डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरकार मान ली हार, होर्मुज पर कब्जा अमेरिका के बस की बात नहीं, कह दिया- तुम लोग जानो


Trump on Iran Hormuz: ईरान-अमेरिका जंग से पूरी दुनिया संकट में है. एलपीजी और तेल का संकट गहराता जा रहा है. पश्चिम एशिया में त्राहिमाम-त्राहिमाम है. खाड़ी देशों में हड़कंप है. कभी भी और किधर से भी मिसाइल आ जा रही. अब तो गैस और तेल के प्लांट भी सेफ नहीं रहें. भारत समेत दुनिया के कई देशों में ईंधन की किल्लत होने लगी है. अब भी ईरान युद्ध किस ओर जाएगा, यह तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है. इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने जो बयान दिया है, उससे यह साफ हो गया है कि आखिरकार अमेरिका ने अपनी हार मान ली है. डोनाल्ड ट्रंप को एहसास हो गया है कि ईरान के साथ युद्ध में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कब्जा करना अमेरिका के बस की बात नहीं है. तभी तो उन्होंने साफ-साफ अन्य देशों को कह दिया है कि अमेरिका का इससे लेना-देना नहीं है. तुम लोग जानो.

जी हां, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध में एक बड़ा यू-टर्न लिया है. उन्होंने अब साफ संकेत दिए हैं कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह कंट्रोल करने या खोलने की जिम्मेदारी नहीं लेगा. इससे पहले तक डोनाल्ड ट्रंप बड़ी-बड़ी हांक रहे थे कि हम ये कर देंगे, वो कर देंगे. मगर अब ऐसा लग रहा है कि उन्होंने होर्मुज वाले मसले पर सरेंडर कर दिया है. ऐसा लग रहा है कि ईरान के आगे होर्मुज में अमेरिका की एक भी नहीं चल पा रही है. तभी तो अमेरिका अब तक होर्मुज का रास्ता नहीं खुलवा पाया है. अमेरिका लगातार अन्य देशों से साथ आने को कह रहा था. मगर ईरान के डर से कोई साथ आने को तैयार नहीं है. फ्रांस, जापान और जर्मनी जैसे देशों ने होर्मुज से सेफ पैसेज के लिए हाथ मिलाया, मगर उन्होंने सीजफायर की शर्त रख दी. मगर अब तक ट्रंप सीजफायर को तैयार नहीं हैं.

डोनाल्ड ट्रंप ने कैसे मान ली हार?

बहरहाल, अब ये जान लेते हैं कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा क्या कहा है, जिससे लग रहा कि होर्मुज पर अमेरिका सरेंडर कर चुका है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर पोस्ट कर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘होर्मुज स्ट्रेट को गार्ड और पुलिस करने की जिम्मेदारी उन देशों पर है, जो इसका इस्तेमाल करते हैं. अमेरिका नहीं करता. उन्होंने कहा कि अगर कहा जाए तो हम इन देशों की होर्मुज कोशिशों में मदद करेंगे, लेकिन ईरान का खतरा खत्म होने के बाद इसकी जरूरत नहीं होनी चाहिए.’

क्या सीजफायर करेगा अमेरिका?

डोनाल्ड ट्रंप ने इसके साथ यह भी कहा कि अमेरिका अपने लक्ष्यों के बहुत करीब पहुंच गया है और अब मिडिल ईस्ट में अपनी मिलिट्री को Winding Down यानी कम करने पर विचार कर रहा है. हालांकि, वह इस बात पर अडिग है कि वह अभी ईरान युद्ध में सीजफायर नहीं करेंगे. इससे पहले ट्रंप बार-बार दावा करते थे कि ईरान की मिलिट्री खत्म हो चुकी है. ईरान की नेवी, एयर फोर्स और एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम नष्ट हो गए हैं. लेकिन होर्मुज स्ट्रेट अभी भी ईरान के माइंस, ड्रोन्स और मिसाइलों से बंद है. होर्मुज पर अब भी ईरान का एकाधिकार है. इससे दुनिया भर में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. डोनाल्ड ट्रंप चाहकर भी ईरान के कब्जे से होर्मुज को आजाद नहीं करवा पा रहे हैं.

डोनाल्ड ट्रंप ने माना है कि होर्मुज की जिम्मेदारी अमेरिका की नहीं है.

क्यों और किसके लिए अहम है होर्मुज?

डोनाल्ड ट्रंप यह जानते हैं कि होर्मुज पश्चिम और साउथ एशिया के देशों के लिए कितना अहम है. तभी तो वह होर्मुज मसले पर बैकफुट पर चले गए हैं. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के 20 फीसदी तेल और गैस का रास्ता है. भारत के भी ज्यादातर तेल और गैस इसी रास्ते से आते हैं. अब भी होर्मुज में 20 से अधिक जहाज फंसे हुए हैं. 2 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर अटैक किया तो इसमें अली खामेनेई मारे गए. इसका बदला लेने के लिए ईरान ने भी अटैक किया और होर्मुज को बंद कर दिया. ईरान के इस कदम से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हाहाकार मच गया. इसके बाद होर्मुज का रास्ता खोलने के लिए अमेरिका जी जान से लग गया.

डोनाल्ड ट्रंप के तेवर बदले

होर्मुज पर डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कई बार सहयोगी देशों से मदद मांगी. चीन, जापान, फ्रांस, ब्रिटेन, साउथ कोरिया से होर्मुज में वारशिप भेजने को कहा. लेकिन अमेरिका के साथ कोई भी देश आगे नहीं आया. इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप नाटो से भी सहयोग मांगा. नाटो ने भी अमेरिका को झटका दे दिया. इससे खुन्नस खाए डोनाल्ड ट्रंप ने NATO सहयोगियों को कायर तक कह डाला. अब जब वह हर प्रयास करके हार चुके हैं तो अब ट्रंप कह रहे हैं कि अमेरिका को होर्मुज की जरूरत नहीं, क्योंकि अमेरिका ज्यादा तेल नहीं इम्पोर्ट करता होर्मुज से. उन्होंने कहा कि अन्य देश जो इससे प्रभावित हैं, वे खुद इसे सुरक्षित करें. यह एक तरह से अमेरिका की हार है. इस तरह देखा जाए तो डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान, उनकी पहले की आक्रामक नीति से अलग है.



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