उन्होंने कहा कि महाभियोग प्रस्ताव को अस्वीकार करना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है। उनके अनुसार, विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए था, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनी रहे।
मनोज झा ने कहा कि जिस तरह से चुनाव आयोग काम कर रहा है, वह संविधान के लिए सही नहीं है। देखने से ऐसा लगता है कि चुनाव आयोग भाजपा के साथ मिलकर उसे जिताने का कामा कर रहा है।





