अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा बयान दिया है, जिसे क्षेत्रीय समीकरणों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है. अफगानिस्तान के मुद्दे पर दखल देने को लेकर पूछे गए सवाल पर डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह दखल दे सकते हैं. इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के साथ अपने ‘बहुत, बहुत अच्छे’ रिश्तों पर भी खास जोर दिया.
डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि वह पाकिस्तान के साथ ‘बहुत अच्छी तरह’ निभाते हैं. उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर की खुलकर तारीफ करते हुए कहा, ‘उनके पास एक बेहतरीन प्रधानमंत्री हैं, एक शानदार जनरल हैं और एक महान नेतृत्व है. ये ऐसे लोग हैं जिनका मैं बहुत सम्मान करता हूं. पाकिस्तान इस समय काफी अच्छा कर रहा है.’
ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हालात बेहद तनावपूर्ण हो चुके हैं और इस्लामाबाद ने दोनों देशों के बीच हालिया घटनाक्रम को ‘खुली जंग’ करार दिया है. जानकारों का मानना है कि ट्रंप की टिप्पणी को मौजूदा हालात में पाकिस्तान के प्रति समर्थन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमले, ‘खुली जंग’ का ऐलान
पाकिस्तान ने शुक्रवार को अफगानिस्तान के कई प्रमुख शहरों पर हवाई हमले किए, जिनमें राजधानी काबुल के अलावा कंधार और पक्तिया भी शामिल हैं. यह पहली बार है जब पाकिस्तान ने सीधे तौर पर तालिबान के नियंत्रण वाले बड़े शहरों को निशाना बनाया है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने इन हमलों के बाद कहा कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच अब ‘ओपन वॉर’ की स्थिति बन चुकी है.
इन हवाई हमलों को पाकिस्तान की ओर से पहले हुए सीमा-पार हमलों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है. पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, गुरुवार रात अफगान बलों ने पाकिस्तानी सीमा चौकियों पर हमला किया था, जो इस्लामाबाद के अनुसार पहले किए गए हवाई हमलों के जवाब में था.
पाकिस्तान का दावा है कि हालिया झड़पों में उसके 12 सैनिक मारे गए हैं, जबकि अफगानिस्तान की ओर से कहा गया है कि 13 तालिबान लड़ाके मारे गए. दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया है, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है.
पाकिस्तान के सपोर्ट में अमेरिका
इस बीच अमेरिका के विदेश विभाग ने भी पाकिस्तान के प्रति नरम रुख के संकेत दिए हैं. अमेरिकी विदेश विभाग में राजनीतिक मामलों की अंडर सेक्रेटरी एलिसन एम. हूकर ने कहा कि उन्होंने पाकिस्तान की विदेश सचिव अमना बलोच से बात की और हालिया संघर्ष में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना जताई.
हूकर ने कहा, ‘हम स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और तालिबान हमलों के खिलाफ पाकिस्तान के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करते हैं.’ इस बयान को भी कूटनीतिक हलकों में पाकिस्तान के पक्ष में एक अहम संकेत माना जा रहा है.
तालिबान बातचीत के लिए तैयार
हालांकि हालात बेहद गंभीर हैं, लेकिन अफगानिस्तान में तालिबान शासन ने बातचीत के जरिए मसले सुलझाने की इच्छा जताई है. तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा, ‘इस्लामिक अमीरात अफगानिस्तान ने हमेशा संवाद के जरिए समस्याओं को हल करने की कोशिश की है.’
वहीं, कतर एक बार फिर मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है. कतर पहले भी दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने में अहम भूमिका निभा चुका है और अब 2,600 किलोमीटर लंबी सीमा पर हालात और न बिगड़ें, इसके लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं.
संयुक्त राष्ट्र की चिंता, हिंसा रोकने की अपील
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र ने भी अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच हिंसा बढ़ने पर गहरी चिंता जताई है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि महासचिव इस हिंसा और इसके आम नागरिकों पर पड़ने वाले असर को लेकर ‘बेहद चिंतित’ हैं.
दुजारिक ने कहा, ‘महासचिव तत्काल संघर्षविराम की अपील करते हैं और दोनों पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे अपने मतभेद कूटनीति और संवाद के जरिए सुलझाएं.’
क्यों बढ़ा तनाव?
पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान अपनी जमीन से पाकिस्तान विरोधी आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहा है. खास तौर पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पर पाकिस्तान में हमले करने का आरोप लगाया जाता है. अफगान तालिबान प्रशासन इन आरोपों से इनकार करता रहा है.
हालिया महीनों में दोनों देशों के रिश्ते तेजी से बिगड़े हैं. अक्टूबर में हुई घातक झड़पों के बाद से अधिकांश जमीनी सीमा चौकियां बंद पड़ी हैं. उन झड़पों में दोनों तरफ मिलाकर 70 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी.
ट्रंप के बयान के मायने
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का पाकिस्तान के पक्ष में झुकाव दिखाना न केवल दक्षिण एशिया की राजनीति को प्रभावित कर सकता है, बल्कि अमेरिका की भविष्य की रणनीति के संकेत भी देता है. अफगानिस्तान-पाकिस्तान टकराव अगर और बढ़ता है, तो इसमें वैश्विक शक्तियों की भूमिका और भी अहम हो सकती है.
फिलहाल, दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या हालात कूटनीति के जरिए संभाले जा सकेंगे या यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले लेगा.





