Donald Trump- Iran War: डोनाल्ड ट्रंप की हालत इन दिनों खिसयानी बिल्ली खंभा नोचे जैसी हो गई है. ईरान में उन्होंने जंग छेड़ कर माने अपने ही पैर पर कुल्हारी मार ली हो. भले ही वह ईरान युद्ध में अमेरिका को 10 में से 15 नंबर दे रहो हों लेकिन ईरान जंग में अमेरिका की हालत क्या है यह वह खुद मझ रहे हैं. कह रहे हैं ईरान की नौसेना खत्म हो गई है, हमने ईरान एयरफोर्स को तबाह कर दिया है. लेकिन हकीकत? यह युद्ध ट्रंप के गले की फांस बन चुका है. हजारों अमेरिकी सैनिकों की जान जोखिम में है. अमेरिका की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही है और तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. मिडिल ईस्ट में यह जंग ट्रंप की महत्वाकांक्षा का कब्रिस्तान साबित हो रही है. अमेरिकी जहाजों का लोकेशन लीक हो रहा है और रूस ईरान को इंटेलिजेंस दे रहा है. ट्रंप की ‘परफेक्ट विक्टरी’ सिर्फ X पर पोस्ट पर दिख रही है. जमीन पर अमेरिका की साख दांव पर है और अब? ओवल ऑफिस में पादरियों को बुलाकर प्रार्थना… युद्ध के बीच भगवान की शरण? यह कमजोरी है या ड्रामा मिस्टर प्रेसिडेंट?
’10 में से 15 नंबर’ का दावा और ओवल ऑफिस की प्रार्थना
डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा कर रहे हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध में बढ़त बनाए हुए है. उनका कहना है कि ईरान की नौसेना खत्म हो चुकी है, कम्युनिकेशन सिस्टम तबाह हो गई है और उसकी वायुसेना भी लगभग नष्ट हो चुकी है. लेकिन दूसरी ओर खबरें यह भी बता रही हैं कि ईरान लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है. ऐसे में ट्रंप के दावों और जमीनी हालात के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है.
शुक्रवार को जारी वीडियो में पादरी टॉम मुलिन्स और अन्य धार्मिक नेताओं ने ट्रंप के लिए प्रार्थना की. (फोटो AP)
- शुक्रवार को जारी वीडियो में पादरी टॉम मुलिन्स और अन्य धार्मिक नेताओं ने ट्रंप के लिए प्रार्थना की. उन्होंने कहा कि भगवान उन्हें इन कठिन समय में सही निर्णय लेने की बुद्धि दें और अमेरिकी सैनिकों की रक्षा करें. यह दृश्य राजनीतिक से ज्यादा प्रतीकात्मक नजर आया. एक ऐसा राष्ट्रपति जो युद्ध को जीत बताता है लेकिन उसी युद्ध के बीच ईश्वर से प्रार्थना करता दिखता है.
- इसके बाद शनिवार को जब रिपोर्टरों ने ट्रंप से पूछा कि क्या रूस ईरान को अमेरिकी सैनिकों और जहाजों की लोकेशन से जुड़ी खुफिया जानकारी दे रहा है, तो ट्रंप ने सवाल को ‘बेवकूफी भरा’ करार दे दिया. उन्होंने कहा कि अभी इससे भी बड़े मुद्दे चल रहे हैं. उन्होंने पत्रकारों से विषय बदलने की कोशिश भी की.
ट्रंप ईरान युद्ध को ’15/10′ क्यों बता रहे हैं?
ट्रंप का यह बयान राजनीतिक संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. जब कोई नेता युद्ध को सामान्य जीत से भी ज्यादा बड़ी सफलता बताता है, तो वह अपने समर्थकों को यह दिखाना चाहता है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है. ट्रंप का ’15/10′ वाला बयान भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध वास्तव में इतना सफल होता तो तेल की कीमतें, क्षेत्रीय तनाव और सैनिकों की सुरक्षा को लेकर इतनी चिंता नहीं होती.
ओवल ऑफिस में पादरियों के साथ प्रार्थना का क्या संदेश है?
राजनीतिक तौर पर यह कदम ट्रंप के धार्मिक समर्थक वर्ग को संदेश देने का प्रयास माना जा सकता है. अमेरिका में इवेंजेलिकल ईसाई समुदाय ट्रंप का बड़ा समर्थन आधार रहा है. ऐसे में युद्ध के बीच प्रार्थना का यह दृश्य उनके समर्थकों के लिए एक प्रतीकात्मक तस्वीर बन सकता है. लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह नेतृत्व की मजबूती से ज्यादा अनिश्चितता का संकेत देता है.
रूस की कथित मदद को लेकर विवाद क्यों है?
NBC की रिपोर्ट्स में कहा गया है कि रूस ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों और जहाजों से जुड़ी खुफिया जानकारी दे सकता है. हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि यह जानकारी सीधे हमलों को निर्देशित करने के लिए इस्तेमाल हो रही है या नहीं. लेकिन अगर ऐसी जानकारी साझा हो रही है तो यह अमेरिका के लिए रणनीतिक चुनौती बन सकती है. इसी वजह से यह सवाल ट्रंप प्रशासन के लिए असहज माना जा रहा है.
ट्रंप की छवि: नेता या शोमैन?
ट्रंप की राजनीति हमेशा से नाटकीय अंदाज के लिए जानी जाती रही है. बड़े दावे, तीखे बयान और कैमरे के सामने मजबूत छवि दिखाने की कोशिश. लेकिन ईरान युद्ध के बीच उनका ’10 में 15 नंबर’ वाला दावा और उसी समय ओवल ऑफिस में प्रार्थना का दृश्य एक अलग कहानी भी बता सकता है. यह उस दबाव की कहानी है जिसमें अमेरिका इस समय फंसा हुआ है. सवाल यही है कि अगर युद्ध सचमुच जीत की ओर है तो फिर भगवान से प्रार्थना की इतनी जरूरत क्यों पड़ रही है?





