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El Nino July 2026 Warning: मार्च 2026 के आंकड़े बताते हैं कि धरती पर जलवायु संकट तेजी से गहराता जा रहा है. समुद्र का तापमान रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया है, इससे अल नीनो के जुलाई तक सक्रिय होने की संभावना बढ़ गई है. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह स्थिति हीटवेव और चरम मौसम घटनाओं को और खतरनाक बना सकती है. (सभी फोटो PTI)
धरती पर जलवायु संकट अब किसी दूर की चेतावनी नहीं, बल्कि सामने खड़ी सच्चाई बन चुका है. मार्च 2026 के आंकड़े इस खतरे को और गहरा कर देते हैं. वैश्विक तापमान प्री-इंडस्ट्रियल स्तर से 1.48°C ऊपर दर्ज किया गया, जो बताता है कि धरती लगातार गर्म होती जा रही है. समुद्रों का तापमान भी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे ऐसा महसूस हो रहा है जैसे समंदर का पानी ‘खौलते लावा’ में बदलता जा रहा हो. यह स्थिति आने वाले महीनों में और खतरनाक रूप ले सकती है.

यूरोपीय एजेंसी कोपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा (C3S) की रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2026 वैश्विक स्तर पर चौथा सबसे गर्म मार्च रहा. इस रिपोर्ट में बताया गया कि समुद्री सतह का तापमान 20.97°C तक पहुंच गया, जो रिकॉर्ड में दूसरा सबसे अधिक है. यह आंकड़ा 2024 के अल नीनो पीक के बाद सबसे ज्यादा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तेजी से बढ़ता तापमान इस साल जुलाई तक अल नीनो की वापसी का संकेत दे रहा है.

अमेरिका की एजेंसी NOAA के राष्ट्रीय पर्यावरणीय सूचना केंद्र ने भी इसी तरह के संकेत दिए हैं. उनके अनुसार मार्च का तापमान 20वीं सदी के औसत से 1.31°C ज्यादा रहा. खास बात यह है कि 1850 के बाद से जितने भी सबसे गर्म मार्च दर्ज किए गए हैं, उनमें से टॉप-10 सभी 2015 के बाद के हैं. यह साफ दिखाता है कि ग्लोबल वार्मिंग अब तेजी से बढ़ रही है और इसका असर लगातार गहरा होता जा रहा है.
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यूरोप में मार्च का महीना दूसरा सबसे गर्म रहा हालांकि फरवरी के मुकाबले मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिला. फरवरी जहां ठंडी और ज्यादा बारिश वाली थी, वहीं मार्च सूखा और गर्म रहा. अमेरिका के पश्चिमी हिस्सों में लंबे समय तक हीटवेव देखने को मिली, जबकि आर्कटिक, उत्तर-पूर्वी रूस और अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में भी सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया गया.

हालांकि कुछ इलाकों में ठंडे हालात भी देखने को मिले. अलास्का, कनाडा के अधिकांश हिस्सों, दक्षिणी ग्रीनलैंड और उत्तर-पश्चिमी साइबेरिया में तापमान सामान्य से कम रहा. लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि ये ठंडे क्षेत्र भी समग्र तस्वीर को नहीं बदलते, क्योंकि वैश्विक स्तर पर गर्मी का ट्रेंड लगातार मजबूत हो रहा है.

कोपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा के निदेशक कार्लो बुओनटेम्पो ने चेतावनी देते हुए कहा कि मार्च 2026 के आंकड़े जलवायु प्रणाली पर बढ़ते दबाव की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं. उन्होंने कहा कि आर्कटिक समुद्री बर्फ का स्तर रिकॉर्ड में सबसे कम रहा और समुद्र का तापमान ऐतिहासिक ऊंचाई के करीब पहुंच गया है. ये सभी संकेत बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन अब तेज़ और खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है.

NOAA के Climate Prediction Center के अनुसार अप्रैल से जून 2026 तक ENSO-न्यूट्रल स्थिति रहने की 80% संभावना है, लेकिन मई-जुलाई के बीच अल नीनो के आने की संभावना 61% तक पहुंच जाती है. अगस्त तक इसके बने रहने की संभावना 80% और सितंबर तक 85% तक बताई गई है. इसका मतलब है कि इस साल गर्मी और ज्यादा बढ़ सकती है और हीटवेव की घटनाएं भी तेज़ हो सकती हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पूर्व पृथ्वी विज्ञान सचिव एम राजीवन ने भी चेतावनी दी है कि ग्लोबल वार्मिंग बिना किसी धीमेपन के बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि इसका मुख्य कारण है और अगर इस साल अल नीनो सक्रिय होता है, तो यह वातावरण में और अधिक गर्मी जोड़ देगा. इससे हीटवेव, सूखा और चरम मौसम की घटनाएं बढ़ सकती हैं. यह समय चेतावनी को समझने और ठोस कदम उठाने का है, क्योंकि अब देरी का मतलब और बड़ा संकट हो सकता है.





