-0.2 C
New York

Congress INDIA Alliance Meeting LIVE Updates; Rahul Gandhi Sharad Pawar | Uddhav Thackeray – Mallikarjun Kharge | I.N.D.I.A ब्लॉक: संजय राउत बोले- मोदी और उनकी पार्टी के पास बहुमत नहीं, वे अस्थिर सरकार देना चाहते हैं

Published:



29 मिनट पहले

  • लिंक

मोदी की तीसरी कसम… चौथा अंक ही सच है!

भाजपा (UBT) के मुखपत्र सामना ने अपने संपादकीय में पीएम मोदी और भाजपा पर छापना आसान है। सामना ने लिखा- कांग्रेस चुनाव के दिनों में नरेंद्र मोदी और उनकी बीजेपी की फजीहत हुई है। जनता ने उन्हें लगभग सत्ता से बाहर कर दिया है। यह खींचते समय लोगों ने सभ्यता और संस्कृति का परिचय दिया है। इसका सार्वभौमिक लाभ मोदी उठा रहे हैं।

भारतीय जनता पार्टी को सरकार बनाने के लिए साधारण बहुमत भी नहीं मिला। उनकी भटकती आत्मा 240 पर ही लटकती हुई दिख रही है। फिर भी मोदी ने बहुमत देने के लिए जनता को धन्यवाद दिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने मोदी को जमीन पर ला दिया और कहा, ‘मेरी मां की मृत्यु के बाद यह मेरा पहला चुनाव है।’ आखिरकार, मोदी ने स्वीकार कर लिया कि वे आसमान से नहीं गिरे हैं, बल्कि किसी भी अन्य ईश्वर इंसान की तरह अपनी मां के गर्भ से पैदा हुए हैं।

मोदी के पास ये कहने के अलावा कोई चारा नहीं है। क्योंकि उनके देवत्व, अवतार और बाबागीरी का मुखौटा काशी नगरी में ही लोगों ने नोचकर उतारा है। मोदी ने यह घोषणा अपनी हार स्वीकार कर ली है कि वह अब अपने ‘ब्रांड’ की यानी मोदी सरकार नहीं, बल्कि ‘रालोआ’ की सरकार बना रहे हैं। ‘मोदी सरकार’, ‘मोदीहोत’, ‘मोदी है तो मुमकिन है’, ‘मोदी तो भगवान है’ जैसी कल्पनाओं को इस नतीजों ने ‘कूट दान’ का रास्ता दिखाया।

अगर मोदी सरकार भी कुछ बना रही है तो उनकी तस्वीर एक विख्यात चित्र होगी। पूरे शरीर में फ्रैक्चर और प्लास्टर लपेटे हुए मोदी, नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू की बैसाखी के लिए चल रहे हैं। उन बैसाखियों के भरोसे ही उन्हें सरकार चलाना होगी। ये बैसाखी भी क्या अंत तक साथ देगी, इसकी कोई होनी नहीं है।

कहा जा रहा है कि मोदी की भाजपा ने 240 आत्महत्याएं की हैं। इस आंकड़े में भी हेराफेरी है। भारत का शो 291 का किरदार निभा रहा है। इस तरह तीसरी बार शपथ लेने के लिए मोदी ने भले ही राष्ट्रपति भवन में बहुमत का पेपर पेश किया हो, लेकिन वह पेपर और उस पर बहुमत का आंकड़ा उनका ‘एम.ए.’ इन अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति विज्ञान की डिग्री के समान रहस्यमयी होगा।

मोदी के पास अपना बहुमत नहीं है और बैसाखी का बहुमत मोदी की अभिमानी प्रकृति के अनुकूल नहीं है। इसीलिए भारत की जनता ने बहुत अधिक मोदी को सत्ता से हटाने का संदेश दिया है। आपका काम हो चुका है। बेवजह देर न करें और खुद की ज्यादा बेइज्जती न करवाएं, पर मोदी और शाह महाशय की ‘सभ्यता’ और ‘संस्कृति’ इन दो महान हिंदू शब्दों से कोई संबंध न पड़ा हो, इसलिए अब मोदी की सरकार नहीं है, तो एनडीए की सरकार बनाए जाने की घोषणा वह की है।

अगर ऐसा हुआ तो मोदी को कई बैसाखियों के नियमों-शर्तों पर काम करना होगा। मोदी अब तक राष्ट्र आदि को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन काशी के भगवान ने प्रभु श्रीराम को उनके अहंकार को खत्म करने के लिए राष्ट्र के चरणों में ला दिया। इस बार मोदी को राम नहीं मिले। क्योंकि श्रीराम अहंकार के शत्रु हैं और उन्होंने अहंकार को हराकर अयोध्या में रामराज्य की स्थापना की।

वाराणसी में प्रचार खत्म होते ही मोदी ने 10 मिनट के साथ साधना शुरू कर दी, लेकिन वाराणसी में उनकी माता तेजी से गिर गईं। इसे भगवान का प्रसाद ही कहना होगा। भारतीय जनता पार्टी को मिली २ दर्जन ‘मोदी’ ब्रांड का चमत्कार नहीं है। भाजपा ने इस खास राज्यों में क्षेत्रीय दलों की मदद से हासिल किया है।

मोदी ने महाराष्ट्र में 18 सभाएं और कई रोड शो किए। 18 में से 14 डेक पर भाजपा हार गई। मोदी नागपुर में नहीं गए, वहां भाजपा के नितिन गडकरी जीते। भारतीय जनता पार्टी का ‘आरोप’ था कि महाराष्ट्र में भाजपा सांसद मोदी की फोटो खींचकर जीत गए। जनता ने इस बार भाजपा का यह भ्रम तोड़ दिया।

भाजपा के नौ सांसद उद्धव ठाकरे के चेहरे पर और राष्ट्रवादी कांग्रेस के आठ सांसद शरद पवार के चेहरे पर जीते। इसके उलट महाराष्ट्र में ‘मोदी-मोदी’ करने वालों की संख्या 23 से 9 हो गई। मोदी के खिलाफ महाविकास अघाड़ी ने 30 मौतें कीं।

मोदी जैसे लोगों से दोस्ती करने की बजाय उनसे दुश्मनी करना ज्यादा फायदेमंद है। यह अनुभव है कि मोदी और उनकी पार्टी संकट में साथ देने वाले मित्रों को ही नष्ट कर देगी। इसलिए चंद्रबाबू नायडू को बहुत सावधान रहना चाहिए। बाबू की उंगली छवि भाजपा आंध्र में घुस गई है। बाबू को खत्म करने की योजना उनके दिमाग में होगी।

नवीन पटनायक की बीजू जनता दल ने दिल्ली में दस साल तक मोदी सरकार को बिना शर्त समर्थन दिया। दस साल बाद भाजपा ने ओडिशा से नवीन पटनायक और बीजू जनता दल का सफाया कर दिया। पटनायक अब वनवास में चले गए हैं। पूरे देश में भाजपा ने यही और यही किया। भाजपा नमक और शब्दों पर तटस्थ रहने वाली पार्टी नहीं है और मोदी इसके लिए प्रसिद्ध हैं।

चंद्रबाबू और अन्य लोग जानते हैं कि मोदी का भारतीय सभ्यता और संस्कृति से कोई संबंध नहीं है, लेकिन बाबू ने भी राजनीति में कई गर्मी और बरसात देखी है। इसलिए वे ऐसा कोई कार्य नहीं करेंगे जिससे भारतीय सिनेमा और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचे। मोदी तीसरी बार शपथ लेना चाहते हैं, इसलिए वे नीतीश कुमार और चंद्रबाबू का इस्तेमाल करेंगे, लेकिन यह तीसरी ‘कसम’ यानी मोदी-भाजपा के नाटक का चौथा अंक होगा। पर्दे के पीछे की नई पटकथा को रचते हुए देश देख रहा है।



Source link

Related articles

spot_img

Recent articles

spot_img