10 मिनट पहलेलेखक: नवनीत गुर्जर, राष्ट्रीय संपादक, दैनिक भास्कर
- लिंक

इस भारी गर्मी में हर तरफ हाल बेहाल हैं। राजकोट के गेम जोन से लेकर दिल्ली के बेबी केयर सेंटर तक आग लगी हुई है। केंद्रों में भी। सिस्टम और सरकारी नियम-कानूनों में भी। वर्षों से बिना परमिशन चल रहे गेम ज़ोन की किसी ने सुध नहीं ली। अब कह रहे हैं ऐसे कई गेम ज़ोन हैं जो बिना प्रवेश के चल रहे हैं।
बेबी केयर भी बिना लाइसेंस के चले जा रहे हैं। अगर आग लगी तो केवल पांच बच्चों को रखा जा सकता था, लेकिन इसके बावजूद इस सेंटर में 12 बच्चों को ठूँस रखा गया। तेज और भीषण गर्मी ने सभी प्रभावों को उजागर कर दिया।
इस गर्मी में राजस्थान का हाल बुरा है। पिछले पांच दिनों में यहां लू लगने से तीस लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि प्रशासन और सरकार कुछ भी अनुरूप तैयार नहीं है।

राजकोट गेम जोन अग्निकांड में 28 लोगों की मौत हुई है।

दिल्ली के बेबी केयर सेंटर में आग लगने से 6 बच्चों की मौत हो गई है।
उत्साहित, सरकारें लोगों की इस तरह मौत का कोई न कोई दूसरा कारण धमकाने लगती हैं। जिम्मेदार नहीं हैं। चाहे भूख से किसी की मृत्यु हुई हो या गर्मी से या ठंड से। लू लगने से अगर किसी की मौत हुई है तो उसे उपयुक्त में क्या दिक्कत है। अब लू किसी को सरकार ने जाकर तो नहीं लगाई है! न ही सरकार ने सूरज को जाकर कहा कि इस बार जरा ज्यादा तपो। फिर संबंधित में परेशानी क्या है?
नौकरशाही हमेशा ऐसी ही होती है। उसे किसी चीज़ को उचित रूप से इतनी बार क्यों होती है, कोई नहीं जानता! ग़नीमत है कांग्रेस चुनाव का अब एक आख़िरी दौर ही बचा है वर्ना पैंतालीस डिग्री में कोई कैसे प्रचार करता है और कैसे कार्यकर्ता घर-घर पहुँचें! खैर, अब तक 486 सीटों पर मतदान हो चुका है। आख़िरी दौर में एक जून को केवल 57 सीटों पर मतदान होना है।
क्या यह सिर्फ यह कहा जा रहा है कि चार सौ पार या चार सौ के अंदर? कांग्रेस चुनाव में इस बार जीत-हार का सवाल चुनाव घोषित होने के पहले नहीं था और न ही अधिकांश दावेदारों पर मतदान होने जा रहा है। हालाँकि भारतीय गठबंधन खुद को तीन सौ लोगों के पार बताने से चूक नहीं रहा है, लेकिन यह पूरा मिसआलिया उसके पास नहीं है।
तीन सौ गाने उसके पास कहाँ से आएंगी, यह भी वह बताने की स्थिति में नहीं है। हालाँकि चार सौ पार वाले भी पक्की मिसली तो नहीं बता पा रहे हैं लेकिन जीतने वाली गणित ज़रूर उनके पास है और वो दिखाई भी दे रहा है। देखना यह है कि चुनाव परिणाम के दिन यानी चार जून को कौन कहां खड़ा रह पाता है!
