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- दिल्ली उच्च न्यायालय ने पतंजलि की कोविड दवा के दावों के खिलाफ डॉक्टरों की याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा
नई दिल्ली3 मिनट पहले
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2021 में प्रोफेसर्स एसोसिएशन ने बाबा बिल्डर्स, उनके सहयोगी बालकृष्ण और जापान के आयुर्वेद के खिलाफ यह पदयात्रा की थी।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्यूक्लॉइक और बाबा बिल्डरों के वकीलों के खिलाफ कई एसोसिएशनों की ओर से अपना निर्णय सुरक्षित रखा है। आरोपियों ने यह याचिका कोरोना को लेकर पंतजलि आयुर्वेद के खिलाफ दायर की थी। बाबा निर्माता ने कहा था कि कोरोनिल सिर्फ इम्युनिटी बूस्टर नहीं बल्कि कोविड-19 को ठीक करने की दवा है। ।।
2021 में प्रोफेसर्स एसोसिएशन ने बाबा बिल्डर्स, उनके सहयोगी बालकृष्ण और जापान के आयुर्वेद के खिलाफ यह पदयात्रा की थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म्स से कोरोनिल से जुड़े वृत्तचित्रों को हटाने की मांग की गई थी।

अपील की याचिका में अपील- कोरोनिल को इम्युनो बूस्टर का लाइसेंस मिला था
पॉप की तरफ से रिलीज केस के मुताबिक, रामदेव ने कोरोनिल को कोविड की दवा बताते हुए कई दावे किए थे। जबकि, उन्हें कोरोनिल के लिए सिर्फ इम्यूनो-बूस्टर होने का लाइसेंस मिला था। डॉक्टर की तरफ से वकील ने यह मांग भी की कि पतंजलि आयुर्वेद और बाबा रामदेव को भविष्य में ऐसे बयान देने से रोकने के लिए निर्देश देने की भी मांग की।
बिल्डरों के वकील ने कहा कि क्रिटिकल वकील को लेकर पंतजलि ने सुप्रीम कोर्ट में जो बयान दर्ज कराया है, उसमें वे एक सहयोगी हैं और उन लॉकर्स को डबल किया जा सकता है।
इस पर पीसीसी के वकील ने कहा कि पंतजलि ने सुप्रीम कोर्ट में यह वादा किया था कि वे बिना सोचे समझे ऐसे बयान नहीं देंगे, जो कानून के मुताबिक न हों। कोरोनिल का मामला उस ममाले से अलग है, इसलिए इस मामले में सर्वोच्च को फैसला सुनाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने ग़ैरक़ानूनी विज्ञापन केस में फैसला सुरक्षित रखा

14 मई की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट से बाहर के मुर्गे योग गुरु बाबा निर्माता और मंडल के बाल शिक्षण संचालककृष्ण।
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने 14 मई को क्रिएट एड केश में योग गुरु स्टूडियो, आचार्य बालकृष्ण और केनेल आयुर्वेद को ऑफर जारी कर फैसला सुरक्षित रखा था। साथ ही दोनों को पर्सनल पेशी से छूट दी गई थी। जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानसाबे की पीठ ने 3 सप्ताह के लिए कुणाल आयुर्वेद को फिडेविट फाइल करने के लिए कहा था।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष डॉ. आरवी अशोकन ने कहा- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ठीक है, लेकिन कभी-कभी इंसान का संयम भी देखने को मिलता है। आप गवाह पर कोर्ट के बारे में कुछ भी नहीं कह सकते। यदि दूसरा पक्ष इस प्रकार की टिप्पणी करता है तो आप क्या करें? आप रेसकर कोर्ट पहुंचें। अशोकन ने बिना शर्त छूट दी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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पंतजलि की दवाओं के लाइसेंस पर लगा प्रतिबंध हटा:उत्तराखंड सरकार ने 14 उत्पादों का लाइसेंस रद्द किया था; समिति की रिपोर्ट के बाद आदेश दिया गया

उत्तराखंड सरकार ने अपने उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें पतंजलि आयुर्वेद और दिव्य शीट के 14 उत्पादों का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। 17 मई को राज्य सरकार ने अस्थायी तौर पर यह आदेश दिया।
एक उच्च स्तरीय समिति की ओर से प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पेश करने के बाद सरकार ने अपने आदेश पर रोक लगा दी है। उत्तराखंड सरकार के आयुष मंत्रालय के सचिव पंकज कुमार पांडे ने एक ऑर्डर में इस बात की जानकारी दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
