क्या प्रोटीन शेक पीने से स्पर्म काउंट पर पड़ता है असर? आईवीएफ स्पेशलिस्ट ने इस सवाल पर क्या कहा


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Protein Shakes and Male Fertility: बॉडी बनाने के लिए कई युवा जमकर प्रोटीन सप्लीमेंट्स का सेवन कर रहे हैं. डॉक्टर्स की मानें तो इन सप्लीमेंट्स में मौजूद मिलावटी स्टेरॉयड और हैवी मेटल्स पुरुषों के स्पर्म काउंट को नुकसान पहुंचा सकती हैं. लोगों को हमेशा अच्छी क्वालिटी के प्रोटीन सप्लीमेंट्स का सेवन करना चाहिए और इससे पहले डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है.

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कई प्रोटीन सप्लीमेंट्स में स्टेरॉयड और हैवी मेटल्स होते हैं, जो सेहत के लिए खतरनाक हैं.

Dangers of Steroids in Protein: आजकल फिटनेस को लेकर लोगों में दीवानगी देखने को मिल रही है. मसल बिल्डिंग और एनर्जी के लिए प्रोटीन शेक और सप्लीमेंट्स का चलन काफी बढ़ गया है. जिम जाने वाले युवाओं से लेकर एथलीट्स तक हर कोई अपनी डाइट में प्रोटीन पाउडर शामिल कर रहा है. प्रोटीन शरीर की मरम्मत और मांसपेशियों के विकास के लिए जरूरी है, लेकिन प्रोटीन सप्लीमेंट्स के अंधाधुंध सेवन को लेकर डॉक्टर्स चेतावनी दे रहे हैं. फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स के अनुसार घटिया क्वालिटी वाले प्रोटीन सप्लीमेंट्स पुरुषों की फर्टिलिटी पर बुरा असर डाल सकते हैं. ये प्रोटीन शेक स्पर्म काउंट को भी प्रभावित करते हैं.

इंदिरा आईवीएफ की सीईओ और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. क्षितिज मुर्डिया ने HT को बताया कि सभी प्रोटीन पाउडर हानिकारक नहीं है, लेकिन बाजार में मौजूद कई सप्लीमेंट्स में छिपे हुए स्टेरॉयड और हैवी मेटल्स खतरनाक हो सकते हैं. लंबे समय तक ऐसे प्रोटीन सप्लीमेंट्स का सेवन करने से पुरुषों का स्पर्म काउंट गिर सकता है और रिप्रोडक्टिव हेल्थ को गंभीर नुकसान हो सकता है. खासतौर से स्टैनोजोलोल और मेथांडिएनोन जैसे एनाबॉलिक स्टेरॉयड हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकते हैं. ये स्टेरॉयड अक्सर प्री-वर्कआउट ड्रिंक्स में पाए जाते हैं. इनका सेवन करना ओवरऑल हेल्थ के लिए भी बेहद नुकसानदायक है.
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डॉक्टर ने बताया कि स्पर्म बनने की प्रक्रिया को स्पर्मेटोजेनेसिस कहा जाता है. इसके लिए एनर्जी और पर्याप्त पोषण की आवश्यकता होती है. प्रोटीन कोशिका मरम्मत, एंजाइम गतिविधि और हार्मोन संश्लेषण के लिए जरूरी है. अगर शरीर में प्रोटीन की भारी कमी हो, तो प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है. जो पुरुष दालों, डेयरी प्रोडक्ट, अंडा, सोया और नट्स जैसी संतुलित डाइट लेते हैं, उन्हें सप्लीमेंट्स की जरूरत नहीं पड़ती. सप्लीमेंट्स केवल तभी आवश्यक हैं, जब भोजन से प्रोटीन की कमी पूरी न हो पा रही हो.

कई खराब क्वालिटी वाले प्रोटीन सप्लीमेंट्स में एनाबॉलिक स्टेरॉयड या हार्मोन-मॉड्यूलेटिंग यौगिक मिलाए जाते हैं. ये रसायन शरीर के प्राकृतिक टेस्टोस्टेरोन उत्पादन में हस्तक्षेप करते हैं, जिससे शुक्राणु बनने के लिए आवश्यक हार्मोनल सिग्नल बाधित हो जाते हैं. इसके अलावा कुछ रिसर्च में इन सप्लीमेंट्स के अंदर सीसा और पारा जैसी भारी धातुओं के अंश भी पाए गए हैं. ये तत्व न केवल लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस भी बढ़ाते हैं, जो स्पर्म के डीएनए को क्षतिग्रस्त कर सकता है.

स्पर्म क्वालिटी गिरने के लिए केवल प्रोटीन सप्लीमेंट्स ही जिम्मेदार नहीं हैं. इसे सुधारने के लिए सही वजन होना, पर्याप्त नींद, तनाव प्रबंधन और शराब-तंबाकू से दूरी जरूरी है. एक्सपर्ट का सुझाव है कि कोई भी सप्लीमेंट शुरू करने से पहले मेडिकल इवैल्यूएशन जरूर कराएं. एक डॉक्टर आपकी पोषण संबंधी जरूरतों का आकलन कर सकता है. अगर आप किसी भी तरह का प्रोटीन सप्लीमेंट यूज करना चाहते हैं, तो पहले डॉक्टर से मिलें. अगर एक्सपर्ट की सलाह पर सप्लीमेंट चुनेंगे, तो सेहत को नुकसान नहीं होगा और सेहत में सुधार हो जाएगा.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें



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