कोरबा. हिंदू मास अनुसार चैत्र माह का आरंभ हो गया है, जो दो अप्रैल 2026 दिन गुरुवार तक रहेगा. आयुर्वेद के अनुसार, प्रत्येक माह में विशेष तरह के खानपान का वर्णन किया गया है, जिसे अपनाकर हम स्वस्थ रह सकते हैं. इसी विषय पर छत्तीसगढ़ के ख्यातिलब्ध आयुर्वेद चिकित्सक नाड़ी वैद्य डॉ नागेंद्र नारायण शर्मा ने लोकल 18 को बताया कि भारतीय परंपरा में ऋतुचर्या यानी ऋतुनुसार आहार-विहार करने की परंपरा रही है. यह संस्कार हमें विरासत में मिला है. अभी चैत्र माह का आरम्भ चार मार्च 2026 दिन बुधवार से हो गया है, जो दो अप्रैल 2026 तक रहेगा. इस अंतराल में हमें अपने आहार-विहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए. चैत्र माह में मौसम में बदलाव होता है. वसंत ऋतु अपने चरम पर होती है. चैत्र मास में वसंत ऋतु का अंत और ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत हो जाती है. इस दौरान तापमान धीरे-धीरे बढ़ने लगता है, जिससे गर्मी महसूस होने लगती है. वातावरण गर्म और शुष्क होने लगता है.
उन्होंने कहा कि चैत्र माह में ऋतु परिवर्तन का समय होने के कारण सर्दी, खांसी और बुखार की संभावना भी बढ़ जाती है और कमजोर पाचन शक्ति के कारण अपच, उल्टी और डिहाइड्रेशन जैसी बीमारियां होने की संभावना भी अधिक रहती है. इस मास में हमें विशेष रूप से तैलीय, मसालेदार भारी भोजन, होटल के भोजन आदि से परहेज करना चाहिए. गर्मी बढ़ने के कारण डिहाइड्रेशन की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए पानी का उचित मात्रा में सेवन करना चाहिए. साथ ही चैत्र माह में वातावरण में शुष्कता के कारण आंखों में सूखेपन की समस्या भी बढ़ जाती है, जिससे बचाव के लिए आंखों को समय-समय पर धोना चाहिए और चिकित्सक से परामर्श लेकर आंखों में गुलाब जल डालना चाहिए.
बासी भोजन से करें परहेज
उन्होंने आगे कहा कि चैत्र माह में हल्का, ताजा और आसानी से पचने वाला भोजन करना चाहिए. बासी भोजन से परहेज करना चाहिए. इस मास में गुड़ का सेवन नहीं करना चाहिए. इसका सेवन करने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है. चैत्र माह में चने का सेवन करना स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभकारी है.
चैत्र मास में क्या खाना चाहिए?
अनाज- चना, जौ, ज्वार की खीर, चावल, मक्के की खीर और छिलके वाली मूंग दाल.
फल- अमरूद, अनार, संतरा, सेव, अंगूर और नारियल.
सब्जी- सहजन की फली, हरा धनिया, अदरक, पुदीना, करेला, ककड़ी और लौकी.
मसाले- काली मिर्च, सूखा धनिया, मीठा नीम, अजवाइन, जीरा, मेथी और सौंफ.
क्या नहीं खाना चाहिए?
चैत्र मास में गुड़, नया गेहूं, बाजरा, मक्का, उड़द दाल, कुलथी दाल, राजमा, गाजर, मूली, मटर, फूल गोभी, पत्ता गोभी, बैंगन, मेथी, सरसों का साग, अरबी, आम, आम का रस, पपीता, केला और ज्यादा तेल और मिर्च-मसाले वाले देर से पचने वाले भारी भोजन और बासी भोजन का सेवन कम से कम ही करना चाहिए.





