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हमारे शरीर में कई तरह की हड्डियां होती हैं, जिनमें कुछ बेहद मजबूत होती हैं तो कुछ काफी नाजुक और जल्दी टूटने वाली. इन्हीं में कॉलरबोन यानी हंसली की हड्डी भी शामिल है, जो शरीर के महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक होते हुए भी काफी कमजोर मानी जाती है और हल्की चोट या गिरने से भी आसानी से फ्रैक्चर हो सकती है.
शरीर में 206 हड्डियां होती हैं.
हमारे शरीर की संरचना हड्डियों पर टिकी होती है, जो न सिर्फ शरीर को आकार देती हैं बल्कि हमें चलने-फिरने, बैठने और रोजमर्रा के काम करने में मदद करती हैं. मानव शरीर में कुल 206 हड्डियां होती हैं और हर हड्डी का अपना अलग काम और महत्व होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनमें से कुछ हड्डियां बेहद मजबूत होती हैं, जबकि कुछ बहुत नाजुक होती हैं? इन हड्डियों की मजबूती और कमजोरी का सीधा असर हमारे शरीर के संतुलन और स्वास्थ्य पर पड़ता है.
दरअसल, शरीर की सबसे मजबूत हड्डी जांघ में पाई जाने वाली फीमर (जांघ की हड्डी) होती है. यह न सिर्फ सबसे लंबी होती है, बल्कि इतनी मजबूत होती है कि यह शरीर के पूरे वजन को संभाल सकती है. फीमर पर काफी दबाव पड़ता है, क्योंकि यह चलने, दौड़ने और कूदने जैसे हर काम में अहम भूमिका निभाती है. इसके बावजूद यह आसानी से नहीं टूटती, लेकिन अगर किसी बड़े हादसे में यह टूट जाए तो व्यक्ति के लिए चलना-फिरना बेहद मुश्किल हो जाता है और लंबे समय तक इलाज की जरूरत पड़ती है.
वहीं, अगर सबसे कमजोर हड्डी की बात करें तो कान के अंदर मौजूद स्टेप्स (Stapes) हड्डी को सबसे छोटी और नाजुक हड्डी माना जाता है. यह हड्डी इतनी छोटी होती है कि इसका आकार एक चावल के दाने जितना होता है. यह सुनने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती है और ध्वनि को अंदर तक पहुंचाने में मदद करती है. हालांकि यह शरीर के अंदर सुरक्षित रहती है, इसलिए आमतौर पर इसे नुकसान कम ही होता है, लेकिन इसकी संवेदनशीलता इसे बेहद खास बनाती है.
कॉलरबोन, जिसे हंसली की हड्डी भी कहा जाता है, शरीर की कमजोर हड्डियों में गिनी जाती है. यह कंधे और छाती के बीच स्थित होती है और हाथों की मूवमेंट में अहम भूमिका निभाती है. इसकी स्थिति शरीर के बाहरी हिस्से के करीब होने के कारण यह चोट लगने के लिए ज्यादा संवेदनशील रहती है. गिरने, खेलते समय टक्कर लगने या सड़क दुर्घटना में सबसे पहले यही हड्डी प्रभावित होती है. खासकर बच्चों और खिलाड़ियों में कॉलरबोन फ्रैक्चर के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं. अगर यह हड्डी टूट जाए तो कंधे और हाथ की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो जाती हैं और ठीक होने में कई हफ्तों का समय लग सकता है.
इसके अलावा, रीढ़ की हड्डी भी शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है. यह हमारे पूरे शरीर को सहारा देती है और नसों के जरिए दिमाग से शरीर के बाकी हिस्सों तक संदेश पहुंचाने का काम करती है. अगर रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लग जाए, तो व्यक्ति को चलने-फिरने में दिक्कत हो सकती है या लकवा तक हो सकता है. यही वजह है कि इसे शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा माना जाता है, जहां चोट लगने का असर पूरी जिंदगी पर पड़ सकता है.
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विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें





