा था- बंगाल में हम सीएए, एनपीआर और एनआरसी की अनुमति नहीं देंगे।

4 साल में 3,117 अल्पसंख्यकों को मिली शह
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने दिसंबर 2021 में राज्यसभा में बताया कि वर्ष 2018, 2019, 2020 और 2021 के दौरान पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से कुल 3,117 अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिक बनाया गया। हालांकि आवेदन 8,244 मिले थे। वहीं, गृह मंत्रालय की 2021-22 की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल-दिसंबर 2021 में कुल 1,414 विदेशियों को भारतीय सचिव बनाया गया।

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गृह मंत्री अमित शाह ने 10 फरवरी को कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू होगा। उन्होंने कहा कि सीएए देश का कानून है, इसलिए हम इस पर यकीनन नोटिफाई करेंगे। इसे चुनाव से पहले नोटिफाई किया जाएगा और इसे चुनाव से पहले लागू भी किया जाएगा। इसके लिए कोई कन्फ्यूजन नहीं होना चाहिए। पूरी खबर पढ़ें…

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