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पिथौरागढ़: पहाड़ी सफेद भट्ट दुधारू जानवरों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसे भिगोकर पीसकर चारे में मिलाकर खिलाया जाता है, जिससे दूध की मात्रा बढ़ती है और जानवर स्वस्थ रहते हैं. इसमें प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्व भरपूर होते हैं. यह सस्ता, प्राकृतिक और पारंपरिक तरीका है, जो पशुओं की ताकत और सेहत दोनों को बेहतर बनाता है.
सफेद भट्ट एक तरह की दाल या बीज होता है, जो पहाड़ी क्षेत्रों में उगाया जाता है. यह दिखने में सफेद या हल्के क्रीम रंग का होता है. इसे खासतौर पर पशुओं के चारे में मिलाकर दिया जाता है. यह सामान्य दालों की तरह ही होता है, जो इंसान भी खाते है. लेकिन, इसके पोषक तत्व इसे खास बनाते हैं. पहाड़ी लोग इसे सालों से अपने पशुओं को खिलाते आ रहे हैं.

गृहणी भावना जी लोकल 18 से बात करते हुए बताती है कि सफेद भट्ट को सीधे नहीं खिलाया जाता. इसे खिलाने का एक खास तरीका होता है, जिससे इसका पूरा फायदा जानवरों को मिल सके. सबसे पहले भट्ट को कुछ घंटों या रात भर पानी में भिगोया जाता है, इसके बाद इसे अच्छी तरह पीस लिया जाता है, फिर इसे गाय या भैंस के चारे (दाना/दले) में मिलाकर दिया जाता है.
यह तरीका इसलिए अपनाया जाता है ताकि भट्ट आसानी से पच सके और उसके सारे पोषक तत्व शरीर में अच्छे से अवशोषित हो जाएं.

दुधारू जानवरों के लिए सबसे बड़ी जरूरत होती है सही पोषण. अगर उन्हें संतुलित और पौष्टिक आहार मिले, तो उनका दूध भी बढ़ता है और गुणवत्ता भी बेहतर होती है. सफेद भट्ट में प्रोटीन और ऊर्जा की अच्छी मात्रा होती है, जो दूध की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है, दूध की गुणवत्ता सुधारता है और जानवर को ताकत देता है. इसी वजह से पहाड़ों में इसे “नेचुरल दूध बढ़ाने वाला आहार” माना जाता है.
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सिर्फ दूध ही नहीं, सफेद भट्ट जानवरों की ओवरऑल हेल्थ के लिए भी बहुत अच्छा होता है. इसके बहुत से फायदे है जैसे ये शरीर को मजबूत बनाता है, कमजोरी दूर करता है, पाचन तंत्र को बेहतर करता है और बीमारी से लड़ने की ताकत बढ़ाता है. जो जानवर नियमित रूप से भट्ट खाते हैं, वे ज्यादा एक्टिव और स्वस्थ रहते हैं.

पहाड़ी लोग सदियों से प्राकृतिक चीजों पर भरोसा करते आए हैं. सफेद भट्ट भी उन्हीं में से एक है. यह सिर्फ एक चारा नहीं, बल्कि अनुभव से साबित हुआ एक घरेलू उपाय है. गांवों में बुजुर्ग भी बताते हैं कि जब से उन्होंने अपने पशुओं को भट्ट खिलाना शुरू किया, तब से उन्हें दूध की मात्रा में फर्क दिखा, जानवर कम बीमार पड़े और पशुओं की ताकत बढ़ी. यह ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता आ रहा है.

हालांकि सफेद भट्ट बहुत फायदेमंद है, लेकिन इसे सही मात्रा और तरीके से देना जरूरी है. ज्यादा मात्रा में न दें, दिन में केवल एक बार. हमेशा भिगोकर और पीसकर ही खिलाएं, संतुलित आहार के साथ ही इस्तेमाल करें. अगर सही तरीके से दिया जाए, तो इसका पूरा लाभ मिलता है.





