दिल्ली-कोलकाता, मुंबई या चेन्नई…सबसे अधिक सेफ ट्रैक कौन? किस रूट में आप ज्यादा सुरक्षित, रेलवे का खुलासा


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दिल्‍ली से मुंबई, कोलकाता, चेन्‍नई या दूसरे प्रमुख रूट में सबसे ज्‍यादा सेफ कौन सा रूट है? यानी आप किस रूट पर सबसे ज्‍यादा सुरक्षित हो सकते हैं. यह खुलासा भारतीय रेलवे ने की है, जिसमें कवच 4.0 के सबसे ज्‍यादा कमीशन की बात कही गयी है. यह रूट पश्चिम रेलवे के तहत आएगा.

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कवच 4.0 के लगाने के बाद मानवीय भूल की आशंका खत्‍म हो जाती है.

नई दिल्‍ली. दिल्‍ली से मुंबई, कोलकाता, चेन्‍नई या दूसरे प्रमुख रूट में सबसे ज्‍यादा सेफ कौन सा रूट है? यानी आप किस रूट पर सबसे ज्‍यादा सुरक्षित हो सकते हैं. यह खुलासा भारतीय रेलवे ने की है, जिसमें कवच 4.0 के सबसे ज्‍यादा कमीशन की बात कही गयी है. यह रूट पश्चिम रेलवे के तहत आएगा. भारतीय रेलवे यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है, इसके लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं.

रेलवे द्वारा देशभर में अलग अलग रूटों पर हादसों को रोकने के लिए कवच 4.0 लगाया ज रहा है. चाहे दिल्‍ली मुंबई हो, दिल्‍ली कोलकाता, दिल्‍ली चेन्‍नई या दूसरे रूट हो. पर 30 मार्च को पश्चिम रेलवे में वडोदरा – नागदा सेक्शन पर कवच 4.0 सिस्टम को सफलतापूर्वक कमीशन किया गया. इस प्रकार मिशन रफ़्तार के अंतर्गत मुंबई – नई दिल्ली मुख्य के पश्चिम रेलवे के निर्धारित 693 रूट किलोमीटर में से 559.5 रूट किलोमीटर पर यानी अधिकतम रूट पर इस तकनीक को स्थापित किया जा चुका है. यानी यह रूट को सबसे ज्‍यादा सुरक्षित माना जा सकता है. क्‍योंकि कचव लगने के बाद ट्रेन हादसों की आशंका न के बराबर होगी.

पश्चिम रेलवे के जीएम प्रदीप कुमार के अनुसार वडोदरा – नागदा सेक्शन के तहत वडोदरा से मंगल महुडी सेक्शन (122.5 आरकेएम) और पंचपिपलिया – नागदा (102.01 आरकेएम) सेक्शन के बीच में यानी कुल 224.51 किलोमीटर पर कवच रूट को सफलताापूवर्क को सफलतापूर्वक लांच किया गया है. मंगल महुडी से पंचपिपलिया के बीच इस तकनीक को लगाया जा रहा है और जल्द ही इसे आटोमेटिक सिग्‍लिंग के साथ पूरा कर लिया जायेगा.

रेलवे द्वारा इस वित्तीय वर्ष 2025 -26 में कुल 659.5 रूट किलोमीटर पर कवच तकनीक को लगाया गया है. वडोदरा डिवीजन द्वारा इससे पहले जनवरी 2026 में वडोदरा – विरार सेक्शन पर कवच सिस्टम चालू किया गया था और अब वडोदरा से गोधरा होते हुए नागदा तक इसे कमीशन किया गया है. कवच एक ट्रेन सुरक्षा तकनीक है जो मानवीय गलतियों के जोखिम को कम करने के लिए ट्रेन सुरक्षा को और बेहतर करती है. जिससे मानवीय त्रुटि के कारण ‘सिग्नल पासिंग एट डेंजर’ से होने वाले हादसों को रोका जा सके.

‘कवच’ प्रणाली अपने यूरोपीय समकक्ष की तुलना में बहुत सस्ती है. अभी तक डब्‍ल्‍यूएपी -7, डब्‍ल्‍यूएपी, डब्‍ल्‍यूएपी 5 लोकोमोटिव में कवच प्रणाली लगाई गयी है. जल्द ही, इसे दूसरे लोकोमोटिव पर भी शुरू किया जाएगा.



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