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Coronavirus Vaccine Side Effects; Bharat Biotech Covaxin | PM Modi | भारत बायोटेक की कोवैक्सिन के भी साइड इफेक्ट्स का दावा: टीनएजर्स-एलर्जिक को हो सकती हैं दिक्कतें, स्टडी में सांस-स्किन की समस्याएं सामने आईं

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2 मिनट पहले

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भारत बायोटेक ने कोवैक्सिन बनाया है।  देश में इसके 36 करोड़ डोज मौजूद हैं।  - दैनिक भास्कर

भारत बायोटेक ने कोवैक्सिन बनाया है। देश में इसके 36 करोड़ डोज मौजूद हैं।

एक अध्ययन में सामने आया है कि भारत बायोटेक की कोरोना वैक्सीन- कोवैक्सिन के भी साइड इफेक्ट्स हैं। स्प्रिंगर लिंक में प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट के अनुसार, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में हुई स्टडी में भाग लेने वाले लगभग एक लोगों में कोवैक्सिन के दुष्प्रभाव देखे गए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि रेनॉ ने टीनेजर्स को खास तौर पर टीनएजर्स और किसी भी तरह की एलर्जी का सामना कर लोगों को कोवैक्सिन से खतरा बताया है। हालांकि कुछ दिन पहले कोवैक्सिन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने कहा था कि उनकी बनाई गई वैक्सीन सुरक्षित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कोवैक्सिन की दो खुराकें मंगवाईं.

पीएम नरेंद्र मोदी ने 1 मार्च 2021 को कोवैक्सिन की पहली खुराक ली थी।

पीएम नरेंद्र मोदी ने 1 मार्च 2021 को कोवैक्सिन की पहली खुराक ली थी।

पीएम मोदी ने 8 अप्रैल 2021 को कोवैक्सिन की दूसरी खुराक ली थी.

पीएम मोदी ने 8 अप्रैल 2021 को कोवैक्सिन की दूसरी खुराक ली थी.

लोगों में सांसरिक एसोसिएटेड इंफेक्शन बढ़ रहा है
अध्ययन करने वाली शहंशाह शुभ्रा किरण ने कहा, “एक साल में वैक्सीन लगाने वाले लोगों का डेटा एकत्र किया गया। अध्ययन में 1,024 लोग शामिल हुए। इनमें 635 किशोर और 291 वयस्क शामिल थे।”

अध्ययन के अनुसार, 304 (47.9%) और 124 (42.6%) आर्किटेक्चर में सांस संबंधी इंफ़ेक्शन (अपर रेस्पिरेटरी इंफ़ेक्शन) देखा गया। इससे जुड़े लोगों में सर्दी, खांसी जैसे हालात देखे गए।

अध्ययन में त्वचा से संबंधित रोग संबंधी आकलन किया गया
अध्ययन में पाया गया कि भाग लेने वाले टीनेजर्स में त्वचा से जुड़े विकार (10.5%), नर्वस सिस्टम से जुड़े विकार (4.7%) और सामान्य विकार (10.2%) देखे गए। वहीं, रेखीय में सामान्य विकार विकार (8.9%), अस्थि-पंजर से जुड़े विकार (5.8%) और तंत्रिका तंत्र से जुड़े विकार (5.5%) देखे गए।

4.6% किशोरों में मासिक धर्म असंवैधानिक असामान्यताएं (नियमित असामान्यताएं) देखें। डेफ़र्ट में आँखों से जुड़ी असामान्यताएँ (2.7%) और हाइपोथायरायडिज़्म (0.6%) भी देखी गईं।

गुलियन बेरी सिंड्रोम (जीबीएस) भी हो सकता है
कोवैक्सिन के साइड इफेक्ट्स पर अध्ययन में 0.3% वैक्सीन में स्ट्रोक और 0.1% वैक्सीन में गुलियन बेरी सिंड्रोम (जीबीएस) की पहचान हुई। जीबीएस एक ऐसी बीमारी है जो लकवे की ही तरह शरीर के बड़े हिस्से को धीरे-धीरे निशक्त कर देती है। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर (एनआईएनडीएस) के अनुसार, गुलियन बेरी सिंड्रोम (जीबीएस) एक रेयर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्टडी में पार्ट लेने वाले जिन टीनएजर्स और फिल्म को पहले से कोई एलर्जी नहीं थी और सब कुछ के बाद टाइ पार्टिमन ने उन्हें खतरनाक बना दिया था।

भारत बायोटेक ने कहा- कोवैक्सिन से किसी बीमारी का मामला सामने नहीं आया
2 मई को कंपनी ने कहा था कि कोवैक्सिन की सुरक्षा का आकलन देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने किया था। कोवैक्सिन के निर्माण से लेकर अब तक इसकी आंशिक निगरानी की जा रही थी। कोवैक्सिन के ट्रायल से जुड़े सभी अध्ययन और स्टडीज फॉलो-अप एक्टिविटीज से कोवैक्सिन का सबसे बेहतरीन ऑस्ट्रिया रिकॉर्ड सामने आया है। अब तक कोवैक्सिन को लेकर ब्लड क्लॉटिंग, थ्रोम्बोसाइटोपिनिया, टीटीएस, वीआईटीटी, पेरीकार्डिकल्चर, मायोकार्डलिसिस जैसे किसी भी बीमारी का कोई मामला सामने नहीं आया है।

कंपनी ने कहा था कि अनुभवी इनोवेटर्स और उत्पाद निर्माता के तौर पर भारत बायोटेक की टीम ने कहा था कि कोरोना वैक्सीन का असर कुछ समय के लिए हो सकता है, पर मरीज की सुरक्षा पर असर जीवनभर रह सकता है। यही कारण है कि हमारी सभी वैक्सीन पर हमारा सबसे पहला फोकस रहता है।

कोविशील्ड को लेकर विवाद
कोवीशील्ड को लेकर विवाद चल रहा है कि इसके इस्तेमाल से कुछ केस में लोगों को थ्रोम्बोसिस थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम यानी टीटीएस हो सकता है। इस बीमारी से शरीर में खून के थक्के जम जाते हैं और प्लेट प्लेट की संख्या गिर जाती है। स्ट्रोक हार्ट और बीट थम्ने जैसे गंभीर खतरे हो सकते हैं।

असल में, भारत में सबसे पहली कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड है। इसे पुणे की मस्जिद इंस्टीट्यूट ने बनाया है। कोवीशील्ड फॉर्मूला ब्रिटिश दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका से लिया गया है। एस्ट्राजेनेका ने अब ब्रिटिश अदालत में माना कि उनके टीके के गंभीर दुष्प्रभाव हैं।

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जब ब्रिटेन में कोविड की वैक्सीन कोविशील्ड लॉन्च की गई तो ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इसे ‘ब्रिटिश विज्ञान की जीत’ बताया था। भारत में भी सबसे पहले और सबसे बड़ी इसी कोवीशील्ड की 175 करोड़ खुराकें अब तक जारी की जा चुकी हैं। इस वैक्सीन को लेकर अब बड़ा खुलासा हुआ है। कोवीशील्ड वैक्सीन बनाने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका ने यूके की अदालत में दिए गए बयान में माना है कि इस वैक्सीन से शरीर के किसी भी हिस्से में खून से लथपथ ‘दुर्लभ दुष्प्रभाव’ हो सकते हैं। पढ़ें पूरी खबर…

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