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डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो पर फिर निशाना साधते हुए कहा कि जरूरत के समय गठबंधन अमेरिका के साथ नहीं था. उन्होंने संकेत दिया कि अगर सहयोग नहीं मिला तो अमेरिका नाटो से अलग होने पर विचार कर सकता है. ईरान युद्ध, होर्मुज की सुरक्षा और ग्रीनलैंड विवाद को लेकर ट्रंप नाराज हैं. हालांकि कानून के तहत नाटो से बाहर निकलने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी है.
नाटो चीफ से मिलते डोनाल्ड ट्रंप.
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो महासचिव मार्क रुटे के साथ बंद कमरे में हुई बैठक के बाद फिर से सैन्य गठबंधन की आलोचना की और कहा कि जरूरत के समय नाटो अमेरिका के साथ नहीं था. बैठक से पहले ट्रंप ने इशारा किया था कि अगर ईरान युद्ध के दौरान सहयोग नहीं मिला तो अमेरिका नाटो से अलग होने पर विचार कर सकता है. बैठक के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर बड़े अक्षरों में लिखा, ‘नाटो हमारे साथ नहीं था जब हमें उसकी जरूरत थी और आगे भी जरूरत पड़ेगी तो साथ नहीं होगा.’ व्हाइट हाउस ने इस पर कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी.
नाटो से निकलना क्या आसान है?
प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ट्रंप नाटो से अलग होने के मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं. ट्रंप और रुटे की यह बैठक ऐसे समय हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति बनी है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का रास्ता साफ हुआ है. अमेरिकी कांग्रेस ने 2023 में एक कानून पास किया था, जिसके मुताबिक कोई भी राष्ट्रपति कांग्रेस की मंजूरी के बिना नाटो से बाहर नहीं जा सकता. ट्रंप लंबे समय से नाटो की आलोचना करते रहे हैं और अपने पहले कार्यकाल में भी उन्होंने गठबंधन से बाहर निकलने का संकेत दिया था.
नाटो से ट्रंप नाराज क्यों हैं?
नाटो की स्थापना 1949 में यूरोप की सुरक्षा के लिए हुई थी और इसके 32 सदस्य देशों के बीच सामूहिक रक्षा समझौता लागू है. ट्रंप ने ईरान युद्ध के दौरान आरोप लगाया था कि नाटो देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में अमेरिका का साथ नहीं दिया. उन्होंने कहा था कि इस महत्वपूर्ण मार्ग की सुरक्षा उन देशों की जिम्मेदारी है, जो इसके जरिए तेल पर निर्भर हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, नाटो के कुछ सदस्य देशों जैसे स्पेन और फ्रांस ने ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका को अपने हवाई क्षेत्र या सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल पर सीमाएं लगाईं, जिससे ट्रंप नाराज बताए जा रहे हैं.
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर भी नाराजगी जताई, जो नाटो सदस्य डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है. उन्होंने इस साल की शुरुआत में ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की बात कही थी, लेकिन बाद में पीछे हट गए. इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रुटे से अलग बैठक में ईरान युद्ध, रूस-यूक्रेन संघर्ष और नाटो सहयोग बढ़ाने के मुद्दों पर चर्चा की. सीनेट के वरिष्ठ नेता मिच मैककॉनेल ने नाटो के समर्थन में बयान जारी करते हुए कहा कि 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद नाटो सहयोगियों ने अमेरिका के साथ मिलकर अफगानिस्तान और इराक में लड़ाई लड़ी थी. उन्होंने ट्रंप से सहयोगियों के साथ संबंधों को लेकर स्पष्ट और संतुलित रुख अपनाने की अपील की. विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान युद्ध, यूक्रेन को लेकर नीति और ग्रीनलैंड विवाद जैसे मुद्दों के चलते ट्रंप और नाटो के बीच तनाव और बढ़ गया है.
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योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें





