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फोर्ड के दो प्लांट में आज़मीनर्स शामिल थे। एक चेन्नई में और एक गुजरात में।
फोर्ड मोटर इंडिया ने भारत में फिर से मैन्युफैक्चरिंग शुरू करना शुरू कर दिया है। कार बनाने वाली अमेरिकी कंपनी ने तमिल सरकार के साथ एमओयू साइन किया है। फोर्ड ने यह घोषणा की कि अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली मंजूरी के खिलाफ फैसला लिया गया है।
चेन्नई ने अपने मरैमलाई नगर प्लांट में 3250 करोड़ रुपये का निवेश करने वाली कंपनी शुरू की है। इससे कंपनी नेक्स्ट जेनरेशन इंजन एक्सपोर्ट एक्सपोर्ट पेश करती है। प्रोडक्शन 2029 में शुरू होगा और इस साल फाइनल से साइट प्रिपरेशन शुरू होगा। इससे 600 से अधिक रोजगार पैदा होंगे और भारत के कॉम्प्लेक्स वर्कशॉप को लाभ होगा।

एमओयू सिने के दौरान मुख्यमत्री एमके स्टाल और उद्योग, निवेश प्रोत्साहन और वाणिज्य मंत्री ट्रेनिंगबी किंग मौजूद थे। राजा ने एक पोस्ट कर एमओयू साइन करने की जानकारी दी। 2024 में फोर्ड ने तमिल सरकार को एक लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) का अधिग्रहण किया था, जिसमें मैरीमलाई नगर प्लांट की शुरुआत फिर से हुई थी।
भारत में कोई नई फोर्ड कार आएगी?
- 2021 फोर्ड ने कम सेल्स और सस्ते दामों पर की वजह से भारत में अपना बिजनेस बंद कर दिया था। फिर कंपनी ने कहा था कि वो यहां अपने स्टाफ कारों की रेंज लाएगी। लेकिन ये प्लान कभी भी शाश्वत नहीं बना।
- 2024 फोर्ड एवरेस्ट कंपनी कंपनी की खबरों में चर्चा हुई। जब इसे भारत की सड़कों पर परीक्षण करते हुए देखा गया, तो लोगों को लगा कि जल्द ही इसे लॉन्च किया जाएगा, लेकिन ये भी बस बातें ही रह गईं।

प्लांट में हर साल 2.35 लाख इंजन बनाने वाली कंपनी
₹3,250 करोड़ का यह इन्वेस्टमेंट फोर्ड+ प्लान का हिस्सा है। चेन्नई प्लांट में प्रॉफिट 2.35 लाख इंजन प्रोडक्ट होंगे, जो नई टेक्नोलॉजी वाले होंगे। इंजन टाइप और एक्सपोर्ट गंतव्य के बाद नामांकन में जायेंगे। यह सिर्फ एक्सपोर्ट के लिए होगा, लोकल मार्केट के लिए नहीं। निवेश से 600 डायरेक्ट जॉब्स क्रिएट की आवश्यकता, साथ ही इंडस्ट्री में कार्यशाला कार्यशाला भी बढ़ेगी। तमिल से पहले ह्यूंडई, रेनॉल्ट और बीएमडब्ल्यू जैसे मैन्युफैक्चरर्स का हब है।
आगे का प्लान, अंतिम स्तर पर क्या असरदार
2029 तक उत्पादन शुरू होने के बाद फोर्ड ग्लोबल नेटवर्क को स्ट्रेंथ मिलेगा। तमिल कंपनी के ग्लोबल बिजनेस ऑपरेशंस में पहले से 12,000 लोग काम कर रहे हैं। यह निवेश व्यापार टेंशंस के बीच भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाया गया। फोर्ड का फोकस एक्सपोर्ट पर रहेगा, लोकोमोटिव नौकरियां बढ़ेंगी लेकिन कार सेल्स पर असर कम। कुल मिलाकर, यह कदम भारतीय ऑटो सेक्टर को बढ़ावा देगा।
2018 में 10 लाख ऑनलाइन का स्टार्टअप था
फोर्ड ने 1995 में भारत में महिंद्रा से लेकर ग्रैंड शिप तक का प्रवेश द्वार बनाया था। उस वक्ता कंपनी का नाम महिंद्रा फोर्ड इंडिया लिमिटेड (MFIL) था।
फोर्ड इंडिया ने जुलाई 2018 में 1 मिलियन (10 लाख) की वैश्विक बिक्री की थी। टैब कंपनी के प्रेसिडेंट और स्ट्रैटेजिक डायरेक्टर अनुराग मेहरोत्रा ने कहा कि भारत में 10 लाख अरब डॉलर तक पहुंचने पर हमें गर्व हो रहा है। अपने सपनों के विश्वास के लिए हम कर्जदार हैं।
फिगो, एस्पायर, इकोस्पोर्ट जैसी पिज्जा बेचती थी फोर्ड
फोर्ड भारत में फिगो, एस्पायर, इकोस्पोर्ट और एंडेवर जैसी कारें बेचती थीं। फोर्ड साणंद (गुजरात) और मरईमलाई (चेन्नई) प्लांट में अपने बिजनेस की मैन्युफैक्चरिंग करती थी। इसमें करीब 4000 कर्मचारी कार्यरत थे। संस्था में 11,000 से अधिक कर्मचारी थे।
