बिना डील के युद्ध खत्म करना मतलब ईरान को खुली छूट, ट्रंप की एक गलती से खाड़ी देश होंगे बर्बाद!


नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी तनाव ने खाड़ी देशों की नींद उड़ा दी है. अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बिना किसी ठोस डील के इस युद्ध को खत्म करते हैं, तो इसके परिणाम बहुत भयानक हो सकते हैं. यह युद्ध ईरान को कमजोर करने के लिए शुरू हुआ था. मगर अब हालात ऐसे हैं कि ईरान पहले से ज्यादा ताकतवर होकर उभर सकता है. खाड़ी देशों को डर है कि इस अधूरे युद्ध की भारी कीमत उन्हें चुकानी पड़ेगी. अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर जो हमले किए, उनका मकसद ईरान के शासकों को घुटने पर लाना था. हफ्तों तक चले इन हमलों के बावजूद ईरान के हौसले टूटे नहीं हैं. ईरान ने खाड़ी देशों पर मिसाइलें दागकर और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर पूरी दुनिया के मार्केट को हिला दिया है.

ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे जल्द ही युद्ध खत्म कर सकते हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि बिना किसी सुरक्षा गारंटी के युद्ध रोकना खाड़ी देशों के लिए सुसाइड जैसा होगा. दुबई के रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर मोहम्मद बहारून का कहना है कि ट्रंप युद्ध रोक सकते हैं, लेकिन ईरान नहीं रुकेगा. जब तक खाड़ी देशों में अमेरिकी बेस रहेंगे, तब तक ईरान का खतरा बना रहेगा. ईरान अब इस क्षेत्र में अपनी नई शर्तें थोपने की कोशिश करेगा.

ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत ने खेल को और ज्यादा बिगाड़ दिया?

इस युद्ध की सबसे बड़ी घटना सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत थी. अमेरिका और इजरायल को लगा था कि खामेनेई के खत्म होते ही ईरान का सिस्टम बिखर जाएगा. लेकिन हुआ इसके बिल्कुल उल्टा. उनके बेटे मोज्तबा खामेनेई ने सत्ता संभाल ली और ईरान के लोग अब और ज्यादा आक्रामक हो गए हैं.

मिडिल ईस्ट स्कॉलर फवाज गेर्गेस के मुताबिक, ट्रंप और नेतन्याहू ने एक राजनीतिक लड़ाई को धार्मिक युद्ध में बदल दिया है.

खामेनेई अब एक शहीद के रूप में देखे जा रहे हैं. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और वहां का सिस्टम अब समझौते के मूड में नहीं है. वे इसे अपने अस्तित्व की लड़ाई मान रहे हैं. अमेरिका ने ईरान के लचीलेपन और वहां के समानांतर सत्ता ढांचे को समझने में बहुत बड़ी भूल की है.

खामेनेई की मौत के बाद और खतरनाक हुआ ईरान, क्या अमेरिका ने खुद खोदी अपनी कब्र? (AI Photo)

क्या ईरान का ‘ऑयल वेपन’ दुनिया की इकोनॉमी को तबाह कर देगा?

ईरान जानता है कि वह सीधे तौर पर अमेरिका की एयर फोर्स का मुकाबला नहीं कर सकता. इसलिए उसने ‘असिमेट्रिक वॉरफेयर’ का सहारा लिया है. ईरान ने एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और तेल सप्लाई रूट को निशाना बनाया है. होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और गैस पाता है.

ईरान ने इस नस पर हाथ रखकर दुनिया भर में महंगाई बढ़ा दी है. उनका मकसद युद्ध जीतना नहीं, बल्कि दुश्मन को आर्थिक रूप से थका देना है.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर युद्ध बिना किसी नतीजे के खत्म हुआ, तो ईरान और भी ज्यादा खतरनाक हो जाएगा. वह अपनी ग्लोबल पहुंच का इस्तेमाल करके अमेरिका और इजरायल के हितों को दुनिया में कहीं भी नुकसान पहुंचा सकता है. खाड़ी देशों को डर है कि अमेरिका तो निकल जाएगा, लेकिन उन्हें हमेशा के लिए एक जख्मी और गुस्से वाले ईरान के बगल में रहना होगा.



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