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Type 2 diabetes common drug Metformin uses: टाइप 2 डायबिटीज को कंट्रोल में रखने के लिए वर्षों से मेटफोर्मिन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो एक बेहद ही सस्ती, प्रभावी और भरोसेमंद दवा मानी जाती है. मेटफोर्मिन शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करके लिवर में शुगर के प्रोडक्शन को कम करती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में बना रहता है. लेकिन, एक स्टडी के अनुसार, यह मस्तिष्क के वेंट्रोमेडियल हाइपोथैलेमस नामक छोटे लेकिन महत्वपूर्ण हिस्से के माध्यम से भी काम करती है, जो भूख, एनर्जी के उपयोग और ग्लूकोज बैलेंस को कंट्रोल करता है.
मधुमेह की दवा मेटफॉर्मिन का मस्तिष्क पर प्रभाव.
भारत में डायबिटीज एक गंभीर बीमारी बन चुकी है, जिससे करोड़ों लोग इससे ग्रस्त है. इसमें टाइप-2 डायबिटीज की बात करें तो युवाओं में ये तेजी से बढ़ रहा है. मुख्य रूप से खराब खानपान, बेतरतीब लाइफस्टाइल, स्ट्रेस, एंजायटी, फिजिकल एक्टिविटी में कमी, मोटापा, घंटों बैठ कर काम करना आदि टाइप-2 डायबिटीज के होने के जोखिम को बढ़ाते हैं. कुछ स्टडी के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत मामले टाइप-2 डायबिटीज के देश में हैं. हालांकि, टाइप-2 डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए मेटफोर्मिन (metformin) दवा उपलब्ध है. मेटफोर्मिन एक सस्ती, प्रभावी और भरोसेमंद दवा है, जिसका इस्तेमाल टाइप-2 डायबिटीज के इलाज में किया जाता है. ये दवा लंबे समय से टाइप 2 डायबिटीज के इलाज के लिए पहली पसंद रहा है. मेटफोर्मिन शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करके लिवर में शुगर के प्रोडक्शन को कम करती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में बना रहता है.
टीओआई में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों का कहना है कि मेटफोर्मिन दवा सीधे मस्तिष्क पर असर डालती है. एक स्टडी में दिमाग में छिपे एक ऐसे मार्ग का पता लगाया है, जिसके जरिए इस बात को समझना आसान हो जाता है कि मेटफॉर्मिन दवा ब्लड शुगर को कैसे कंट्रोल करता है. ये दवा ब्रेन के कई मार्गों को लगातार प्रभावित करता रहता है. यह स्टडी बेलॉर कॉलेज ऑफ मेडिसिन के द्वारा साइंस एडवांसेज में प्रकाशित की गई है. इस खोज से मेटफोर्मिन के बारे में नई चीजें पता चलती हैं. इस दवा का इस्तेमाल कई दशकों से किया जा रहा है.
मेटफॉर्मिन का काम
स्टडी के अनुसार, कई वर्षों से ये ही माना जाता रहा है कि मेटफॉर्मिन मुख्य रूप से लीवर और आंतों पर काम करती है, लेकिन नए शोध से पता चला है कि यह मस्तिष्क के वेंट्रोमेडियल हाइपोथैलेमस नामक छोटे लेकिन महत्वपूर्ण हिस्से के माध्यम से भी काम करती है, जो भूख, एनर्जी के उपयोग और ग्लूकोज बैलेंस को कंट्रोल करता है.
मेटफॉर्मिन दवा Rap1 नामक प्रोटीन को निष्क्रिय कर देती है. उन तंत्रिका कोशिकाओं को सक्रिय करती है, जो ब्लड ग्लूकोज लेवल को कंट्रोल करती हैं. कहने का मतलब ये है कि ये दवा मस्तिष्क के नियंत्रण तंत्र का उपयोग करके ब्लड शुगर को कम करती है. स्टडी में कहा गया है कि जब ब्रेन के इस मार्ग में रुकावटें आती हैं तो दवाएं अपना काम करना बंद कर देती है. हालांकि, इंसुलिन जैसी दवाएं जैसे मेटफॉर्मिन भी प्रभावी बनी रहती हैं. यहां तक कि बहुत कम मात्रा में भी यह दवा ब्लड शुगर कम करने में सक्षम पाई गई. मुख्य शोधकर्ता माकोटो फुकुदा का कहना है कि यह खोज लंबे समय से चली आ रही धारणाओं को चुनौती देती है.
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अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें





