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- एनडीए की 149वीं पासिंग आउट परेड में बागेश्वर के दीपक कांडपाल ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि बदायूं की सिद्धि जैन कांस्य पदक जीतने वाली पहली महिला कैडेट बनीं। एनडीए की 149वीं पासिंग आउट परेड
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रविवार को नेशनल डिफेंस एकेडमी ऑफ आर्ट्स एनडीए के 149वें कोर्स की पासिंग आउट परेड हुई। ये परेड पुणे के खड़कवासला के खेत्रपाल परेड ग्राउंड में हुई।
इससे पहले शनिवार को कन्कनेक्शनवो सेरेमनी हुई थी जिसमें 328 एनडीएस एनडीए से पास हुए हैं। यहां से पास होने वाले हैं भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना के नौसेना अधिकारियों के पद। परेड का नेतृत्व सिद्धार्थ सिद्धार्थ सिंह ने किया।
इनमें से 328 नक्षत्रों में से 216 नक्षत्रों ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से बैचलर्स डिग्री हासिल की है। इनमें 72 कैडेट्स साइंस रिलेशन, 92 कम्प्यूटर साइंस रिलेशन और 52 कम्प्यूटर साइंस रिलेशन शामिल हैं। इसके अलावा पड़ोसी और मित्र देशों के अलावा आने वाले 18 कैडेटों ने भी कई डिग्री हासिल की है।

बीटेक करने वालों को एक साल बाद डिग्री
बीटेक करने वाले नेवी और एयरफोर्स के 112 कैडेट्स को 3 साल का कोर्स पूरा करने का मौका दिया गया है। उन्हें अपनी-अपनी अकादमी में एक साल की ट्रेनिंग और करनी होगी। इसके बाद उन्हें बीटेक की डिग्री दी जाएगी। कैडेट्स को एजिमाला की इंडियन नेवल एकेडमी और हैदराबाद की एयरफोर्स एकेडमी जाएगी।
नेवी प्रमुख को मुख्य अतिथि बनाया गया
नेवी चीफ एडमिरल दिनेश के दौरान पासिंग आउट परेड के दौरान। त्रिमूर्ति पासिंग आउट परेड में मुख्य अतिथि विशेष रूप से शामिल हुए। उन्होंने कहा, ‘एनडीए से कोचिंग वाली महिला कैडेट्स का यह दूसरा बच्चा है।’ वो हमारे पुरुष कलाकारों के साथ कंधे से कंधा ऊंचाई पर खड़े हुए हैं। खिलौनों के बजाय अपना कर्तव्य पर ध्यान दें। ‘मैं यही चाहता हूँ कि आपका दस्तावेज़ आपकी योग्यता पर निर्भर न हो, आपका कर्तव्य आपको निर्धारित करता है।’
एनडीए से महिला कैडेट्स का पहला बैच इसी साल मई में पास आउट हुआ था। 2021 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यूपीएससी ने एनडीए में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी।
ड्राइवर के बेटे ने जीता गोल्ड मेडल

उत्तराखंड के बागेश्वर में रहने वाले दीपक कांडपाल को आउट परेड के दौरान स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। उनके पिता जीवल चंद्र कांडपाल ग्रेजुएट्स हैं और उनकी मां गीता कांडपाल गृहिणी हैं। परिवार बागेश्वर के दूत का रहने वाला है। सभी पास के गरुड़ जंक्शन में एक किराए के कमरे में रहते थे। प्रतिकूल दीपक ने 8वीं तक की पढ़ाई की।
इसके बाद 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई दीपक के आशिक गागरीगोल के जवाहर नवोदय विद्यालय में हुई। 12वीं में वे जिले में शीर्ष पर भी पहुंचे। आगे की पढ़ाई के लिए दीपक दिल्ली चले आए और दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की पढ़ाई करने लगे। इसके साथ-साथ एनडीए की कोचिंग भी। साल 2022 में दीपक का आशिक एनडीए में हुआ।
सिद्धी जैन के माता-पिता शिक्षक हैं

उत्तर प्रदेश के सुपरस्टार की रहने वाली सिद्धी जैन की मां तृप्ति जैन और पिता निखिल कुमार जैन टीचर हैं। घर में पढ़ाई-लिखाई का मनोबल हमेशा बना रहता है लेकिन परिवार में कोई मकान मालिक या व्यक्ति कोई काम नहीं करता।
सिद्धी जैन को प्रेसिडेंशियल ब्रॉन्ज़ मेडल से सम्मानित किया गया है। ये सम्मान पाने वाली वो पहली महिला कैडेट हैं।
एनडीए में जाने के लिए सबसे पहले सिद्धी जेईई की तैयारी कर रही थी। उनकी अच्छी रैंक भी आई लेकिन सिद्धार्थी ने सेना में जाने का फैसला लिया। एनडीए से पास आउट के बाद वो अब हैदराबाद की एयरफोर्स एकेडमी में शामिल होंगे जहां उनकी आगे की एक साल की ट्रेनिंग होगी।
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