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पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अमेरिका को अपना नया निशाना बनाते हुए युद्ध की घोषणा की है. यह अमेरिका के लिए ऐसे समय में एक नया मोर्चा खोलने जैसा है, जब उसका पूरा ध्यान ईरान और मध्य पूर्व के हालातों पर केंद्रित है.
पाकिस्तान के आतंकी संगठन ने अमेरिका के खिलाफ युद्ध का ऐलान किया है. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में ईरान से जंग में फंसे अमेरिका के लिए एक और आफत आ गई है. अब उसके ‘दोस्त’ पाकिस्तान में पल रहे आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) ने ही अमेरिका के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया है. अमेरिकी कांग्रेस रिसर्च सर्विस (सीआरएस) की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. JeM, जिसकी स्थापना 2000 में मसूद अज़हर ने की थी और जिसे 2001 में ही प्रतिबंधित घोषित किया गया था, 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले में लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के साथ शामिल था.
रिपोर्ट में कहा गया है कि JeM के लगभग 500 हथियारबंद समर्थक भारत, अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान में सक्रिय हैं, और वे भारत के केंद्र-शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान में ‘शामिल’ करने की मांग करते हैं. इसमें यह भी कहा गया है कि “JeM ने खुले तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी है.” रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि ये समूह अल-कायदा और उसके भारतीय उपमहाद्वीप से जुड़े संगठन (AQIS) जैसे वैश्विक स्तर पर सक्रिय संगठनों के साथ मिलकर काम करते हैं.
मदरसों में सिखा रहे जिहाद
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, पाकिस्तान ने 2023 में आतंकवादी गतिविधियों को “कम करने के लिए कुछ कदम उठाए,” लेकिन मदरसे अभी भी ऐसी विचारधाराएं सिखा रहे हैं जिनसे “हिंसक चरमपंथी विचारधारा को ज़्यादा स्वीकार्यता मिल सकती है.” भारत के लिए, इसके नतीजे बहुत गंभीर हैं. कश्मीर पर केंद्रित समूह, जैसे हिज़्बुल मुजाहिदीन – जो 1989 में बना था और जिसे 2017 में अमेरिका ने एक आतंकवादी समूह घोषित किया था – के पास 1500 लड़ाकों का एक कैडर है, जो “कश्मीर की आज़ादी या जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश को पाकिस्तान में मिलाने” की मांग करते हैं.
यह रिपोर्ट पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी और अन्य समूहों को पाँच व्यापक, और अक्सर एक-दूसरे से जुड़े हुए, वर्गों में बांटती है: वैश्विक स्तर पर सक्रिय, अफगानिस्तान पर केंद्रित, भारत और कश्मीर पर केंद्रित, घरेलू स्तर पर सक्रिय, और सांप्रदायिक (शिया-विरोधी). इन संगठनों को पूरी तरह से खत्म करने में पाकिस्तान की अक्षमता – या अनिच्छा – के कारण उसके पड़ोसी देशों के साथ तनाव बना रहता है. भारत का यह मानना है कि स्थायी शांति के लिए सीमा पार आतंकवाद को रोकना बेहद ज़रूरी है; पाकिस्तान की धरती पर लगातार मौजूद आतंकवादी ढाँचे के बारे में अमेरिका के हालिया आकलन ने भारत के इस रुख को और मज़बूती दी है.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें





