मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सुबह 10:21 बजे सोने का 2 अप्रैल 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 0.62 फीसदी यानी 953 रुपये की गिरावट के साथ 1,52,072 रुपये पर कारोबार कर रहा था। कारोबारी सत्र के दौरान सोने ने 1,51,712 रुपये का निचला स्तर और 1,53,025 रुपये का उच्चतम स्तर दर्ज किया।
वहीं, चांदी में भी कमजोरी बनी रही। 5 मई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 3,945 रुपये यानी 1.59 प्रतिशत गिरकर 2,44,249 रुपये पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान चांदी ने 2,43,083 रुपये का न्यूनतम और 2,45,387 रुपये का उच्चतम स्तर छुआ।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरावट
वैश्विक बाजारों में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। भारतीय शेयर बाजार खुलने के बाद सोना 0.92 प्रतिशत गिरकर 4,850 डॉलर प्रति औंस पर था, जबकि चांदी 2.42 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 75.735 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। यह संकेत देता है कि गिरावट सिर्फ घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है।
फेड के फैसले का असर
इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व का हालिया फैसला माना जा रहा है। बुधवार को फेड ने लगातार दूसरी बार ब्याज दरों को 3.5 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखा। इससे पहले सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर 2025 में दरों में कटौती की गई थी।
विश्लेषकों के अनुसार, फेड का यह रुख वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ती महंगाई को लेकर सतर्कता दर्शाता है। वीटी मार्केट्स के वरिष्ठ विश्लेषक जस्टिन खू का कहना है कि फेड अधिकारियों ने अब दर कटौती के अनुमान को घटाकर दो से एक कर दिया है।
महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव का असर
मुद्रास्फीति के अनुमान बढ़कर 2.7 प्रतिशत तक पहुंचने और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनावों के चलते वैश्विक तेल बाजार में दबाव बना हुआ है। इसका सीधा असर सोने-चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों पर भी देखने को मिल रहा है।





