‘दिल्लीवाले ट्रैक पर थूकते हैं!’ DMRC की बेंगलुरु मेट्रो से तुलना पर सोशल मीडिया में छिड़ी जंग, आपकी क्‍या है राय


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दिल्लीवाले ट्रैक पर थूकते हैं! DMRC और बेंगलुरु मेट्रो पर सोशल मीडिया में जंग

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सोशल मीडिया पर दिल्ली और बेंगलुरु मेट्रो के बीच तुलनात्मक बहस छिड़ गई है. एक यूजर ने दिल्ली मेट्रो कनेक्टिविटी के मामले में बेमिसाल है लेकिन यात्रियों के सिविक सेंस और अनुशासन में कमी दिखती है. वहीं, बेंगलुरु मेट्रो में प्लेटफॉर्म पर गार्ड्स की तैनाती से सुरक्षा नियमों का पालन बेहतर होता है. बहस में लोगों ने दिल्ली की भारी भीड़ और बेंगलुरु में कतार न बनाने जैसी आदतों पर भी सवाल उठाए हैं.

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यूजर्स ने खुलकर अपना रिएक्‍शन दिया.

भारत के दो सबसे बड़े मेट्रो नेटवर्क दिल्ली मेट्रो और बेंगलुरु मेट्रो एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गए हैं. अभिनव नामक एक एक्स यूजर की पोस्ट ने एक ऐसी बहस छेड़ दी है जिसमें हजारों लोग अपनी राय साझा कर रहे हैं. इस पोस्ट में कनेक्टिविटी, क्राउड मैनेजमेंट और यात्रियों के नागरिक व्यवहार की तुलना की गई है. अभिनव ने अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा कि दिल्ली मेट्रो की कनेक्टिविटी वाकई अद्भुत है. दिल्ली के कोने-कोने को जोड़ने वाले इसके विशाल नेटवर्क का कोई मुकाबला नहीं है. इसके विपरीत उन्होंने बेंगलुरु मेट्रो पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वहां फोकस कनेक्टिविटी के बजाय मेट्रो स्टेशनों की बनावट और सुंदरता पर अधिक है.

दिल्‍ली में ट्रैक पर थूक देते हैं लोग
हालांकि, सुरक्षा के मामले में उन्होंने बेंगलुरु की तारीफ की. उन्होंने बताया कि बेंगलुरु के हर प्लेटफॉर्म पर दो सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि कोई पीली रेखा पार न करे. अभिनव के अनुसार दिल्ली में भी ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए क्योंकि वहां सिविक सेंस की भारी कमी है. उन्होंने लोगों द्वारा मेट्रो ट्रैक पर थूकने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाओं पर भी दुख जताया.

सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
इस पोस्ट को अब तक 20,000 से अधिक व्यूज मिल चुके हैं और दिल्ली-बेंगलुरु के यात्रियों ने इस पर अपनी तीखी और रोचक प्रतिक्रियाएं दी हैं:

· सुरक्षा बलों की उपस्थिति: कई यूजर्स ने दिल्ली का बचाव करते हुए कहा कि दिल्ली मेट्रो में CISF और CRPF के जवान तैनात रहते हैं. एक यूजर ने लिखा, “दिल्ली में भीड़ इतनी अधिक होती है कि गार्ड्स नजर ही नहीं आते जबकि नए स्टेशनों पर उनकी तैनाती अनिवार्य है.”

· कनेक्टिविटी और इंटरचेंज: एक यात्री ने दिल्ली मेट्रो के इंटरचेंज पॉइंट्स (जैसे कश्मीरी गेट या राजीव चौक) की तारीफ करते हुए कहा, “मैं दिल्ली के इंटरचेंज की संख्या देखकर हैरान हूं, जबकि बेंगलुरु में फिलहाल मुख्य रूप से दो ही प्रमुख इंटरचेंज हैं.”

· नागरिक व्यवहार : बहस केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रही. बेंगलुरु के एक नियमित यात्री ने कहा, “बेंगलुरु में भी लोग कम नहीं हैं. ट्रेन आते ही वे गेट के ठीक सामने खड़े हो जाते हैं और उतरने वालों को रास्ता देने के बजाय पहले अंदर घुसने की कोशिश करते हैं.”



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