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टाटा संस के चंद्रशेखरन के तीसरे टर्म पर फैसला टला:मीटिंग में चेयरमैन बोले- ट्रस्ट-बोर्ड में तालमेल जरूरी; नोएल टाटा ने कार्यकाल बढ़ाने के लिए रखीं 4 शर्तें

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टाटा की बोर्ड मीटिंग में मंगलवार को सुपरस्टार एन चंद्रशेखरन के तीसरे पद को लेकर हुई चर्चा बेनतीजा रही। समूह के दौरान उभरने के बाद खुदा चन्द्रशेखर ने अपना पद बढ़ाने के प्रस्ताव को टालने की बात कही। उन्होंने कहा कि टाटा ग्रुप सबसे अच्छा काम करता है जब टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के फैसले एक समान हैं। नोएल टाटा ने नए बिजनेस के बीच ग्रुप के कुछ नए बिजनेस में हो रही दोस्ती का जिक्र किया। उन्होंने इस पर विस्तार से चर्चा की मांग की। हालाँकि, बोर्ड के अन्य निदेशकों ने चन्द्रशेखरन का समर्थन करते हुए कहा कि ये हैशटैग ‘ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स’ (नए शुरू किए गए प्रोजेक्ट्स) से जुड़े हुए हैं। ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स को लॉन्च करने में थोड़ा समय लगता है और यह पहले से तय योजना का हिस्सा है। नोएल टाटा के 4 आरक्षणों के बारे में माना जा रहा है कि टाटा के विश्वासपात्रों के अनुसार नोएल टाटा चन्द्रशेखर नेन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने के लिए चार प्रमुख आरक्षणों को आगे बढ़ाया है: चन्द्रशेन को जून में आरक्षित स्थान से छूट मिलनी चाहिए एन चन्द्रशेन इस साल जून में 63 साल के हो जायेंगे। टाटा के बेसिक के मुताबिक, नॉन-एग्जीक्युटिव के लिए ग्राहकों की उम्र 65 साल तय है। यदि उनका कार्यकाल फरवरी 2027 के बाद भी आगे बढ़ता है, तो इसके लिए बोर्ड को एक विशेष रिज़ोल्यूशन पास करना होगा और भर्ती में छूट दी जाएगी। निर्देशकों ने की वोट के प्रस्ताव, स्मिथ ने ताला निर्णय बोर्ड के पुनर्नियुक्ति समिति के प्रमुख एंटोनियो जॉर्ज चन्द्रशेखर नेन के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने तर्क दिया कि नए प्रोजेक्ट्स में शुरुआती कमाई सामान्य बात है। चर्चा के बाद जब कुछ निर्देशकों ने इस मुद्दे पर वोटिंग वॉल्यूम का प्रस्ताव दिया, तो चन्द्रशेखरन ने इसे खुद ही टालने की सलाह दे दी। उनका मानना ​​है कि टाटा संस और मुख्य शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स के बीच पूर्ण सहमति समूह के भविष्य के लिए जरूरी है। टाटा समूह में विवाद, सरकार को टाटा ट्रस्ट के निधन के बाद अक्टूबर 2024 में उनके सौतेले भाई नोएल टाटा को ट्रस्ट का ट्रस्ट बनाया गया। वहीं नवंबर 2024 में नोएल कोटा संस के बोर्ड में भी शामिल हुआ। लेकिन कई मीडिया एनोटेशन में यह दावा किया गया है कि यह निर्णय ट्रस्ट के अंदर एकमत नहीं था। इससे टाटा ट्रस्ट्स को कंट्रोल करने वाले बोर्ड सीट को लेकर सीधी-सीधा बंटवारा हो गया। एक गुट बोर्ड सदस्य नोएल टाटा के साथ है, तो दूसरा गुट मेहली मिस्त्री के साथ। मिस्त्री का कनेक्शन शापूरजी पल्लोनजी फैमिली से है जिसका टाटा संस में 18.37% स्टॉक है। सांता की बोर्ड सीट को लेकर हुआ विवाद 7 अक्टूबर को सीनियर लीडरशिप ने अमित शाह के घर पर 45 मिनट की बातचीत की। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने कहा कि घरेलू बालों को तुरंत लिया जाए, ताकि कंपनी पर असर न हो। जमात-ए-इस्लाम में वित्तमंत्री शाह, टाटा संस के अमीर एन चन्द्रशेखरन और ट्रस्टी डेरियस खांबाटा शामिल हैं। टाटा ग्रुप में 66% टाटा संस की स्थापना जमशेदजी टाटा ने 1868 में की थी। यह भारत की सबसे बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी है, 10 अलग-अलग बिजनेस में अपने 30 बिजनेसमैन दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में बिजनेस करती है। टाटा टाटा मोटर्स की एजेंसी और प्रोमोटर है। टाटा के 66% प्राइवेट कल शेयर कैपिटल टाटा के चैरिटेबल ट्रस्ट के पास हैं, जो एजुकेशन, हेल्थ, आर्ट एंडचर और लाइवलीहुड जेनरेशन के लिए काम करते हैं। 2023-24 में टाटा ग्रुप की सभी कंपनियों का कुल राजस्व 13.86 लाख करोड़ रुपये था। इससे 10 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। इसके उत्पाद सुबह से शाम तक हमारी जिंदगी में शामिल हैं। कंपनी चाय पत्ती से लेकर घड़ी, कार और मनोरंजन बाजार है।



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