डॉक्टर भगवान, लेकिन तीमारदारों की पिटाई से परेशान, गुस्साए परिजन करने लगते हैं हिंसा, सांसदों ने जताई चिंता


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Violence Against Doctors: देश में बड़ी संख्या में डॉक्टर शारीरिक और मानसिक दुर्व्यवहार का शिकार हो रहे हैं. इनमें 48% मामलों की रिपोर्ट तक नहीं होती है. बीजेपी सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने राज्यसभा में डॉक्टर्स के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने बताया कि उन्होंने दिल्ली, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में यह स्थिति गंभीर है.

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देशभर में डॉक्टर्स के खिलाफ हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं.

Violence Against Doctors: देश में डॉक्टर्स को भगवान का रूप माना जाता है, लेकिन जब किसी मरीज की मौत हो जाती है, तब गुस्साए परिजन डॉक्टर्स के मारपीट और हॉस्पिटल में तोड़फोड़ करने लगते हैं. हर साल ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जहां डॉक्टर्स पर गुस्साए तीमारदार हमला कर देते हैं. हाल के एक राष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार पिछले साल करीब 7.9 प्रतिशत डॉक्टर्स को किसी न किसी प्रकार की हिंसा या दुर्व्यवहार का सामना किया है, जबकि लगभग 3.9 प्रतिशत मामलों में शारीरिक हमले भी हुए. इन हमलों में डॉक्टर्स को चोट पहुंचाने की कोशिश की गई. उनके अस्पताल या क्लिनिक में तोड़फोड़ भी की गई. इतना ही नहीं, अस्पताल में मौजूद मेडिकल उपकरणों को भी क्षति पहुंचाई गई.

सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस प्रकार की लगभग 48 प्रतिशत घटनाओं की रिपोर्ट ही नहीं की जाती, क्योंकि डॉक्टर्स का प्रशासनिक व्यवस्था पर विश्वास कम होता जा रहा है. यह जानकारी बीजेपी के राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने मंगलवार को राज्यसभा में दी. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में मरीजों के परिजनों द्वारा मारपीट, तोड़फोड़ और चिकित्सकों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आई हैं. यह समस्या अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों के नर्सिंग होम्स तक भी फैल चुकी है. कई बार मरीज के परिजनों के असंतोष के कारण चिकित्सकों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है, जिससे इलाज की व्यवस्था भी प्रभावित होती है.

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बीजेपी सांसद ने कहा कि अगर हम दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो 2021 से 2025 के बीच ऐसी 149 घटनाएं सामने आई हैं. यह संख्या चिंताजनक रही है. 2024 में 49 और 2025 में 48 ऐसे मामले दर्ज किए गए हैं. पिछले कुछ वर्षों में अविश्वास के कारण डॉक्टर्स और मरीजों के बीच तनाव बढ़ा है और अस्पतालों में हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. ऐसी घटनाएं डॉक्टर और मरीज के बीच के विश्वास को कमजोर करती हैं और स्वास्थ्य सेवाओं के पूरे वातावरण को असुरक्षित बना देती हैं. राज्यसभा सांसद ने इसे एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील विषय बताया और कहा कि डॉक्टर्स, स्वास्थ्यकर्मियों और मरीजों यानी सभी के हितों की रक्षा की जाए.

उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि राज्य स्तर पर सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक अपील समिति गठित की जाए. जिला स्तर पर जिला जज की अध्यक्षता में डॉक्टर-मरीज सुरक्षा समन्वय समिति का गठन किया जाए. यहां आने वाले सभी मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए. ऐसा करना इसलिए आवश्यक है, ताकि डॉक्टर निडर होकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें और मरीजों व उनके परिवारों को भी समय पर न्याय मिल सके.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें



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