नई दिल्ली. ईरान-इजरायल युद्ध के 11वें दिन दुनिया की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गई है. खासकर एलपीजी गैस, पेट्रोल और डीजल के दामों में 30 प्रतिशत तक दाम बढ़ गए हैं. भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका के साथ-साथ अमेरिका और यूरोप की हालत भी बेहद पतली हो गई है. आर्थिक विशेषज्ञों की मानें तो दुनिया एक ऐसे ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रही है, जिसकी कल्पना दशक भर पहले तक नहीं की गई थी. अमेरिका और इजरायल के ईरान के साथ बढ़ते सैन्य टकराव ने पश्चिम एशिया को बारूद के ढेर पर बिठा दिया है. इसका सीधा असर दुनिया के गैस सप्लाई चेन पर पड़ा है. चूंकि दुनिया का 20% तेल और एलएनजी (LNG) हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, ईरान की ओर से इस रास्ते पर लगाई गई पाबंदियों ने भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय देशों सहित कम से कम 25 देशों में हाहाकार मचा दिया है.
दुनिया में कहां-कहां हैं ‘लॉकडाउन’ जैसे हालात?
गैस संकट का असर इतना व्यापक है कि कई देशों में सरकारें कड़े कदम उठाने को मजबूर हैं:
यूरोप: जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों में गैस की कीमतें 45% तक बढ़ गई हैं. कई शहरों में रात के समय हीटिंग सिस्टम बंद करने और गैर-जरूरी औद्योगिक इकाइयों को गैस लॉकडाउन के तहत रखने के निर्देश दिए गए हैं.
जापान और दक्षिण कोरिया: ये दोनों देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का 80% से ज्यादा आयात करते हैं. यहां बिजली कटौती शुरू हो गई है और सरकार ने उद्योगों को उत्पादन कम करने को कहा है.
दक्षिण एशिया: पाकिस्तान और श्रीलंका में गैस सिलेंडरों के लिए लंबी कतारें लगी हैं. पाकिस्तान में कई जगहों पर गैस की किल्लत के कारण रेस्टोरेंट्स बंद होने की कगार पर हैं.
भारत: भारत में भी पैनिक बुकिंग के चलते सप्लाई पर दबाव बढ़ा है. पुणे जैसे शहरों में गैस की कमी के चलते गैस शवदाह गृहों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है. मुंबई सहित कई शहरों में होटल बुकिंग कैंसिल हो रहे हैं.
भारत सरकार का मास्टरस्ट्रोक
भारत में रसोई गैस की किल्लत को रोकने के लिए मोदी सरकार ने सोमवार रात एक आपातकालीन आदेश जारी किया. सरकार ने जरूरी वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act, 1955) की शक्तियों का उपयोग करते हुए नेचुरल गैस ऑर्डर 2026 लागू कर दिया है.
रिफाइनरियों को सख्त आदेश: रिलायंस और ओएनजीसी जैसी रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया है कि वे अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पादों को छोड़कर अपना पूरा ध्यान एलपीजी (LPG) उत्पादन पर लगाएं.
प्राथमिकता तय: गैस सप्लाई में सबसे पहली प्राथमिकता घरेलू रसोई गैस (PNG और LPG) और वाहनों के लिए CNG को दी जाएगी. फर्टिलाइजर प्लांट्स और चाय उद्योगों को भी कोटा अलॉट किया गया है.
बुकिंग का नया नियम: पैनिक बुकिंग और जमाखोरी रोकने के लिए अब गैस सिलेंडर रिफिल की बुकिंग के बीच 25 दिन का अंतर (Lock-in Period) अनिवार्य कर दिया गया है. पहले यह 21 दिन था.
अमेरिका की भूमिका और वैश्विक गुस्सा
विशेषज्ञों का मानना है कि जो ट्रंप प्रशासन की पश्चिम एशिया में एकतरफा नीतियों और ईरान पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों ने तनाव को उस बिंदु पर पहुँचा दिया जहां से वापसी मुश्किल है. कतर एनर्जी द्वारा एलएनजी उत्पादन रोकने और सऊदी अरब की रिफाइनरियों पर ड्रोन हमलों ने आग में घी का काम किया है. हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है, लेकिन बाजार की अस्थिरता कम नहीं हो रही है.
भारत के पास है ‘सुरक्षा कवच’
राहत की बात यह है कि भारत के पास करीब 8 हफ्तों का कच्चा तेल और गैस का रणनीतिक भंडार मौजूद है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ट्वीट कर जनता से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और झूठी अफवाहों पर ध्यान न दें. सरकार ने तेल कंपनियों को निर्देश दिया है कि घरेलू उपयोग के लिए गैस की कमी किसी भी सूरत में नहीं होनी चाहिए, भले ही इसके लिए कमर्शियल सप्लाई में कटौती करनी पड़े. आने वाले 72 घंटे वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. यदि तनाव कम नहीं हुआ, तो गैस संकट दुनिया की अर्थव्यवस्था को 1970 के दशक जैसी महामंदी की ओर धकेल सकता है.





